- नगर निगम प्रशासन ने व्यवस्थाओं के नाम पर बनाई दूरियां, दुकानदारों से टीनशैड व बिजली के अलग से पैसे वसूल रहे हैं प्राइवेट लोग - नगर निगम से जिस दुकान की रेट 5200 रुपए तय की, उसका मेला में वसूला जा रहा है 16000 से अधिक रुपए
मुरैना. पशुपतिनाथ महादेव मेला कभी मुरैना की सांस्कृतिक धरोहर के नाम से जाना जाता था आज हाट बाजार बनकर रह गया है। यहां नगर निगम की आड़ में दुकानों का आवंटन प्राइवेट लोग कर रहे हैं। दुकानदारों से मनमाने पैसे वसूले जा रहे हैं, उसके बाद भी सुविधाएं स्वयं जुटा रहे हैं।
पशुपतिनाथ महादेव मेला में कई दशक से मुरैना में लगता आ रहा है लेकिन इस बार जिस तरह की अव्यवस्थाएं सामने आ रही हैं, वैसी पहले कभी नहीं दिखाई नहीं दी। दुकानदारों से मनमानी राशि वसूलने के बाद भी बारिश होने पर स्वयं दुकानदारों को मिट्टी डलवानी पड़ रही है, वहीं टीनशैड व बिजली का अलग से भुगतान करना पड़ रहा है। मेले में कुछ दुकानदार तो ऐसे हैं चार पीड़ी से लगातार मेले में दुकान लगा रहे हैं, उनको कहना हैं कि ऐसी स्थिति पहले कभी नहीं देखी जो इस बार देखी जा रही है। मेले का शुरू हुए एक महीना हो गया लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं हैं। दूर दूर से आए दुकानदार मजबूरी में अपनी दुकान लगा रहे हैं। पैसा खर्च करके दिल्ली, आगरा व बाड़ी आदि स्थानों से आए हैं, अगर वह लौटते तो भी मुश्किल है। चर्चा है कि नगर निगम के कुछ अधिकारी कर्मचारियों द्वारा अपने रिश्तेदार व परिचितों को ठेका दे दिया है, उनमें निगम के एक राजस्व विभाग के कर्मचारी का भाई भी पार्टनर बताया गया है, उनके द्वारा ही दुकानदारों से अवैध वसूली करवाई जा रही है। खबर है कि मेले में झूलों की फिटनिस नहीं हैं, अगर हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा।
एक माह बाद भी सांस्कृतिक कार्यक्रम तय नहीं
नगर निगम के मेला को शुरू हुए एक माह हो गया अभी तक सांस्कृतिक कार्यक्रम तय नहीं हैं। कवि सम्मेलन, कब्बाली, रामलीला, नुक्कड़ नाटक रंगमंच पर होते थे लेकिन अब कार्यक्रम तो दूर रंगमंच तक तैयार नहीं हुआ है। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से मेले के साथ साथ दुकानदारों की आय बढ़ती है लेकिन इस बार तो मेला चंद लोगों की आय का साधन बनकर रह गया है।
क्या कहते हैं दुकानदार
क्या कहते हैं जिम्मेदार