
डेमोग्राफिक बदलाव के बीच बंगाल में जनगणना एक अगस्त से
डेमोग्राफिक बदलाव के बीच पश्चिम बंगाल में एक अगस्त से अगले साल फरवरी के अंत तक जनगणना की जाएगी। राज्य के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को संवाददाताओं को यह जानकारी देते हुए बताया कि जनगणना दो चरणों में संपन्न होगी। उन्होंने इस कवायद के महत्व पर जोर देते हुए लोगों से जनगणना प्रक्रिया में भाग लेने अपील की। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने जनगणना शुरू करने के संबंध में 16 मई, 2025 को पिछली राज्य सरकार को जरूरी पत्र-व्यवहार भेजा था तब सत्ता में मौजूद राज्य सरकार ने उस पत्र-व्यवहार का कोई जवाब नहीं दिया। यह भरोसा दिलाते हुए कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होगी, मुख्यमंत्री ने कहा कि जनगणना एक संवैधानिक और जरूरी प्रक्रिया है। इसका राजनीति, जाति या धर्म से कोई लेना-देना नहीं है।
सीएम ने उल्लेख किया कि राज्य के कुछ हिस्सों में घुसपैठ के कारण जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफिक) में बदलाव आया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की सीमा की स्थिति की संवेदनशीलता की ओर ध्यान दिलाते हुए बताया कि राज्य की बांग्लादेश के साथ लगभग 600 किलोमीटर लंबी एक बड़ी सीमा है। इस इलाके में कांटेदार तार की फेंसिंग न होने और पिछली सरकार के सीमा सुरक्षा बल को ज़मीन न देने की वजह से राज्य की जनसांख्यिकी संरचना में काफी बदलाव आया है। सीमा से घुसपैठ की समस्या बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनगणना का उद्देश्य केवल तथ्यात्मक जानकारी एकत्र करना है।
सुवेंदु ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार खासकर उस समय के मुख्य सचिव ने राजनीतिक मंजूरी का इंतजार करते हुए इस जरूरी काम को रोक दिया था, जिससे प्रशासनिक तौर पर गलत मिसाल कायम हुई। मुख्यमंत्री ने बताया कि यह पहली बार है जब जनगणना पूरी तरह से डिजिटल तरीके से की जा रही है। इसके अलावा, आम जनता के लिए एक खास प्रावधान जिसे सेल्फ-एन्यूमरेशन कहा जाता है, शुरू किया गया है, जिससे नागरिक अपनी जानकारी खुद डिजिटली रिकॉर्ड कर सकते हैं। सेल्फ-एन्यूमरेशन के लिए यह खास विंडो 1 अगस्त से 15 अगस्त तक चलेगी और इस सुविधा का इस्तेमाल 14 सितंबर तक किया जा सकता है। यह मानते हुए कि पश्चिम बंगाल इस प्रक्रिया में दूसरे राज्यों से थोड़ा पीछे है, मुख्यमंत्री ने अपील की कि पूरी प्रक्रिया तय समय में पूरी हो जाए।
हाल ही में बांग्लादेश बॉर्डर पर घुसपैठियों के लौटने की कोशिशों का ज़िक्र करते हुए सुवेंदु ने कहा कि जो लोग असली भारतीय नागरिक नहीं हैं, वे जनगणना में अपना नाम रजिस्टर करने के लिए जरूरी कागजात नहीं दिखा पाएंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि एक बार जब जनगणना का फाइनल डेटा उपलब्ध हो जाएगा, तो देश और राज्य दोनों के हितों के लिए बहुत सारी जरूरी जानकारी सामने आएगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि यह जनगणना केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शुरू की गई अलग-अलग पब्लिक वेलफेयर स्कीमों को लागू करने में मदद के लिए एक सही डेटा बैंक बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। राज्य सरकार का दावा है कि डिजिटल और भौतिक दोनों माध्यमों से होने वाली यह जनगणना प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, तेज और व्यापक होगी, जिससे राज्य की जनसंख्या और सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का सटीक आकलन संभव हो सकेगा।
घोषित कार्यक्रम के अनुसार, डिजिटल पंजीकरण के बाद फील्ड वेरिफिकेशन और घर-घर जाकर आंकड़ों का सत्यापन किया जाएगा। आम लोगों की सुविधा के लिए सरकार ने सहायता व्यवस्था भी शुरू की है। जनगणना संबंधी जानकारी और शिकायतों के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1855 तथा लैंडलाइन नंबर 033-23359503 जारी किया गया है। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में गठित नए मंत्रिमंडल की 11 मई को हुई पहली बैठक में जनगणना प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद राज्य सरकार ने जनगणना कार्य पूरा करने के लिए विभिन्न स्तरों के अधिकारियों को जिम्मेदारियां सौंपते हुए एक अधिसूचना जारी की
Updated on:
30 May 2026, 4:25 PM IST
Published on:
30 May 2026, 4:25 PM IST
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