छतरपुर

पत्रिका इम्पैक्ट: आगजनी की घटनाओं के बाद जागा प्रशासन, खेतों में नरवाई जलाने वाले 18 किसानों पर एफआईआर दर्ज

अब उन लोगों पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है जो सरकारी प्रतिबंध के बावजूद खेतों में आग लगाकर पर्यावरण और दूसरों की संपत्ति को खतरे में डाल रहे हैं।

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Apr 25, 2026
नरवाई की आग से जल गया घर

जिले के विभिन्न ग्रामीण अंचलों में खेतों की नरवाई (पराली) जलाने से हो रही भीषण आगजनी की खबरों को जब प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, तो प्रशासन ने इसे गंभीरता से लेते हुए निर्णायक कार्रवाई की है। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के कड़े रुख के बाद अब उन लोगों पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है जो सरकारी प्रतिबंध के बावजूद खेतों में आग लगाकर पर्यावरण और दूसरों की संपत्ति को खतरे में डाल रहे हैं। इसी क्रम में राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम ने जिले के विभिन्न विकासखंडों में बड़ी कार्रवाई करते हुए 18 किसानों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई है।

इन क्षेत्रों में हुई कार्रवाई, 7 प्रकरणों में 18 नामजद

प्रशासन द्वारा की गई इस छापामार कार्रवाई में जिले के अलग-अलग थानों में कुल 7 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। नौगांव के ग्राम लुगासी में आशाराम उर्फ अस्सू कुशवाहा पर मामला दर्ज हुआ है। बक्सवाहा के ग्राम पौड़ी में लक्ष्मन लोधी और दरगुवां में रमेश राय के खिलाफ कार्रवाई की गई है। सबसे बड़ी कार्रवाई छतरपुर विकासखंड के ईशानगर और देरी में हुई, जहां भरत सिंह, बाबूलाल, सीताराम, मुकेश, बालादीन, प्यारेलाल, संतराम और राजेन्द्र सिंह चंदेल को आरोपी बनाया गया है। बिजावर के महुआझाला में फौज खां और संतोष प्रजापति तथा बड़ामलहरा क्षेत्र में शंकर यादव, जानकी बाई, लखन, बाबा और सूराबाई यादव पर एफआईआर दर्ज हुई है।लापरवाही पर भारी जुर्माने का है

प्रावधान

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, नरवाई जलाने पर केवल जेल ही नहीं बल्कि भारी आर्थिक दंड भी भुगतना होगा।

2 एकड़ तक की भूमि पर: 2500 रुपए का जुर्माना।

2 से 5 एकड़ तक की भूमि पर: 5000 रुपए का जुर्माना।

5 एकड़ से अधिक भूमि पर: 15000 रुपए का जुर्माना।

इसके साथ ही भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत पुलिस कार्रवाई भी सुनिश्चित की गई है।

मिट्टी की सेहत और पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान

कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को चेतावनी देते हुए बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी के भीतर मौजूद मित्र कीट और सूक्ष्म जीव पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं। इससे भूमि की प्राकृतिक उर्वरता खत्म हो रही है। हवा के चलते यह आग बेकाबू होकर पड़ोसी किसानों की मेहनत और कीमती लकड़ियों को भी अपनी चपेट में ले रही है। विभाग ने सलाह दी है कि किसान आधुनिक यंत्रों जैसे हैप्पी सीडर या रीपर का उपयोग करें और नरवाई को खाद या चारे के रूप में इस्तेमाल करें।

कलेक्टर की दो टूक: जारी रहेगी सख्त निगरानी

कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने किसानों से पुनः अपील की है कि वे अपनी और समाज की भलाई के लिए नरवाई न जलाएं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि यह कार्रवाई तो केवल शुरुआत है, राजस्व और कृषि विभाग का अमला लगातार क्षेत्रों में भ्रमण करेगा और जहां भी धुएं या आग की सूचना मिलेगी, वहां बिना किसी रियायत के तत्काल एफआईआर दर्ज की जाएगी। प्रशासन का लक्ष्य जिले में शून्य आगजनी और बेहतर पर्यावरण सुनिश्चित करना है।

Published on:
25 Apr 2026 11:19 am
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