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सेब की मिठास में छिपे जीवन के अनमोल सबक

Kids Corner: चित्र देखो कहानी लिखो 85 .... बच्चों की लिखी रोचक कहानियां परिवार परिशिष्ट (01 जुलाई 2026) के पेज 4 पर किड्स कॉर्नर में चित्र देखो कहानी लिखो 85 में भेजी गई सराहनीय कहानियां दी जा रही हैं।
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Jul 06, 2026
Apple Orchard Stories, Moral Stories for Kids,
Hindi Children's Stories,

सेबों का बगीचा

हितांशी चौबीसा, उम्र: 9 वर्ष
एक दिन रवि और रानी अपने स्कूल की पिकनिक पर एक सुंदर सेबों के बगीचे में गए। चारों ओर हरे-भरे पेड़ थे और उन पर लाल-लाल सेब लगे हुए थे। दोनों बच्चे बहुत खुश थे। बगीचे के माली ने उन्हें बताया कि बिना अनुमति के फल नहीं तोड़ने चाहिए। उसने प्यार से दोनों को कुछ पके हुए सेब तोड़कर दिए। रवि ने एक सेब अपनी टोकरी में रखा और दूसरा रानी को दे दिया। रानी मुस्कुराकर बोली, "धन्यवाद! हम इन्हें मिल-बांटकर खाएंगे।" दोनों बच्चों ने पेड़ों की सुंदरता का आनंद लिया और बगीचे को साफ रखने का संकल्प लिया। उन्होंने जमीन पर गिरे हुए कागज उठाकर कूड़ेदान में डाले। माली उनकी अच्छी आदत देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। उसने कहा, "जो बच्चे प्रकृति का सम्मान करते हैं, प्रकृति भी उन्हें खुशियां देती है।" घर लौटते समय रवि और रानी ने सोचा कि वे अपने घर में भी एक फलदार पौधा लगाएंगे। उन्होंने अपने माता-पिता से पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का वादा किया। उस दिन दोनों ने समझा कि पेड़ हमें फल, छाया और स्वच्छ हवा देते हैं, इसलिए हमें उनकी रक्षा करनी चाहिए। वे खुशी-खुशी अपने घर लौटे और अपने दोस्तों…

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ईमानदारी का मीठा फल

यथार्थ तिवारी, उम्र: 9 वर्ष
एक दिन यथार्थ और उसकी सहपाठी विद्यालय से घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें एक सुंदर सेब का बगीचा दिखाई दिया। पेड़ों पर लाल-लाल और पके हुए सेब लटक रहे थे। दोनों के मन में सेब खाने की इच्छा हुई, लेकिन उन्होंने बिना अनुमति कोई सेब नहीं तोड़ा। उसी समय बगीचे के मालिक दादाजी वहां आए। उन्होंने बच्चों का विनम्र व्यवहार देखकर कहा, "यदि तुम मेरी थोड़ी सहायता कर दो, तो मैं तुम्हें मीठे-मीठे सेब दूंगा।" दोनों बच्चों ने खुशी-खुशी पेड़ों के नीचे गिरे हुए सेब उठाकर टोकरी में व्यवस्थित रख दिए। उन्होंने पूरी लगन और ईमानदारी से काम किया। उनकी मेहनत और अच्छे संस्कार देखकर दादाजी बहुत प्रसन्न हुए। दादाजी ने दोनों बच्चों को ताजे और स्वादिष्ट सेब उपहार में दिए। उन्होंने समझाया, "बेटा, बिना अनुमति किसी की वस्तु लेना गलत बात है। ईमानदारी, मेहनत और अच्छे व्यवहार का फल हमेशा मीठा होता है।" यथार्थ और उसकी सहपाठी ने दादाजी का धन्यवाद किया और खुशी-खुशी घर लौट गए। उस दिन उन्होंने संकल्प लिया कि वे हमेशा सच्चाई, ईमानदारी और परिश्रम के मार्ग पर चलेंगे तथा दूसरों की वस्तु का सम्मान करेंगे।

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सेहत का मीठा उपहार

कृति भाटिया, उम्र: 8 वर्ष
राहुल और रानी शिमला के एक छोटे-से गांव में रहने वाले अच्छे मित्र थे। रानी के पिताजी का सेबों का एक सुंदर बाग था। एक दिन रानी ने राहुल को अपना बाग दिखाने के लिए बुलाया। पेड़ों पर लाल-लाल सेब देखकर राहुल बहुत खुश हुआ। रानी ने उसे ताजे और मीठे सेब खिलाए। राहुल ने बड़े स्वाद से सेब खाए। फिर रानी ने उसे बहुत सारे ताजे सेब घर ले जाने के लिए भी उपहार में दिए। उसने राहुल को बताया कि रोज एक सेब खाने से शरीर स्वस्थ रहता है। राहुल ने रानी का धन्यवाद किया और खुशी-खुशी घर लौट गया। उस दिन उसे प्रकृति के अनमोल उपहार और स्वस्थ जीवन के महत्व का एहसास हुआ।

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काव्या और आरव की दोस्ती

चिरायु, उम्र: 7 वर्ष
रामपुर गांव में काव्या नाम की एक प्यारी लड़की रहती थी। उसके घर के पास सेब का एक बड़ा बगीचा था। एक सुबह, काव्या अपनी लाल टोपी पहनकर बगीचे में सेब तोड़ने गई। पेड़ मीठे और लाल सेबों से लदे हुए थे। काव्या ने बहुत सारे ताजे सेब तोड़े और उन्हें एक बड़ी टोकरी में भर लिया। तभी वहां से आरव गुजरा, जो पीठ पर स्कूल बैग टांगे हुए था। बगीचे के सुंदर सेबों को देखकर वह बगीचे के पास रुक गया। काव्या ने आरव को देखा और मुस्कुराते हुए उसके पास आई। उसने टोकरी से एक बड़ा और रसीला सेब निकालकर आरव की तरफ बढ़ा दिया। आरव ने खुश होकर सेब ले लिया और कहा, "धन्यवाद काव्या! यह सेब तो बहुत स्वादिष्ट लग रहा है।" काव्या मुस्कुराई और बोली, "बांटकर खाने से चीजों का स्वाद और दोस्ती की मिठास दोनों बढ़ जाती है।" आरव खुश होकर स्कूल की तरफ चल दिया और काव्या अपने घर लौट गई।
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बगीचे का मीठा तोहफा


देवेन्द्र गुर्जर, उम्र: 12 वर्ष
सुंदर पहाड़ी वादियों के बीच एक छोटा-सा गांव बसा था, जहां रोहन और काव्या नाम के दो पक्के दोस्त रहते थे। उस दिन मौसम बहुत ही सुहावना था, हल्की धूप खिली थी और ठंडी हवा चल रही थी। रोहन अपने स्कूल का बैग टांगे और अपनी गुलाबी टोपी पहने घर लौट रहा था। तभी उसकी नजर रास्ते में लगे सेब के एक बड़े पेड़ पर पड़ी, जो रसीले और लाल सेबों से लदा हुआ था। रोहन ने सोचा कि क्यों न कुछ सेब तोड़ लिए जाएं। उसने जल्दी से अपना बैग उतारा और पेड़ पर चढ़ गया। उसने कुछ ही मिनटों में एक छोटा-सा टोकरा सेबों से भर लिया। पेड़ से उतरते ही उसे काव्या मिल गई, जो अपनी नारंगी टोपी पहने घूम रही थी। काव्या को देखकर रोहन के चेहरे पर मुस्कान आ गई। वह जानता था कि काव्या को सेब बहुत पसंद हैं। उसने टोकरे से सबसे बड़ा और लाल सेब निकाला और काव्या की तरफ बढ़ाते हुए कहा, "देखो काव्या, ये ताजा सेब!"काव्या की आंखें चमक उठीं। उसने खुशी से सेब पकड़ लिया और कहा, "अरे वाह रोहन! यह तो बहुत ही मीठा लग रहा है। धन्यवाद!"…

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ईमानदारी का मीठा फल

यथार्थ तिवारी, उम्र: 9 वर्ष
एक दिन यथार्थ और उसकी सहपाठी विद्यालय से घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें एक सुंदर सेब का बगीचा दिखाई दिया। पेड़ों पर लाल-लाल और पके हुए सेब लटक रहे थे। दोनों के मन में सेब खाने की इच्छा हुई, लेकिन उन्होंने बिना अनुमति कोई सेब नहीं तोड़ा। उसी समय बगीचे के मालिक दादाजी वहां आए। उन्होंने बच्चों का विनम्र व्यवहार देखकर कहा, "यदि तुम मेरी थोड़ी सहायता कर दो, तो मैं तुम्हें मीठे-मीठे सेब दूंगा।" दोनों बच्चों ने खुशी-खुशी पेड़ों के नीचे गिरे हुए सेब उठाकर टोकरी में व्यवस्थित रख दिए। उन्होंने पूरी लगन और ईमानदारी से काम किया। उनकी मेहनत और अच्छे संस्कार देखकर दादाजी बहुत प्रसन्न हुए। दादाजी ने दोनों बच्चों को ताजे और स्वादिष्ट सेब उपहार में दिए। उन्होंने समझाया, "बेटा, बिना अनुमति किसी की वस्तु लेना गलत बात है। ईमानदारी, मेहनत और अच्छे व्यवहार का फल हमेशा मीठा होता है।" यथार्थ और उसकी सहपाठी ने दादाजी का धन्यवाद किया और खुशी-खुशी घर लौट गए। उस दिन उन्होंने संकल्प लिया कि वे हमेशा सच्चाई, ईमानदारी और परिश्रम के मार्ग पर चलेंगे तथा दूसरों की वस्तु का सम्मान करेंगे।

