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जयंती स्पेशल: जानिए, ऋषिकेश मुखर्जी की आम आदमी से प्रेरित फिल्में, जिन्होंने बदली हिंदी सिनेमा की तस्वीर

भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की 30 सितंबर को जयंती है। ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। ऋषिकेश मुखर्जी की कुछ चर्चित फिल्मों ने हिंदी सिनेमा को एक अलग दिशा दी है।
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Sep 29, 2026
Indian cinema director Hrishikesh Mukherjee
भारतीय सिनेमा के दिग्गज निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी (सोर्स- Chatgpt)

हिंदी सिनेमा में "हृषि दा" के नाम से मशहूर ऋषिकेश मुखर्जी की 30 सितंबर को 104वीं जयंती है। उनका जन्म 30 सितंबर 1922 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने करीब 42 फिल्मों का निर्देशन किया। वे 4 दशकों से ज्यादा लंबे करियर में मध्यवर्गीय सिनेमा के अग्रदूत माने गए। उनकी फिल्मों में पति-पत्नी के रिश्ते, दोस्ती, दफ्तर और घर की छोटी उलझनें हल्के-फुल्के अंदाज में दिखती हैं।

विज्ञान से सिनेमा तक का सफर

ऋषिकेश मुखर्जी ने गणित और विज्ञान की पढ़ाई की। उन्होंने छात्रों को गणित भी पढ़ाया, फिर कैमरा वर्क और एडिटिंग होते हुए निर्देशन में आए। ऋषिकेश मुखर्जी की पहली फिल्म 'मुसाफिर' 1957 में आई थी। इस फिल्म में दिलीप कुमार और किशोर कुमार मुख्य भूमिका में थे। यह फिल्म बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन 1959 में आई दूसरी फिल्म 'अनाड़ी' सफल रही।

दादा साहेब फाल्के और पद्म विभूषण सम्मान

भारत सरकार ने ऋषिकेश मुखर्जी को 1999 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और 2001 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया। वे केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC) के अध्यक्ष भी रहे। 27 अगस्त 2006 को मुंबई में उनका निधन हो गया था।

मील का पत्थर बनीं ये फिल्में

सत्यकाम (1969): इस फिल्म में धर्मेंद्र ने आदर्शवादी युवक सत्यप्रिय आचार्य की भूमिका निभाई, जो हर हाल में सच और ईमानदारी के साथ जीना चाहता है। 17वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में इसे हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुना गया।

आनंद (1971): राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की इस फिल्म में गुलजार ने संवाद लिखे थे। फिल्म की शूटिंग सिर्फ 28 दिन में पूरी हुई। इसे हिंदी की सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 19वें फिल्मफेयर में इसने 6 पुरस्कार जीते, जिनमें सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ अभिनेता (राजेश खन्ना) और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता (अमिताभ बच्चन) शामिल हैं।

बावर्ची (1972): इस फिल्म में राजेश खन्ना एक उलझे हुए परिवार में बावर्ची बनकर आते हैं और अपने व्यवहार से माहौल बदल देते हैं। फिल्म की कहानी तपन सिन्हा की थी, संवाद गुलजार के, और इसे उस साल की आठवीं सबसे ज्यादा कमाई वाली फिल्म बताया गया है। अमिताभ बच्चन ने इसमें नैरेशन दिया था।

अभिमान (1973): यह एक गायक पति और उसकी ज्यादा लोकप्रिय होती पत्नी के बीच अहंकार और बराबरी की कहानी है। 21वें फिल्मफेयर में जया बच्चन को इसके लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का पुरस्कार मिला, जो डिंपल कपाड़िया (बॉबी) के साथ साझा था।

मिली (1975): इस फिल्म में गंभीर बीमारी से जूझ रही एक हंसमुख लड़की की कहानी है। इसमें जया बच्चन और अमिताभ बच्चन थे।

चुपके-चुपके और गोलमाल: इन दोनों फिल्मों ने साबित किया कि वे हल्की-फुल्की कॉमेडी में भी माहिर थे।

Updated on:
29 Sept 2026 04:17 pm
Published on:
29 Sept 2026 04:17 pm