समाचार

मोदी-पेजेश्कियन संवाद से क्या बदलेगा भारत–ईरान समीकरण? BRICS, चाबहार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर टिकी नजर

India Iran Relations Modi Pezeshkian : प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच संवाद ने द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी है। जानिए BRICS शिखर सम्मेलन, चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय सुरक्षा पर इसका प्रभाव।
2 min read
Aug 31, 2026
India Iran diplomatic relations 2026
India Iran diplomatic relations 2026 : BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी–पेजेश्कियन संभावित द्विपक्षीय बैठक, PC- Chatgpt

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच हाल के महीनों में हुई बातचीतों ने भारत–ईरान संबंधों को नई गति दी है। ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा, चाबहार बंदरगाह और BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग को लेकर दोनों देशों के बीच संवाद लगातार बढ़ा है। यही वजह है कि आगामी BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान संभावित मुलाकात पर कूटनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।

पश्चिम एशिया संकट के बीच बढ़ा संवाद

मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेजेश्कियन के बीच टेलीफोन पर बातचीत हुई थी। इस दौरान पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की उस स्थायी नीति को दोहराया कि सभी विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने नौवहन की स्वतंत्रता और ऊर्जा आपूर्ति के निर्बाध प्रवाह के महत्व पर भी जोर दिया।

इसके बाद जून 2026 में दोनों नेताओं के बीच फिर बातचीत हुई। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने पश्चिम एशिया की स्थिति और हालिया घटनाक्रमों पर अपना दृष्टिकोण साझा किया, जबकि मोदी ने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।

BRICS के जरिए बढ़ रहा सहयोग

जून के अंत और जुलाई 2026 में हुए संवादों में BRICS सहयोग प्रमुख विषयों में शामिल रहा। ईरान ने BRICS के भीतर भारत के साथ सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई और दोनों देशों ने बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय मजबूत करने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति पेजेश्कियन को भारत में आयोजित होने वाले BRICS नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।

सितंबर में संभावित मुलाकात पर नजर

सितंबर 2026 में भारत की मेजबानी में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन को भारत–ईरान संबंधों के लिए अहम अवसर माना जा रहा है। यदि राष्ट्रपति पेजेश्कियन इसमें शामिल होते हैं, तो प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता में चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा सहयोग, क्षेत्रीय संपर्क और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं।

चाबहार बंदरगाह क्यों है अहम?

चाबहार बंदरगाह भारत की क्षेत्रीय संपर्क रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराता है। दोनों देशों ने पहले भी इस परियोजना को रणनीतिक महत्व का बताया है और इसे क्षेत्रीय व्यापार एवं संपर्क बढ़ाने का माध्यम माना है।

ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की चिंता

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है। ऐसे में फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालिया वार्ताओं में प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षित समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता को भारत की प्राथमिकताओं में शामिल बताया है।

क्या संबंधों को मिलेगी नई दिशा?

हालिया संवादों से यह संकेत मिलता है कि भारत और ईरान पारंपरिक मित्रता को नई रणनीतिक साझेदारी में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। BRICS सहयोग, चाबहार परियोजना और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे दोनों देशों को करीब ला रहे हैं। हालांकि पश्चिम एशिया की जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियां और वैश्विक शक्ति संतुलन इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। इसके बावजूद दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ता संवाद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

आगे किन बातों पर रहेगी नजर?

  • BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी–पेजेश्कियन संभावित द्विपक्षीय बैठक।
  • चाबहार बंदरगाह और क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाओं से जुड़ी नई घोषणाएं।
  • ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर दोनों देशों की साझा पहल।
  • पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को लेकर संभावित संयुक्त रुख।
Updated on:
31 Aug 2026 09:54 am
Published on:
31 Aug 2026 09:21 am