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JLF 2026: गौर गोपाल दास बोले- पैसा-शोहरत सब बेकार, अगर जिंदगी में अपनी कहानी सुनाने वाला कोई ‘अपना’ न हो

जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 2026 के तीसरे दिन अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने युवाओं की मानसिक उलझनों, रिश्तों और अकेलेपन पर खुलकर बात की।

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Jan 17, 2026
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के मंच से गौर गोपाल दास ने जीवन के गूढ़ रहस्यों को बेहद सहजता से साझा किया। सोर्स: पत्रिका

मोटिवेशनल स्पीकर गौर गोपाल दास ने सफलता और शोहरत की तेज दौड़ में उलझी नई पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि पैसा तभी मायने रखता है जब जिंदगी में कोई ऐसा हो जिसके साथ आप अपनी खुशी और दुख बांट सकें। स्टेज पर उन्होंने दर्शकों से पहला सवाल पूछा, “आज आप अपने मन का कौन-सा बोझ उतारने को तैयार हैं?” इस सवाल ने वहां मौजूद युवा, बुजुर्ग और छात्रों को कुछ मिनटों के लिए थाम दिया। दास के मुताबिक, हर इंसान किसी न किसी अदृश्य बोझ के साथ जी रहा है, और वही बोझ असल में मानसिक थकान और अकेलेपन की वजह बनता है।

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‘जिंदगी की असली लड़ाई रोजमर्रा की चुनौतियों से’

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए गौर गोपाल दास ने कहा कि लोग अक्सर मौत को बेवजह बदनाम करते हैं, जबकि असली संघर्ष तो हर दिन की चुनौतियों से पार पाने में है। अगर इंसान अपने मन पर चढ़े बोझ को पहचान ले और उसे उतारना सीख ले, तो जीवन का सफर सहज हो जाता है।

रिश्तों के ‘रेड फ्लैग’ और पारिवारिक विरासत

गौर गोपाल दास ने रिश्तों की जड़ों को समझाते हुए कहा कि प्यार कैसे करना है, गुस्सा कैसे दिखाना है, माफ कैसे करना है, सलाह कैसे देनी है-ये सब लोग अपने परिवार से सीखते हैं। पारिवारिक कहानियां और संस्कार ही आगे जाकर हमें रिश्तों में ‘रेड फ्लैग’ और ‘ग्रीन फ्लैग’ पहचानना सिखाते हैं, यानी सही और गलत की पहचान देने वाली पहली शिक्षा घर से मिलती है।

उन्होंने यह भी चेताया कि सफलता और पैसा तब तक बेकार हैं जब तक जीवन में ऐसा कोई न हो जिसके सामने आप अपनी कहानी कह सकें। दास ने कहा, “इंसान आखिर में रिश्तों की तलाश करता है, अकेलेपन की नहीं। पैसा और शोहरत हैं लेकिन सुनने वाला कोई नहीं, तो उस कमाई का फायदा क्या?”

सोशल मीडिया बनाम असली खुशी

मंच से Gen-Z पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी दुनिया के सामने सेल्फी तो पेश कर देती है, लेकिन दिल खोलकर बात करने के लिए अपने जैसे किसी इंसान की कमी महसूस करती है। दास के अनुसार असली खुशी सोशल मीडिया के दिखावे में नहीं, बल्कि किसी एक क्षेत्र को गहराई से समझने और अपनों के साथ समय बिताने में छिपी है।

Updated on:
17 Jan 2026 07:30 pm
Published on:
17 Jan 2026 07:29 pm
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