
Zoya Hasan News:दिल्ली के लोधी एस्टेट में मौजूद मशहूर सरदार पटेल विद्यालय में स्वतंत्रता दिवस का एक बड़ा प्रोग्राम आखिरी मौके पर कैंसिल करना पड़ा। जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की रिटायर्ड प्रोफेसर और जानी-मानी पॉलिटिकल एक्सपर्ट जोया हसन को इस कार्यक्रम में चीफ गेस्ट बनाकर बुलाया गया था। उन्हें यहां तिरंगा फहराना था और बच्चों को भाषण देना था, लेकिन ऐन मौके पर सुरक्षा और राजनीतिक कारणों का हवाला देकर उन्हें स्कूल आने से रोक दिया गया।
प्रोफेसर जोया हसन को स्कूल प्रिंसिपल की तरफ से हफ्तों पहले ही न्योता भेजा गया था। उन्हें 15 अगस्त से ठीक पहले 'विविधता का महत्व' (Why Pluralism Matters) टॉपिक पर बच्चों से बात करनी थी। लेकिन शुक्रवार सुबह करीब 8:30 बजे उनके पास एक मैसेज आया कि माहौल ठीक नहीं है। इसके थोड़ी देर बाद ही स्कूल के सिक्योरिटी हेड सीधे उनके घर पहुंचे और बताया कि बाहर विरोध प्रदर्शन हो रहा है और पुलिस आ चुकी है, इसलिए प्रोग्राम कैंसिल करना पड़ रहा है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक सुबह-सुबह स्कूल के बाहर 10-15 लोग इकट्ठा होकर नारेबाजी करने लगे थे। देखते ही देखते बात बढ़ गई और एहतियात के तौर पर वहां काफी पुलिस तैनात करनी पड़ी। बाद में स्कूल मैनेजमेंट ने माना कि बाहरी लोगों के जुटने और बनते माहौल को देखते हुए बच्चों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना पड़ा।
शुरुआत में इस विरोध प्रदर्शन के पीछे विश्व हिंदू परिषद (VHP) का नाम आ रहा था, लेकिन संगठन ने इससे साफ़ इनकार कर दिया। VHP के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और प्रवक्ता विनोद बंसल का कहना है कि इस प्रदर्शन से उनका कोई लेना-देना नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह ज़रूर कहा कि सरदार पटेल जैसे महान नेता के नाम पर चल रहे स्कूल को ऐसे लोगों को बुलाने से बचना चाहिए जिनकी सोच देश विरोधी रही हो।
इस घटना के सामने आने के बाद शिक्षा जगत से जुड़े लोग काफी नाराज हैं। देश की जानी-मानी अर्थशास्त्री जयती घोष और प्रोफेसर अपूर्वानंद जैसे विद्वानों ने इस फैसले की खुलकर आलोचना की। उनका कहना है कि अगर कुछ लोग बाहर हंगामा कर रहे थे, तो पुलिस को उन उपद्रवियों को हटाना चाहिए था, न कि चीफ गेस्ट का प्रोग्राम ही रद्द कर देना चाहिए था।
खुद प्रोफेसर जोया हसन ने इस पूरे मामले पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि स्कूल को उनके भाषण के विषय के बारे में पहले से सब पता था और तब किसी को कोई दिक्कत नहीं थी। अब इस पूरी घटना के बाद लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या स्कूलों और कॉलेजों में अपनी बात रखने की आजादी पर ऐसे ही रोक लगती रहेगी?