दो अलग-अलग साइबर ठगी मामलों से शहर में हड़कंप, पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की दी सलाह
दो अलग-अलग साइबर ठगी मामलों से शहर में हड़कंप, पुलिस ने लोगों को सतर्क रहने की दी सलाह
ग्वालियर। शहर में साइबर अपराधियों का जाल लगातार फैलता जा रहा है। डिजिटल ठग अब नई-नई चालें चलकर लोगों की जमा पूंजी मिनटों में साफ कर रहे हैं। ताजा मामलों में रिटायर्ड वन अधिकारी और एक पार्षद पति को ठगों ने अपना शिकार बनाया है।
मोबाइल गुम हुआ और खाते से उड़ गए लाखों
इंद्रानगर, थाटीपुर निवासी रिटायर्ड वन अधिकारी रामलखन शर्मा (67) ने पुलिस को बताया कि 1 फरवरी को मयूर मार्केट में खरीदारी के दौरान उनका मोबाइल फोन गुम हो गया था। उन्होंने तुरंत थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए सिम बंद भी करा दी थी।
इसके बावजूद ठगों ने बैंक खाते में सेंध लगा दी। 18 फरवरी को बैंक से कॉल आने पर उन्हें जानकारी मिली कि 2 से 18 फरवरी के बीच यूपीआई और आईएमपीएस के जरिए 11 लाख 74 हजार रुपए ट्रांसफर कर लिए गए हैं।
पीड़ित के अनुसार मोबाइल नंबर बैंक खाते से लिंक था, जिसका दुरुपयोग कर ठगी की गई। शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
कलेक्टर बनकर पार्षद पति से ठगे 75 हजार
दूसरे मामले में साइबर ठगों ने खुद को गुना कलेक्टर बताकर वार्ड 31 की पार्षद अंजना शिवहरे के पति हरिबाबू शिवहरे से 75 हजार रुपए ठग लिए।
हरिबाबू के मोबाइल पर गुना कलेक्टर किशोर कान्याल के नाम और फोटो से कॉल आया। कॉलर ने परिचित अंदाज में बातचीत करते हुए सीआरपीएफ कमांडेंट के नाम पर तत्काल पैसों की जरूरत बताई। भरोसा कर उन्होंने रकम ट्रांसफर कर दी।
अगले दिन संदेह होने पर असली कलेक्टर से बात करने पर ठगी का खुलासा हुआ।
पुलिस की एडवाइजरी
मोबाइल गुम होते ही बैंक और यूपीआई तुरंत ब्लॉक करें
अधिकारी या परिचित बनकर आए कॉल की पुष्टि करें
ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंक डिटेल साझा न करें
साइबर ठगी पर तुरंत हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें
पुलिस दोनों मामलों में साइबर ठगों की तलाश कर रही है।