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ईमानदार दोस्त

कविता शर्मा, उम्र: 11 वर्ष
एक गांव में राहुल और रीमा नाम के दो अच्छे दोस्त रहते थे। वे रोज साथ-साथ स्कूल जाते थे। एक दिन स्कूल से लौटते समय उन्हें रास्ते में एक सेब का पेड़ दिखाई दिया। पेड़ पर बहुत सारे लाल-लाल सेब लगे थे। दोनों ने सोचा कि बिना अनुमति के पेड़ से फल तोड़ना गलत है। तभी उन्होंने देखा कि पेड़ के नीचे कई पके हुए सेब गिरे पड़े हैं। दोनों बच्चों ने मिलकर गिरे हुए सेब इकट्ठा किए और उन्हें टोकरी में रखा। तभी पेड़ के मालिक वहां आए। उन्होंने देखा कि बच्चों ने ईमानदारी से केवल गिरे हुए सेब ही उठाए हैं और पेड़ को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया। उनकी इस अच्छी आदत से वे बहुत खुश हुए। पेड़ के मालिक ने प्यार से दोनों बच्चों को कुछ ताजे और मीठे सेब उपहार में दिए। राहुल और रीमा ने उनका धन्यवाद किया और खुशी-खुशी अपने घर लौट गए। उन्होंने अपने परिवार के साथ मिलकर सेब खाए और सारी बात बताई। परिवार वालों ने उनकी ईमानदारी और अच्छे व्यवहार की बहुत प्रशंसा की।

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सच्ची दोस्ती

जतिन, उम्र: 12 वर्ष
एक दिन सोनू और रीना स्कूल से घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें सेब का पेड़ दिखाई दिया। पेड़ से एक पका हुआ सेब नीचे गिर गया। दोनों ने उसे उठाया, लेकिन कोई भी अकेले खाना नहीं चाहता था। सोनू ने कहा, "चलो, इसे आधा-आधा बांट लेते हैं।" दोनों ने मिलकर सेब खाया और बहुत खुश हुए। तभी बगीचे के मालिक ने उनकी दोस्ती और ईमानदारी देखी। उन्होंने दोनों को एक-एक सेब और दे दिया। दोनों खुशी-खुशी घर चले गए।

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बगीचे में मिली सच्ची दोस्ती


यांशी, उम्र: 10 वर्ष
एक दिन रिया अपनी पसंदीदा लाल फ्रॉक पहनकर घर के पास वाले सेब के बगीचे में टहलने निकली। मौसम बहुत सुहाना था। पूरा बगीचा लाल, बड़े और मीठे सेबों से लदा हुआ था। पेड़ों पर लटके रसीले सेब देखकर रिया का मन खुश हो गया। वहां उसकी मुलाकात अपने एक पक्के दोस्त से हुई। दोनों दोस्त इतने सारे सेब देखकर बहुत उत्साहित हुए। उन्होंने मिलकर पेड़ों से ताजे और मीठे सेब तोड़ना शुरू किया। देखते ही देखते उन्होंने एक बड़ी-सी टोकरी सेबों से भर ली। इसी बीच रिया को एक बहुत ही अनोखा और चमकदार सेब मिला। वह खुशी से उछल पड़ी। उसने झट से वह सबसे सुंदर सेब अपने दोस्त को दिखाया और उसे उपहार में दे दिया। बगीचे का माहौल बेहद जादुई था। चारों तरफ ठंडी-ठंडी हवा चल रही थी, चिड़ियां मीठी आवाज में चहचहा रही थीं और हवा में पके हुए सेबों की सोंधी खुशबू फैली हुई थी। इस सुंदर वातावरण ने रिया और उसके दोस्त के दिन को बहुत खुशनुमा और यादगार बना दिया। इसके बाद दोनों एक पेड़ की छांव में आराम से बैठ गए। उन्होंने मजे से मीठे सेब खाए और ढेर सारी पुरानी…

