ग्वालियर. दुनिया एक तरफ युद्ध की आग में तप रही है, जिससे ग्वालियर के बाजारों में कमर्शियल सिलेंडरों का पारा भी चढ़ा हुआ है। लेकिन कहते हैं न कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। ग्वालियर के जैन छात्रावास में हुई एक शादी ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो गैस की किल्लत […]
ग्वालियर. दुनिया एक तरफ युद्ध की आग में तप रही है, जिससे ग्वालियर के बाजारों में कमर्शियल सिलेंडरों का पारा भी चढ़ा हुआ है। लेकिन कहते हैं न कि आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है। ग्वालियर के जैन छात्रावास में हुई एक शादी ने उन लोगों को करारा जवाब दिया है जो गैस की किल्लत का रोना रोकर हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। इस शादी ने साबित कर दिया कि अगर नीयत साफ हो, तो बिना नीली टंकी के भी 400 लोगों की दावत उड़ाई जा सकती है। ये पूरी शादी डीजल-कोयला, इलेक्ट्रिक भट्टी के साथ चूल्हे पर निपटा दी गई, बगैर कमर्शियल सिलेंडर के।
आंकड़ों का जायका : बिना सिलेंडर ऐसे सजी थाली
जैन परिवार की इस शादी में मेहमानों की खातिरदारी में कोई कमी नहीं थीए बस कमी थी तो सिर्फ उस गैस सिलेंडर की, जिसके पीछे शहर भाग रहा है।
जुगाड़ नहीं, यह मैनेजमेंट है
कैटरर खुशी (विकास) जैन ने वह कर दिखाया जो आज के दौर में नामुमकिन सा लगता है। जहां इस भव्य आयोजन में कम से कम 25 कमर्शियल सिलेंडर फुंक जाते, वहां एक भी माचिस सिलेंडर के नॉब पर नहीं जली। इसकी जगह मोर्चा संभाला इन देसी और मॉडर्न योद्धाओं ने-
सबक : संकट में सुलगना नहीं, सीखना जरूरी है
यह शादी सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि उन मुनाफ़ाखोरों और संकट से घबराने वालों के लिए एक कड़ा संदेश है। जब मिडिल-ईस्ट के तनाव से सिलेंडर की सप्लाई चेन डगमगाई, तो ग्वालियर के इस हुनर ने अपनी खुद की सप्लाई चेन खड़ी कर दी। इस खबर का संदेश साफ है, गैस खत्म हो सकती है, जज्बा नहीं।
यह अनुभव बेमिसाल था
हमने सैकड़ों शादियां की हैं, लेकिन यह अनुभव बेमिसाल था। यह न सिर्फ गैस की किल्लत का तोड़ है, बल्कि यह भी बताता है कि हम विकल्पों पर काम करें तो किसी भी संकट से पार पा सकते हैं।