नई दिल्ली

विकसित भारत निर्माण के लिए युवा अपनाएं सत्य, अहिंसा और अनुशासन: बिरला

विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को सत्य, अहिंसा, सादगी, अनुशासन और कर्तव्य भावना को जीवन में अपनाना चाहिए। बिरला ने कहा कि संविधान सदन का केंद्रीय कक्ष देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहां युवाओं की मौजूदगी उन्हें देश के लोकतांत्रिक इतिहास से जोडऩे का अवसर देती है
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Lok Sabha Speaker

नई दिल्ली। महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर शुक्रवार को संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में देश के विभिन्न हिस्सों से आए 500 से अधिक विद्यार्थियों ने दोनों नेताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत कई केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों और पूर्व सांसदों ने भी दोनों नेताओं की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की।

इस मौके पर ‘नो योर लीडर’ कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने युवाओं से गांधी और शास्त्री के जीवन, विचारों और जनसेवा से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को सत्य, अहिंसा, सादगी, अनुशासन और कर्तव्य भावना को जीवन में अपनाना चाहिए। बिरला ने कहा कि संविधान सदन का केंद्रीय कक्ष देश की लोकतांत्रिक और संवैधानिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यहां युवाओं की मौजूदगी उन्हें देश के लोकतांत्रिक इतिहास से जोडऩे का अवसर देती है। उन्होंने कहा कि गांधी ने सत्य, नैतिकता, अहिंसा और सत्याग्रह की शक्ति के जरिए यह दिखाया कि बिना हिंसा के भी बड़े सामाजिक और राजनीतिक बदलाव संभव हैं। युवाओं को उनके जीवन और दर्शन का अध्ययन करना चाहिए। कार्यक्रम में 36 चयनित युवाओं ने गांधी और शास्त्री के जीवन, विचारों और योगदान पर अपने विचार रखे। बिरला ने उनसे कार्यक्रम की सीख को अपने विद्यालयों और समुदायों तक पहुंचाने का आह्वान किया। इससे पहले उन्होंने राजघाट और विजय घाट पहुंचकर गांधी और शास्त्री की समाधियों पर श्रद्धांजलि अर्पित की।

शास्त्री की सादगी और दृढ़ता से सीखने का संदेश

बिरला ने लाल बहादुर शास्त्री की सादगी, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और निर्णय लेने की दृढ़ता को याद किया। उन्होंने शास्त्री के नारे ‘जय जवान, जय किसान’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसने कठिन दौर में देश को दिशा दी और राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खाद्य सुरक्षा के महत्व को सामने रखा। उन्होंने कहा कि आज युवाओं के पास तकनीक, ज्ञान और संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन लक्ष्य हासिल करने के लिए धैर्य, अनुशासन, नैतिक आचरण और निरंतर प्रयास भी जरूरी हैं। युवाओं का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उन्हें देश के विकास में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए।

Updated on:
03 Oct 2026 10:21 am
Published on:
03 Oct 2026 10:21 am