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सच्ची दोस्ती का मीठा फल


जपिन सिंह, उम्र: 10 वर्ष
एक दिन रविवार की सुबह आरव और उसकी सहेली अन्या पास के सेबों के बाग में घूमने गए। पेड़ों पर लाल-लाल सेब लटके हुए थे। दोनों बच्चों ने माली से अनुमति लेकर टोकरी में सेब तोड़ने शुरू किए। वे बहुत खुश थे और हंसते-बातें करते काम कर रहे थे। कुछ देर बाद अन्या को एक बहुत बड़ा और चमकदार सेब मिला। तभी आरव की नजर एक छोटे-से पक्षी पर पड़ी, जो घायल होकर जमीन पर बैठा था। उसने अपना सेब उस पक्षी के पास रख दिया और माली से पानी लाकर उसे पिलाया। अन्या ने भी पक्षी की देखभाल में उसकी मदद की। यह सब देखकर माली बहुत खुश हुआ। उसने कहा, "तुम दोनों ने केवल फल नहीं तोड़े, बल्कि दया और मित्रता का भी परिचय दिया है।" माली ने दोनों बच्चों को ताजे सेबों से भरी एक बड़ी टोकरी उपहार में दी। घर लौटते समय दोनों ने तय किया कि वे इन सेबों को अपने परिवार और पड़ोस के बच्चों के साथ मिलकर खाएंगे, क्योंकि खुशी बांटने से और बढ़ जाती है। उस दिन दोनों ने समझ लिया कि सच्ची दोस्ती केवल साथ खेलने में नहीं, बल्कि एक-दूसरे…

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मीठे सेब

विवान, उम्र: 12 वर्ष
सीता और राहुल दोस्त थे। एक दिन वे एक बगीचे में खेल रहे थे। तभी उन्हें एक पेड़ दिखा, जो सेब का था। उस पेड़ को दूर से देखने पर सेब बड़े, लाल-लाल और बहुत मीठे-स्वादिष्ट दिख रहे थे। सीता और राहुल उस पेड़ के पास गए, और राहुल ने अपने बैग में से एक टोकरी निकाली। दोनों ने पेड़ से सेब तोड़कर टोकरी में रख दिए और स्वादिष्ट सेब खाए। सेब बहुत मीठे थे।

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सेब का पेड़

आकृति गुप्ता, उम्र: 9 वर्ष
एक दिन राहुल और रीमा स्कूल से घर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें एक बड़ा सेब का पेड़ दिखा। पेड़ पर बहुत सारे लाल-लाल सेब लगे थे। दोनों बच्चों ने कुछ सेब तोड़े और टोकरी में रख लिए। फिर वे सेब गिनने लगे। राहुल ने एक सेब रीमा को दिया। रीमा ने भी एक सेब राहुल को दिया। दोनों बहुत खुश हुए।

उन्होंने कुछ सेब अपने घर ले जाने का फैसला किया। जाते समय उन्होंने पेड़ को धन्यवाद कहा। घर पहुंचकर दोनों ने अपने परिवार के साथ सेब खाए। सभी को सेब बहुत स्वादिष्ट लगे। राहुल और रीमा खुश थे, क्योंकि उन्होंने मिलकर काम किया था।

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सच्ची दोस्ती का फल

सुमित गोठवाल, उम्र: 9 वर्ष
रोहन और रिया पक्के दोस्त थे। एक दिन स्कूल से लौटते समय वे गांव के बगीचे से निकले। बगीचे में सेब का पेड़ फलों से लदा था। कुछ सेब हवा से टूटकर नीचे गिरे पड़े थे। रिया बोली, "रोहन, देखो कितने सेब गिरे हैं! क्या हम इन्हें घर ले जाएं?"
रोहन ने मना कर दिया, "नहीं रिया, बिना पूछे किसी की चीज लेना चोरी होती है। माली काका को बुरा लगेगा।" तभी माली काका उधर से निकले। बच्चों को सेब देखते हुए पाकर वे मुस्कुराए। रोहन ने हिम्मत करके पूछा, "काका, क्या हम गिरे हुए सेब उठा सकते हैं?"

माली काका ने खुश होकर कहा, "शाबाश बेटा! तुम ईमानदार हो। ये गिरे हुए सेब तो खराब हो जाते। तुम दोनों एक-एक सेब ले लो, और यह टोकरी भरकर अपने घर भी ले जाओ।" रोहन और रिया बहुत खुश हुए। उन्होंने काका को धन्यवाद कहा और घर जाकर सेब सबको बांटे। मां ने कहा, "ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है।"

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मिल-बांटकर खाने की खुशी

आएशा मिर्जा, उम्र: 13 वर्ष

एक गांव में एक सुंदर बाग था। उस बाग में लाल-लाल सेबों से लदे पेड़ लगे हुए थे। एक दिन स्कूल से लौटते समय अहमद और आएशा उस बाग के पास पहुंचे। पेड़ों पर लगे सेब देखकर दोनों बहुत खुश हुए। उसी समय बाग के माली ने कुछ पके हुए सेब तोड़कर टोकरी में रख दिए और बच्चों से कहा, "बच्चो, ये सेब बहुत मीठे हैं। तुम दोनों इन्हें बांटकर खा लो।" अहमद ने एक सेब उठाया और मुस्कुराते हुए आएशा को दे दिया। आएशा ने भी एक सेब अहमद को दिया। फिर दोनों ने बाकी सेब टोकरी में रख दिए, ताकि उन्हें घर ले जाकर अपने परिवार के साथ भी बांट सकें।

घर पहुंचकर दोनों ने अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ मिलकर सेब खाए। सब बहुत खुश हुए। उस दिन बच्चों ने सीखा कि चीजों को अकेले खाने से जितनी खुशी नहीं मिलती, उससे कहीं अधिक खुशी उन्हें मिल-बांटकर खाने से मिलती है।

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जेमी और मोनी के संतरे

जयम शर्मा, उम्र: 9 वर्ष

जेमी और मोनी भाई-बहन थे। उनके घर के बाहर आंगन में एक संतरे का पेड़ था। वे रोज उसे पानी देते और उसकी अच्छी देखभाल करते थे। धीरे-धीरे उस पेड़ पर बहुत मीठे और रसीले संतरे आने लगे। जब संतरे पक गए, तो जेमी और मोनी ने उन्हें तोड़ा और टोकरी के अंदर इकट्ठा कर लिया। लेकिन उन्होंने संतरों को खुद खाने के बजाय पास के गरीब बच्चों में बांट दिया। बच्चों के चेहरे पर खुशी देखकर उन्हें बहुत अच्छा लगा। इस तरह उन्होंने सीख लिया कि असली खुशी दूसरों के साथ बांटने में ही होती है।

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एक मीठी दोस्ती की शुरुआत


यशवर्धन सिंह झाला, उम्र: 11 वर्ष
रोहन और टीना दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे और पड़ोसी भी थे, लेकिन उनके बीच अक्सर छोटी-मोटी नोक-झोंक चलती रहती थी। एक दिन, गर्मियों की छुट्टियों में, दोनों अपने-अपने घर से निकले। रोहन अपने नए नीले रंग के स्कूल बैग और टोपी पहनकर पार्क की तरफ जा रहा था, और टीना अपनी पसंदीदा लाल फ्रॉक पहनकर उसी दिशा में बढ़ रही थी। पार्क के कोने में एक बड़ा, रसीला सेब का पेड़ था। सेबों से लदा यह पेड़ दोनों को ही बहुत पसंद था। वे दोनों एक ही समय पर वहां पहुंचे। पेड़ पर इतने सारे सेब देखकर दोनों हैरान रह गए। रोहन ने सोचा कि वह टीना से पहले सारे सेब तोड़ लेगा। वह जल्दी से पेड़ पर चढ़ने की कोशिश करने लगा। लेकिन टीना, जो थोड़ी होशियार थी, उसने एक तरकीब सोची। उसने पास ही एक खाली बाल्टी देखी और रोहन से नीचे से कहा, "तुम पेड़ पर चढ़ो और सेब तोड़ो, और मैं उन्हें बाल्टी में जमा करूंगी। फिर हम दोनों मिलकर आधे-आधे सेब बांट लेंगे।" रोहन को यह सुझाव पसंद आया। वह पेड़ पर चढ़ गया और टीना बाल्टी लेकर नीचे खड़ी…

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परी और जादुई फूल

शिवानी डेंडोर, उम्र: 9 वर्ष
एक गांव में परी और चिन्टू रहते थे। परी और चिन्टू बहुत अच्छे दोस्त थे। एक दिन परी और चिन्टू घूमने निकले। रास्ते में उन्हें एक बगीचा दिखाई दिया। परी बोली, "मुझे उस बगीचे में जाना है।" वे दोनों बगीचे में गए। चिन्टू ने वहां सेब का पेड़ देखा और वह सेब खाने चला गया। तभी परी ने एक सुंदर फूल देखा। उस फूल ने परी को अपनी ओर आकर्षित कर लिया। जैसे ही परी ने उस फूल को छुआ, वह अपने आप उस फूल में कैद हो गई।

