
ग्वालियर. आमखो मैन रोड पर चार दिन पहले फूटी 600 एमएम व्यास की मुख्य पंपिंग लाइन अब वार्ड 45, 55, 56 और 59 के रहवासियों के साथ जेएएच अस्पताल के लिए बड़ा संकट बन गई है। लाइन फूटने के बाद से कई इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित है, लेकिन चार दिन बाद भी व्यवस्था सामान्य नहीं हो सकी। सोमवार को हालात ऐसे रहे कि हजार बिस्तर अस्पताल और जेएएच की बिल्डिंग में फायर टैंकरों से पानी पहुंचाना पड़ा। दूसरी ओर वार्डों के लोग बोरवेल और हैंडपंप से पानी भरने के साथ अपने पैसे से टैंकर मंगाने को मजबूर हैं। जिस क्षेत्र में शहर का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल स्थित है, वहां मुख्य पेयजल लाइन फूटने के बाद चार दिन तक जलापूर्ति सामान्य नहीं होना निगम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समस्या सामने आने के बावजूद स्थानीय पार्षद, कार्यपालन यंत्री और अन्य जिम्मेदार अधिकारी इसका स्थायी समाधान नहीं करा पाए हैं।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
वार्ड 45 के नया बाजार, लोहिया बाजार, दाल बाजार और गिर्राज मंदिर रोड, वार्ड 56 के नाका चंद्रवदनी, गड्ढेवाला मोहल्ला और कुम्हारों का मोहल्ला, वार्ड 55 के गुड़ा-गुड़ी का नाका तथा वार्ड 59 में शिवपुरी लिंक रोड सहित आसपास के इलाकों में पानी की सप्लाई प्रभावित है। लोग बोरवेल और हैंडपंप से पानी ला रहे हैं। कई परिवार निजी खर्च पर टैंकर मंगाकर जरूरत पूरी कर रहे हैं।
रविवार रात से मरम्मत, सोमवार को भी मिलान
नगर निगम के अमले ने रविवार रात से आमखो मेन रोड पर 600 एमएम व्यास की पंपिंग मेन लाइन को 700 एमएम व्यास की डिस्ट्रीब्यूशन लाइन से मिलाने का काम शुरू किया। सोमवार को भी कर्मचारी इसी काम में जुटे रहे। इसके बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में जलापूर्ति सामान्य होने में समय लग रहा है। चार दिन पहले 600 एमएम की मुख्य लाइन अचानक फूट गई थी। इससे बड़ी मात्रा में पानी सड़क पर बहा और आसपास के क्षेत्रों की सप्लाई प्रभावित हुई। अब मरम्मत के दौरान भी लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र में चार दिन तक पानी का संकट बना रहना जल प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
पुरानी लाइन पर बन गए मकान-दुकान, मरम्मत बनी चुनौती
आमखो क्षेत्र की पानी की लाइन काफी पुरानी बताई जा रही है। कई स्थानों पर लाइन के ऊपर मकान और दुकानें बन गई हैं। इससे लाइन जमीन के नीचे दब गई है और फॉल्ट होने पर उसे तलाशना और मरम्मत करना चुनौती बन जाता है। लीकेज या लाइन फूटने के बाद मरम्मत से काम चलाने के बजाय स्थायी समाधान की योजना बनानी होगी। वरना हर बार वार्डों के साथ अस्पताल भी टैंकरों के भरोसे रहेगा।