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दिग्गजों का मैदान बदला, तो नए चेहरों की खुली राह

जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, पंच और सरपंच पदों के आरक्षण की तस्वीर सामने आने के साथ ही गांवों में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई दावेदार अपने परिवार के पात्र सदस्यों को मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
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Sep 26, 2026
फाइल फोटो
फाइल फोटो

बीकानेर. गांवों की सरकार के चुनाव से पहले आरक्षण की लॉटरी ने जिले में चुनावी समीकरण बदल दिए हैं। जिन वार्डों और ग्राम पंचायतों में दावेदार महीनों से तैयारी कर रहे थे, उनमें से कई अब आरक्षित होने के बाद उनके लिए चुनावी मैदान नहीं रहे। कहीं महिला आरक्षण ने पुरुष दावेदारों की राह रोक दी, तो कहीं एससी-एसटी आरक्षण के कारण पुराने समीकरण बदल गए। नतीजा यह कि पुराने दावेदार अब नए वार्ड और नए समीकरण तलाश रहे हैं। वहीं आरक्षित वर्ग के नए चेहरों ने चुनावी सक्रियता बढ़ा दी है।
जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, प्रधान, पंच और सरपंच पदों के आरक्षण की तस्वीर सामने आने के साथ ही गांवों में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई दावेदार अपने परिवार के पात्र सदस्यों को मैदान में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। राजनीतिक दलों में भी संभावित प्रत्याशियों के नामों को लेकर मंथन शुरू हो गया है।

लॉटरी खुली तो बदली पूरी रणनीति
आरक्षण की घोषणा के साथ ही कलेक्ट्रेट से लेकर गांवों की चौपाल तक चुनावी गणित बदल गया। संभावित प्रत्याशी अब अपने वार्ड के आरक्षण के साथ वहां शामिल गांवों, आबादी और स्थानीय सामाजिक समीकरणों का हिसाब लगा रहे हैं। मतदाता सूचियों के अंतिम प्रकाशन और चुनाव कार्यक्रम का इंतजार है। इसके साथ ही चुनावी गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

किसी का मैदान छिना, किसी के लिए पहली बार मौका
कई ऐसे वार्ड हैं, जहां लंबे समय से सामान्य वर्ग के पुरुष दावेदार चुनाव की तैयारी कर रहे थे, लेकिन आरक्षण बदलने के बाद वे सीधे चुनाव मैदान में नहीं उतर सकेंगे। ऐसे दावेदारों के सामने अब परिवार के किसी पात्र सदस्य को चुनाव लड़ाने या दूसरे वार्ड में राजनीतिक जमीन तलाशने का विकल्प है। दूसरी ओर, जिन सीटों पर महिला या एससी-एसटी वर्ग के लिए आरक्षण हुआ है, वहां नए दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। कई परिवारों में अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि किस सदस्य को चुनाव मैदान में उतारा जाए।

15 नवंबर तक पूरी होनी है चुनाव प्रक्रिया
हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 15 नवंबर तक पूरी की जानी है। पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, पंच और सरपंच पदों के आरक्षण का विस्तृत ब्यौरा राज्य निर्वाचन आयोग को भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसके बाद आयोग चुनाव कार्यक्रम जारी करेगा।

15 पंचायत समितियां, हर वार्ड का अलग गणित
बीकानेर जिले की 15 पंचायत समितियों के वार्डों में शामिल ग्राम पंचायतों और गांवों की संख्या समान नहीं है। ऐसे में पंचायत समिति चुनाव में केवल वार्ड का आरक्षण ही महत्वपूर्ण नहीं रहेगा, बल्कि उस वार्ड में शामिल गांवों का फैलाव और स्थानीय प्रभाव भी अहम होगा। कहीं, किसी एक प्रभावशाली गांव का समीकरण पूरे वार्ड के चुनाव को प्रभावित कर सकता है, तो कहीं कई गांवों में अलग-अलग सामाजिक और स्थानीय समीकरण प्रत्याशी की रणनीति तय करेंगे। यही वजह है कि संभावित दावेदार अब परिसीमन दस्तावेजों में वार्डवार गांव और आबादी का गणित खंगाल रहे हैं।

… तो पंचायत समिति का समीकरण भी बदलेगा

ग्राम पंचायतों में बदला आरक्षण केवल सरपंच चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। एक पंचायत समिति वार्ड में कई ग्राम पंचायतें शामिल होती हैं। ऐसे में बड़ी ग्राम पंचायतों के सरपंच पद का आरक्षण बदलने से स्थानीय नेताओं और समर्थक समूहों की चुनावी सक्रियता का केंद्र भी बदल सकता है। खासकर उन पंचायत समिति वार्डों में इसका असर अधिक दिखाई दे सकता है, जहां कई बड़ी ग्राम पंचायतें शामिल हैं। यहां सरपंच चुनाव में बनने वाले स्थानीय समीकरण पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में भी भूमिका निभा सकते हैं।

Updated on:
26 Sept 2026 09:42 pm
Published on:
26 Sept 2026 09:42 pm