चिन्टू, परी को पुकारते-पुकारते उस फूल के पास आया। तभी परी ने फूल के अंदर से कहा, "मुझे बचाओ!" चिन्टू ने एक लकड़ी से उस फूल को तोड़ दिया। फूल टूटते ही उसकी सारी जादुई शक्ति खत्म हो गई और परी भी बाहर आ गई। इसके बाद चिन्टू ने परी को अपनी टोकरी में रखे सेब दिए। दोनों खुशी-खुशी अपने घर लौट गए।

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मेहनत और साझेदारी की कहानी


राजवीर प्रताप महतो, उम्र: 13 वर्ष
एक सुंदर पहाड़ी गांव में अमन और सिया नाम के दो भाई-बहन रहते थे। उनके घर के पास ही एक छोटा-सा सेब का बगीचा था, जिसकी देखभाल वे दोनों अपने माता-पिता के साथ मिलकर करते थे। इस साल मौसम बहुत अच्छा रहा, जिससे बगीचे के पेड़ों पर बड़े, चमकदार और लाल-लाल सेब आए थे। स्कूल की छुट्टियां होते ही दोनों ने बगीचे से सेब तोड़ने के काम में हाथ बंटाने का फैसला किया। सुबह की ताजी हवा के बीच अमन ने अपनी पीठ पर स्कूल बैग जैसा दिखने वाला एक थैला टांगा और पेड़ की निचली डालियों से पके हुए सेब तोड़ने लगा। सिया लकड़ी की बाड़ के पास खड़ी होकर टोकरी संभाल रही थी। अमन जितने भी सेब तोड़ता, सिया उन्हें बड़े प्यार से नीचे रखी टोकरी में सजाती जाती। देखते ही देखते टोकरी ताजे और रसीले सेबों से पूरी भर गई। काम पूरा होने के बाद अमन ने टोकरी में से सबसे बड़ा और सबसे लाल सेब निकाला। उसने वह सेब सिया की तरफ बढ़ाते हुए कहा, "सिया, यह सेब तुम्हारी आज की मेहनत का इनाम है।" सिया ने मुस्कुराते हुए अपने दोनों हाथों से सेब…

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बगीचे की सैर और मीठे सेब


काव्या पंचारिया, उम्र: 8 वर्ष
सोनू और राधा दोनों बहुत पक्के दोस्त थे। वे हमेशा एक-दूसरे के साथ नए-नए खेल खेलते और गांव की सैर पर निकलते थे। एक सुहावनी सुबह, दोनों ने तय किया कि आज वे गांव के किनारे बने बड़े-से सेब के बगीचे में घूमने जाएंगे। सोनू ने अपनी नीली ड्रेस और गुलाबी टोपी पहनी, वहीं राधा ने अपनी पसंदीदा लाल फ्रॉक चुनी। दोनों एक खाली टोकरी लेकर घर से निकल पड़े। बगीचे में पहुंचते ही उन्होंने देखा कि सेब का पेड़ बड़े-बड़े, लाल और रसीले सेबों से लदा हुआ था। पेड़ के चारों तरफ लकड़ी की एक सुंदर बाड़ बनी हुई थी। सोनू ने झटपट पेड़ से नीचे गिरे ताजे सेबों को चुनना शुरू किया, और राधा ने भी उसका साथ दिया। कुछ ही देर में उनकी छोटी-सी टोकरी पूरी तरह से सेबों से भर गई। सोनू ने टोकरी में से एक बड़ा और चमकदार सेब अपने हाथ में उठाया और मुस्कुराते हुए राधा से कहा, "राधा, देखो यह सेब कितना बड़ा है! इसे हम दोनों आधा-आधा बांटकर खाएंगे।" राधा ने भी अपने हाथ में एक सुंदर सेब लिया और खुशी से ताली बजाने लगी। दोनों दोस्त अपनी मेहनत…

