विभिन्न राज्यों से आए दो हजार साधकों को आचार्य ने मां ललिता त्रिपुर सुंदरी और भगवान रुद्र के तीन सौ दिव्य बीज मंत्रों की दीक्षा दी। भजन, ध्यान, साधना, दीक्षा के जरिए साधक शांति, आनंद और आत्मबोध से रूबरू हुए।
जयपुर. जीवन संघर्षों और अनिश्चितताओं से भरा हुआ है।आधुनिक जीवन में जब मन स्थिरता तलाशता है, तब साधना ही सहारा बनती है। महादेव का हाथ पकड़ कर रखेंगे तो हर स्थिति से उबर सकते हैं। यह उदबोधन संत एवं शिवयोग के आचार्य डॉ. ईशान शिवानंद ने रविवार को मानसरोवर स्थित एक सभागार में आयोजित ललिता-रूद्र त्रिशती लेवल-3 की दीक्षा के दौरान दिए। इस दौरान विभिन्न राज्यों से आए दो हजार साधकों को आचार्य ने मां ललिता त्रिपुर सुंदरी और भगवान रुद्र के तीन सौ दिव्य बीज मंत्रों की दीक्षा दी। भजन, ध्यान, साधना, दीक्षा के जरिए साधक शांति, आनंद और आत्मबोध से रूबरू हुए।
आचार्य डॉ. शिवानंद ने कहा कि हर साधक शिव की संतान है। उन्होंने कहा कि जागरूक जीवन जीने, चेतना के विस्तार और अंतर्निहित क्षमताओं के साक्षात्कार के लिए सही आंतरिक साधनों का होना जरूरी है। मां ललिता त्रिपुर सुंदरी और भगवान रुद्र की यह गहन साधना साधक के भीतर सुप्त आध्यात्मिक शक्तियों को जागृत करती हैं, जिससे व्यक्ति के जीवन में स्पष्टता, स्थिरता आने के साथ-साथ आंतरिक शांति का अनुभव होता है। तनाव, डिजिटल ओवरलोड और भावनात्मक थकान से जूझते लोगों के लिए यह साधना आंतरिक शक्ति के विकास, मानसिक-सामाजिक संतुलन स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगी।