Kabutarbazi 2026: प्रतियोगिता के लिए उपयोग होने वाले पक्षी साधारण नहीं होते। शौकीन इन्हें 10 हजार से 50 हजार रुपए तक की कीमत पर खरीदते हैं। इनकी क्षमता बढ़ाने के लिए आहार में पिस्ता, बादाम, मुनक्का, बाजरा और गेहूं जैसे पौष्टिक तत्व शामिल किए जाते हैं।
Kabutarbazi 2026: आधुनिकता की दौड़ में जहां कई पारंपरिक विरासतें ओझल हो रही हैं, वहीं मध्य भारत में 'कपोत-उड़ान' (कबूतरबाजी) की ऐतिहासिक परंपरा आज भी शौकीनों के दम पर जीवंत है। कभी राजघरानों के वैभव का प्रतीक रही यह कला अब एक पेशेवर खेल का रूप ले चुकी है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली कपोत-उड़ान प्रतियोगिता 10 मई से शुरू होने जा रही है।
इस अनूठी प्रतियोगिता का आयोजन रायपुर, भिलाई, जबलपुर और इंदौर में एक साथ किया जाएगा। प्रत्येक शहर से 21-21 प्रशिक्षित पक्षी आसमान में छोड़कर अपनी सहनशक्ति का परिचय देंगे। यद्यपि इसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों से प्रतिभागी जुट रहे हैं, किंतु प्रतियोगिता का समग्र विजेता केवल एक ही होगा, जो समय और उड़ान की ऊंचाई के मानकों पर खरा उतरेगा।
प्रतियोगिता के लिए उपयोग होने वाले पक्षी साधारण नहीं होते। शौकीन इन्हें 10 हजार से 50 हजार रुपए तक की कीमत पर खरीदते हैं। इनकी क्षमता बढ़ाने के लिए आहार में पिस्ता, बादाम, मुनक्का, बाजरा और गेहूं जैसे पौष्टिक तत्व शामिल किए जाते हैं। वर्तमान में खिलाड़ियों के बीच पंजाब और आंध्र प्रदेश की नस्लों का विशेष आकर्षण है, जो अपनी लंबी और स्थिर उड़ान के लिए प्रसिद्ध हैं। प्रशिक्षित होने के बाद ये परिंदे आसमान की ऊंचाइयों में लगातार 5 से 7 घंटे बिताने का सामर्थ्य रखते हैं।
खेल को पूरी तरह निष्पक्ष बनाने के लिए आयोजकों ने आधुनिक तकनीक और कड़े नियमों का सहारा लिया है। मध्य प्रदेश के निर्णायक छत्तीसगढ़ में और छत्तीसगढ़ के निर्णायक मध्य प्रदेश में तैनात रहकर निगरानी करेंगे। आसमान में परिंदों की हर हरकत पर ऑनलाइन कैमरों की नजर होगी और हर घंटे का वीडियो अपडेट वाट्सएप के जरिए साझा किया जाएगा।
यह खेल केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक गहरा लगाव है। कुवैत और ओमान जैसे देशों में कार्यरत नाजिर भाई और अजूल भाई जैसे शौकीन हर साल मई की तपती गर्मी में केवल इस प्रतियोगिता के लिए भिलाई लौटते हैं। स्थानीय विशेषज्ञ लाला खलीफा बताते हैं कि यह पक्षी अपनी अद्भुत वफादारी के लिए जाना जाता है; वह कितनी भी ऊंचाई नाप ले, आखिर में लौटकर अपने स्वामी के पास ही आता है।
पिछले वर्ष रायपुर के मनीष पटेल के परिंदे ने सुबह 6 से शाम 5 बजे तक (लगातार 11 घंटे) उड़ान भरकर कीर्तिमान स्थापित किया था। इस बार उन्हें रायपुर बॉस क्लब के तन्नू, गोलू, जबलपुर के जग्गा भाई और इंदौर के उस्ताद सलीम जैसे धुरंधरों से कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है। 10 मई को एक बार फिर आसमान इन जांबाज परिंदों के परों से गुलजार होगा।