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दोस्ती का मीठा फल


स्नेहा, उम्र: 10 वर्ष
कार्तिक और स्नेहा सबसे पक्के दोस्त थे। स्कूल की छुट्टियों में दोनों रिया के नाना जी के बगीचे में गए। वहां एक बहुत बड़ा सेब का पेड़ था। लाल-लाल सेब देखकर दोनों के मुंह में पानी आ गया। कार्तिक ने कहा, "स्नेहा, हम कुछ सेब तोड़कर घर ले चलते हैं। दादी सेब का मुरब्बा बनाएंगी।" स्नेहा भी खुश हो गई। दोनों ने मिलकर एक टोकरी भरी। तभी स्नेहा ने देखा कि पेड़ के नीचे एक छोटा पक्षी का घोंसला है। उसमें दो नन्हे बच्चे चूं-चूं कर रहे थे। स्नेहा बोली, "कार्तिक, रुक जाओ! अगर हम सारे सेब तोड़ लेंगे, तो पक्षियों का क्या होगा? ये भी तो भूखे हैं।" कार्तिक ने सोचा और फिर मुस्कुराया। उसने टोकरी में से आधे सेब निकालकर पेड़ के नीचे रख दिए। "ये लो, तुम्हारा हिस्सा," उसने चिड़िया से कहा। स्नेहा बहुत खुश हुई। दोनों ने एक-एक सेब खाया। वाह! कितना मीठा और रसीला था। तभी नाना जी आए और बोले, "शाबाश बच्चो! असली समझदारी यही है कि हम सिर्फ अपना न सोचें। प्रकृति ने सबके लिए फल बनाए हैं।" कार्तिक और स्नेहा ने सीखा कि बांटकर खाने से खुशी और प्यार दोनों बढ़ते हैं। उस…

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मीनू और अमित का सहयोग

रक्षिता चौधरी, उम्र: 9 वर्ष
गांव के पास सुंदर बगीचा था, जहां सेब का एक बड़ा पेड़ लाल-लाल फलों से लदा हुआ था। एक दिन अमित और उसकी बहन मीनू वहां घूमने गए। इतने सारे पके सेब देखकर दोनों बहुत खुश हुए। पेड़ की डालियां नीचे थीं, इसलिए उन्हें किसी सीढ़ी की जरूरत नहीं पड़ी। भाई अमित ने आगे बढ़कर डालियों से ताजे सेब तोड़ना शुरू किया। उसकी छोटी बहन मीनू नीचे जमीन पर टोकरी लेकर खड़ी हो गई। अमित सेब तोड़कर प्यार से मीनू की टोकरी में डालता गया। दोनों ने मिलकर कुछ ही देर में पूरी टोकरी भर ली। दोनों भाई-बहन हंसते-खेलते खुशी-खुशी घर लौट आए।

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एक सेब की असली मिठास

गरवी अग्रवाल, उम्र: 13 वर्ष
एक दिन स्कूल से लौटते समय राहुल और उसकी सहेली रानी एक सेब के बगीचे के पास पहुंचे। पेड़ों पर लाल-लाल सेब देखकर दोनों के चेहरे खुशी से खिल उठे। तभी बगीचे के मालिक ने उनकी उत्सुकता देखकर मुस्कुराते हुए कहा, "अगर तुम चाहो तो कुछ सेब तोड़ सकते हो।" दोनों ने बहुत सोच-समझकर केवल उतने ही सेब तोड़े, जितने उनकी छोटी-सी टोकरी में आ सकते थे। राहुल ने एक सेब रानी की ओर बढ़ाते हुए कहा, "फल की मिठास तभी अच्छी लगती है, जब उसे अपने किसी प्रिय के साथ बांटा जाए।" रानी मुस्कुराई और बोली, "सच कहा। खुशी भी सेब की तरह होती है, जितनी बांटो, उतनी बढ़ती जाती है।"

घर लौटते समय दोनों ने रास्ते में मिले एक छोटे बच्चे को भी एक-एक सेब दे दिया। बच्चे की मुस्कान देखकर उन्हें एहसास हुआ कि सबसे मीठा स्वाद सेब का नहीं, बल्कि किसी के चेहरे पर खुशी लाने का होता है।

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सेबों की बगिया में नेहल और गौरिक


नेहल जैन, उम्र: 10 वर्ष
एक दिन सुबह-सुबह नेहल और उसका मित्र गौरिक अपने विद्यालय से घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें एक सुंदर बगीचा दिखाई दिया। उस बगीचे में सेब के पेड़ों पर लाल-लाल और रसदार सेब लगे हुए थे। पेड़ों को देखकर दोनों बहुत खुश हुए। नेहल ने कहा, "गौरिक, देखो! कितने सुंदर सेब हैं।" गौरिक मुस्कुराते हुए बोला, "हां, ये तो बहुत स्वादिष्ट लग रहे हैं।" तभी उन्होंने देखा कि बगीचे के माली ने कुछ सेब तोड़कर एक टोकरी में रख दिए हैं। माली ने दोनों बच्चों की उत्सुकता देखकर उन्हें कुछ सेब खाने के लिए दे दिए। नेहल और गौरिक ने माली को धन्यवाद कहा और एक-एक सेब हाथ में लेकर खाने लगे। सेब खाते हुए नेहल ने कहा, "फल खाना हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है।" गौरिक ने भी सहमति जताते हुए कहा, "हां, हमारी शिक्षिका भी हमें रोज फल और हरी सब्जियां खाने की सलाह देती हैं।" दोनों बच्चों ने माली की मदद करते हुए कुछ सेब टोकरी में भी रखे। माली उनकी सहायता और अच्छे व्यवहार से बहुत प्रसन्न हुआ। उसने उन्हें मेहनत, ईमानदारी और प्रकृति से प्रेम करने का संदेश दिया।…

