यूएनओसी-3: पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. सिंह ने साझा कीं उपलब्धियां नीस. नई दिल्ली. तीसरे संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (यूएनओसी3) में भारत ने महासागरों के संरक्षण के लिए वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारत की गहन समुद्री रणनीति प्रस्तुत करते हुए ‘ग्लोबल ओशन पैक्ट’ की मांग की […]
यूएनओसी-3: पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. सिंह ने साझा कीं उपलब्धियां
नीस. नई दिल्ली. तीसरे संयुक्त राष्ट्र महासागर सम्मेलन (यूएनओसी3) में भारत ने महासागरों के संरक्षण के लिए वैश्विक कार्रवाई का आह्वान किया है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने भारत की गहन समुद्री रणनीति प्रस्तुत करते हुए ‘ग्लोबल ओशन पैक्ट’ की मांग की और भारत की समुद्री उपलब्धियों को भी साझा किया, जिसमें 'सहव' डिजिटल पोर्टल लॉन्च किया जाना और 2026 तक 6000 मीटर गहराई तक मानवयुक्त पनडुब्बी भेजने वाली ‘समुद्रयान’ परियोजना की प्रगति खास रहीं। उन्होंने बताया कि भारत ने समुद्री जैव विविधता को संरक्षित करने हेतु अपने एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (ईईजेड) का 6.6% समुद्री संरक्षित क्षेत्र घोषित किया है।
समुद्री प्रदूषण पर उन्होंने 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' अभियान के तहत 1000 किमी तट की सफाई और 50,000 टन प्लास्टिक अपशिष्ट के निष्कासन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि एक मसौदा समुद्री कचरा नीति तैयार की गई है और भारत 'ग्लोबल प्लास्टिक ट्रीटी' को कानूनी रूप देने का समर्थन कर रहा है। भारत के 600 से अधिक बंदरगाह-आधारित बुनियादी ढांचा परियोजनाएं 80 बिलियन डॉलर की लागत से सक्रिय हैं और 2.5 बिलियन डॉलर की मछली पालन योजनाएं कार्यान्वित हो चुकी हैं। डॉ. सिंह ने जलवायु अनुकूलन के लिए 10,000 हेक्टेयर मैंग्रोव पुनर्स्थापन, प्राकृतिक तटीय प्रबंधन योजना और ब्लू इकॉनॉमी में नवाचार निवेश की भी बात की। भारत अब वैश्विक समुद्री नीति निर्धारण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।