
सकल जैन समाज ने कोलकाता में निकाली मौन रैली, जैन साध्वियों- संतों की सुरक्षा की पुरजोर मांग
एकता, अनुशासन एवं सामूहिक संवेदना का परिचय देते हुए सकल जैन समाज के बैनर तले शनिवार को समाज के लोगों ने महानगर की सड़कों पर मौन रैली निकाली। इसका मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश के रीवा में हुई सड़क दुर्घटना में जैन आर्यिका द्वय की मौत से पीड़ित जैन समाज को न्याय दिलाना और देशभर में पदविहार करने वाले जैन संतों व साध्वियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग करना था। इस मौन रैली के बाद सकल जैन समाज का प्रतिनिधिमंडल राजभवन पहुंचा, जहां राज्य के राज्यपाल आरएन रवि के नाम ज्ञापन सौंपा गया। प्रतिनिधिमंडल में विनोद कुमार काला, संदीप पाटनी, अजीत सेठी, अजय भंसाली एवं बुधमल लूनिया शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ने रीवा की घटना से उत्पन्न देशव्यापी पीड़ा एवं जैन समाज की गहरी चिंताओं से ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया तथा संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने का पुरजोर अनुरोध किया। ज्ञापन में कहा गया कि जैन संत एवं साध्वियां आजीवन केवल पैदल विहार करते हैं। अतः उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन का नैतिक, संवैधानिक एवं मानवीय दायित्व है। मौन रैली बड़ा मंदिर से शुरू होकर सत्यनारायण पार्क, एम.जी. रोड, ब्रेबर्न रोड, बेंटिक स्ट्रीट एवं एस्प्लेनेड मार्ग से गुजरते हुए धर्मतल्ला में सभा में परिवर्तित हो गई। रैली में बड़ी संख्या में जैन समाज के महिला, पुरुष, युवा एवं वरिष्ठ नागरिक हाथों में तख्तियां और बैनर लिए शांतिपूर्ण तरीके से सम्मिलित हुए।
मौन रैली का समापन दिवंगत आर्यिकाओ को श्रद्धांजलि अर्पित करने तथा न्याय एवं संत सुरक्षा की इस मुहिम को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक माध्यमों से आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ। ज्ञापन का मसौदा सकल जैन समाज की ओर से जैन रिसर्च फाउंडेशन के अध्यक्ष विनोद कुमार काला, जीतो कोलकाता चैप्टर के अध्यक्ष धर्मेन्द्र जैन तथा जैन समाज के युवा नेता जितेन्द्र काला द्वारा तैयार किया गया है। मौन रैली की व्यवस्था, मार्ग-व्यवस्था और सुचारु संचालन की जिम्मेदारी जैन समाज की अग्रणी स्वयंसेवी संस्था पुष्पांजलि के समर्पित कार्यकर्ताओं ने निभाई।
रीवा घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच हेतु विशेष जांच दल (एसआईटी) अथवा न्यायिक जांच आयोग का तत्काल गठन किया जाए। घटना से संबंधित सभी सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग एवं डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखकर उनकी निष्पक्ष जांच हो। इस दुखद दुर्घटना के जिम्मेदारों और दोषियों के विरुद्ध कठोर एवं त्वरित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। देश भर में विहाररत संतों एवं साध्वियों की सुरक्षा हेतु एक व्यापक “संत सुरक्षा प्रोटोकॉल” तत्काल लागू किया जाए। भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाई जाए। संतों एवं पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित मार्ग, विशेष सुरक्षा क्षेत्र तथा संरक्षित पैदल पथ विकसित किए जाएं। संतों की सुरक्षा और किसी भी आपात स्थिति में सहायता हेतु प्रशासनिक समन्वय तंत्र एवं हेल्पलाइन व्यवस्था स्थापित की जाए। संतों के विरुद्ध होने वाले अपराधों/दुर्घटनाओं को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखकर उनके मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
Updated on:
30 May 2026, 4:19 PM IST
Published on:
30 May 2026, 4:18 PM IST
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