राजस्थान के राजसमंद जिले में युवाओं की ऊर्जा अब सामाजिक बदलाव की दिशा में सशक्त कदम उठा रही है।
राजसमंद. राजस्थान के राजसमंद जिले में युवाओं की ऊर्जा अब सामाजिक बदलाव की दिशा में सशक्त कदम उठा रही है। बाल विवाह और जबरन विवाह जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से ‘हमारीपहल’ अभियान के तहत राजसमंद जन विकास संस्थान कार्यालय में दो दिवसीय क्षमता-वृद्धि कार्यशाला आयोजित की गई। यह पहल गर्ल्स नॉट ब्राइड्स राजस्थान स्टेट पार्टनरशिप के सहयोग से सम्पन्न हुई। कार्यशाला का उद्देश्य केवल युवाओं को बाल विवाह की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील करना ही नहीं था, बल्कि उन्हें यह भी सिखाना था कि वे अपने समुदायों में परिवर्तन के वाहक कैसे बन सकते हैं। इस कार्यक्रम में शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की समझ, सुरक्षित वातावरण निर्माण और समुदाय को संगठित करने की रणनीतियों पर विशेष ध्यान दिया गया।
कार्यशाला का संचालन जिला निर्देशक शंकुलतापामेचा के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम में सुकून परियोजना की प्रोजेक्ट मैनेजर प्रीति शर्मा और गर्ल्स नॉट ब्राइड्स राजस्थान राज्य सचिवालय (कल्प) के प्रतिनिधि राजन ने युवाओं को व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों ने समूहगत गतिविधियों, विचार-विमर्श और व्यावहारिक अभ्यास के माध्यम से सीखने का अनुभव किया। इनमें शामिल थे:
कार्यशाला के अंत में युवाओं को “हमारीपहल” अभियान के तहत अपने-अपने क्षेत्रों में आगे की गतिविधियों के लिए व्यक्तिगत कार्ययोजना तैयार करने का अवसर भी मिला। यह प्रशिक्षण उन्हें स्थानीय स्तर पर बदलाव लाने और बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ सक्रिय होने के लिए सशक्त बना गया।
कार्यशाला का सबसे प्रेरक क्षण तब आया जब सभी प्रतिभागियों ने जिला कलेक्टर अरुण कुमार हसीजा के हाथों ‘हमारीपहल’ अभियान का पोस्टर जारी किया। इस अवसर पर युवाओं ने “बाल विवाह को ना, शिक्षा को हाँ” के नारे के साथ यह संकल्प लिया कि वे अपने गांवों और समुदायों में इस कुप्रथा के खिलाफ संगठित होकर काम करेंगे। कलक्टर हसीजा ने कहा कि राजस्थान जैसे राज्य में, जहां परंपराएं गहरी जड़ें रखती हैं, वहां युवा ही बदलाव की सबसे बड़ी शक्ति हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे ‘हमारीपहल’ को केवल अभियान नहीं, बल्कि एक जन-आंदोलन बनाएं। उनका संदेश स्पष्ट था:“यदि युवा ठान लें, तो बाल विवाह जैसी सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाना असंभव नहीं है। हर बच्ची को शिक्षा और समान अवसर दिलाना हमारा साझा लक्ष्य होना चाहिए।”
कार्यशाला में शामिल युवाओं ने न केवल बाल विवाह के खतरों को समझा, बल्कि इस सामाजिक बुराई से लड़ने के लिए व्यावहारिक उपकरण और रणनीतियों से भी लैस हुए। अब यह युवा अपने-अपने गांवों में जागरूकता फैलाने, पंचायतों में संवाद स्थापित करने और समुदाय के साथ मिलकर बाल विवाह को रोकने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इस पहल से यह स्पष्ट संदेश गया कि बदलाव केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज में सक्रिय और प्रशिक्षित युवाओं की भागीदारी से ही संभव है। राजसमंद में ‘हमारीपहल’ ने युवाओं में नेतृत्व की भावना और सामाजिक जिम्मेदारी की चेतना को मजबूत किया है।