समाचार

Transparency : तमिलनाडु के सभी निजी स्कूलों को फीस सार्वजनिक करनी होगी

आदेश में कहा गया कि निजी स्कूलों के निदेशक को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक स्कूल की फीस संरचना, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त फीस निर्धारण समिति द्वारा तय की गई है, उसे निजी स्कूलों द्वारा समय-समय पर उनके नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अपडेट किया जाए।
2 min read
Jul 08, 2026
Madras High Court
Madras High Court

चेन्नई. मद्रास हाईकोर्ट ने 8th July 2026, बुधवार को तमिलनाडु के सभी निजी स्कूलों को आदेश दिया कि वे अपनी फीस संरचना स्कूल के नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करें। जस्टिस एम. दंडपाणि ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत विशेष अधिकार का उपयोग करते हुए यह निर्देश जारी किया। आदेश में कहा गया कि निजी स्कूलों के निदेशक को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रत्येक स्कूल की फीस संरचना, जो राज्य सरकार द्वारा नियुक्त फीस निर्धारण समिति द्वारा तय की गई है, उसे निजी स्कूलों द्वारा समय-समय पर उनके नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर अपडेट किया जाए। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि तमिलनाडु निजी स्कूल (विनियमन) अधिनियम, 2019 के अंतर्गत आने वाले सभी स्कूलों को यह निर्देश मानना अनिवार्य है। इसमें समिति द्वारा निर्धारित फीस के साथ-साथ सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृत अन्य शुल्क भी प्रदर्शित करना होगा।

निजी स्कूलों ने सर्कुलर को दी थी चुनौती

यह निर्देश ऑल इंडिया प्राइवेट एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एसोसिएशन द्वारा दायर एक रिट याचिका के निस्तारण के दौरान जारी किया गया। इस याचिका में चेन्नई के महासचिव के. पलनीअप्पन ने निजी स्कूल निदेशालय द्वारा 1 जून 2026 को जारी सर्कुलर को चुनौती दी थी, जिसमें फीस संरचना प्रदर्शित करने की बात कही गई थी। यह सर्कुलर तमिलनाडु राज्य सूचना आयोग द्वारा 25 मई 2026 को सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत पारित आदेश के आधार पर जारी किया गया था।

याचिकाकर्ता संघ ने तर्क दिया कि इस प्रकार के निर्देश बिना यह जांचे जारी किए गए हैं कि सूचना का अधिकार अधिनियम निजी स्ववित्तपोषित शैक्षणिक संस्थानों पर लागू होता है या नहीं और क्या ये संस्थान 'सार्वजनिक प्राधिकरण' की परिभाषा में आते हैं।

हाईकोर्ट ने विशेषाधिकार का प्रयोग किया

जस्टिस दंडपाणि ने इस तर्क से सहमति जताई कि निजी शैक्षणिक संस्थान, जिन्हें राज्य या केंद्र सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता या नियंत्रण नहीं मिलता, वे 'सार्वजनिक प्राधिकरण' के दायरे में नहीं आते। फिर भी, न्यायालय ने कहा कि निजी स्कूल राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए विनियामक तंत्र के अंतर्गत आते हैं, इसलिए वे अपनी फीस सार्वजनिक करने के लिए बाध्य हैं। हाईकोर्ट अपने विशेष अधिकार का उपयोग करते हुए ऐसा निर्देश दे सकता है। जस्टिस दंडपाणि ने कहा, "अभिभावकों को अपने बच्चों के लिए उपयुक्त स्कूल चुनने के दौरान प्रत्येक स्कूल द्वारा ली जाने वाली फीस की पारदर्शिता से जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि वे सोच-समझकर निर्णय ले सकें और बच्चों के दाखिले के बाद उन्हें आर्थिक बोझ का सामना न करना पड़े।"

Updated on:
08 Jul 2026 05:42 pm
Published on:
08 Jul 2026 05:42 pm