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संतरे और सच्ची दोस्ती

जयम शर्मा, उम्र: 9 वर्ष
टप्पू और सोनू दोनों अच्छे दोस्त थे। एक दिन टप्पू स्कूल से घर लौट रहा था। रास्ते में उसने देखा कि सोनू बगीचे में संतरे टोकरी में इकट्ठा कर रही थी। तभी अचानक सोनू का पैर फिसल गया और उसकी टोकरी नीचे गिर गई। सारे संतरे इधर-उधर फैल गए। टप्पू तुरंत रुक गया, पर वह हंसा नहीं। वह जल्दी से सोनू के पास गया और उसकी मदद करने लगा। दोनों ने मिलकर सारे संतरे उठाए और टोकरी के अंदर रख दिए। फिर दोनों खुश होकर मुस्कुरा दिए।

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सेबों की मीठी सीख


गौरिक जैन, उम्र: 13 वर्ष
एक दिन की बात है। अमित और नीलिमा अपने स्कूल से घर लौट रहे थे। रास्ते में उन्हें एक सुंदर बगीचा दिखाई दिया। बगीचे में एक बड़ा-सा सेब का पेड़ था, जिस पर लाल-लाल पके हुए सेब लटक रहे थे। दोनों बच्चों ने माली से अनुमति मांगी। माली उनकी विनम्रता देखकर मुस्कुराया और बोला, "तुम जितने सेब चाहो, तोड़ सकते हो, लेकिन पेड़ को कोई नुकसान नहीं पहुंचाना।" अमित और नीलिमा ने सावधानी से कुछ पके हुए सेब तोड़े और उन्हें टोकरी में रखने लगे। तभी नीलिमा ने देखा कि पेड़ के नीचे कुछ सेब गिरे हुए हैं। उसने उन्हें भी उठाकर अलग रख दिया, ताकि वे व्यर्थ न जाएं। अमित ने कहा, "हम इन अच्छे सेबों को अपने घर ले जाएंगे, और गिरे हुए सेबों से माली चाचा जैम बना सकते हैं।" इतने में पास से कुछ छोटे बच्चे आए। वे सेब देखकर खुश हो गए, पर उनके पास खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। अमित और नीलिमा ने बिना झिझक अपनी टोकरी में से कुछ सेब उन्हें दे दिए। बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। माली यह सब देख रहा था। वह उनकी दयालुता और उदारता से…

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सेब का बगीचा


कृष्णा बागड़ा, उम्र: 12 वर्ष
नमन और मिकू बहुत अच्छे दोस्त थे। एक दिन वे दोनों छुट्टी के दिन सैर पर निकले। चलते-चलते उन्हें एक सेब का बगीचा दिखा। बगीचे में सेब के पेड़ पर खूब सारे सेब लगे देखकर उनका मन मचल गया, और उन्होंने टोकरी भरकर फल तोड़ लिए। फिर दोनों ने खुशी-खुशी सेब आपस में बराबर बांट लिए और अपने घर चले गए।
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छुट्टियां, सेब और मुस्कान


प्रिशा चौधरी, उम्र: 9 वर्ष
गर्मियों की छुट्टियां थीं। जयंश, जो प्रिशा की मौसी का बेटा है, छुट्टियां बिताने प्रिशा के घर आया। जयंश के आने की खुशी में प्रिशा ने अपनी सुंदर-सी लाल फ्रॉक पहनी। वह बहुत प्यारी लग रही थी। प्रिशा के घर के आंगन में लाल-लाल सेबों का एक बहुत बड़ा पेड़ था। पेड़ पर इतने सारे चमकदार सेब लगे थे कि जयंश उन्हें देखकर बहुत खुश हो गया। जयंश बोला, "वाह प्रिशा! तुम्हारे घर का सेब का पेड़ तो कितना बड़ा और सुंदर है!" प्रिशा मुस्कुराकर बोली, "हां! हर साल इस पेड़ पर बहुत सारे मीठे-मीठे सेब लगते हैं। चलो, मैं तुम्हें तोड़कर देती हूं।" दोनों ने मां से अनुमति ली। फिर उन्होंने पेड़ से लाल-लाल पके हुए सेब तोड़े,…

Updated on:
06 Jul 2026 03:23 pm
Published on:
06 Jul 2026 03:23 pm