
चित्र देखो कहानी लिखो प्रतियोगिता—95
बच्चों, कहानियां सुनने में जितना मजा आता है, उससे कई ज्यादा सुनाने में। कहानियां सुनाना भी खास तरह की प्रतिभा है। कहानियां वही सुना सकता है, जिसकी कल्पनाशीलता विस्तृत होती है। कल्पना भी इतनी हो कि कहानी रोचक बन पाए। आप भी इस रोचक प्रतिभा को अर्जित करना चाहते हैं तो कहानी कहना सीखना होगा। कहानी कहने की इसी प्रतिभा पर परिवार परिशिष्ट के 09 सितंबर के अंक में एक चित्र दिया गया और बच्चों को कहानी लिखने को कहा गया। देशभर से बच्चों की कई कहानियां मिलीं। चुनिंदा बच्चों की कहानियां परिवार परिशिष्ट के पेज चार पर लगाई गई और शेष यहां दी जा रही हैं। सभी बच्चे कहानियां लिखते रहें। हमारी कोशिश यही है कि वे सीखना और लिखना कभी न छोड़े।
बीमारी में बहन का साथ
जैनम डांगी, 12 वर्ष
एक दिन नेहा अपनी छोटी बहन पायल के कमरे में गई। उसने देखा कि पायल बिस्तर पर लेटी हुई थी और उसका चेहरा उदास था। पायल को तेज बुखार था। नेहा अपनी बहन को बीमार देखकर बहुत परेशान हो गई। नेहा ने तुरंत माँ को बुलाया। माँ ने पायल का तापमान देखा और डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने पायल की जाँच की और कुछ दवाइयाँ दीं। उन्होंने पायल को आराम करने और खूब पानी पीने की सलाह दी। नेहा ने अपनी बहन की देखभाल में माँ का हाथ बँटाया। वह समय पर दवा देती, पानी पिलाती और उसके पास बैठकर कहानियाँ सुनाती। वह पायल को हँसाने के लिए मजेदार बातें भी करती। कुछ दिनों में पायल बिल्कुल ठीक हो गई। वह उठकर अपनी बहन के गले लग गई। नेहा भी बहुत खुश हुई। माँ ने दोनों बहनों को प्यार से समझाया कि मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देना ही सच्चा प्यार है।
शिक्षा – हमें अपने परिवार के सदस्यों की बीमारी और परेशानी में हमेशा मदद करनी चाहिए।
मोनिया का स्कूल ना जाने का बहाना
देवांश पूनिया, 10 वर्ष
सोमवार की सुबह थी। मोनिया का स्कूल जाने का बिल्कुल मन नहीं था। उसने सोचा कि आज कोई बहाना बनाकर स्कूल जाने से बच जाती हूँ। वह अपनी बड़ी बहन सोनिया के पास गई और बोली, “दीदी, आज मेरी तबीयत ठीक नहीं है। मुझे बुखार है। मैं स्कूल नहीं जाऊँगी।”
सोनिया समझ गई कि मोनिया बहाना कर रही है। उसने कहा, “अगर तुम सच में बीमार हो तो कंबल ओढ़कर लेट जाओ और माथे पर ठंडी पट्टी रख लो।” मोनिया तुरंत बिस्तर पर लेट गई और कंबल ओढ़ लिया। वह बीमार होने का नाटक करने लगी। कुछ देर बाद सोनिया उसके पास आई और बोली, “मोनिया, अगर तुम्हें बुखार है तो तुम्हें दवाई भी लेनी पड़ेगी।” सोनिया ने उसे कड़वी दवाई दे दी। दवाई पीते ही मोनिया ने मुँह बनाया और बोली, “उफ्फ! दवाई बहुत कड़वी है। दीदी, मुझे बुखार नहीं है।” सोनिया हँसकर बोली, “मुझे पहले से पता था कि तुम नाटक कर रही हो। अब जल्दी से उठो। स्टैंड पर तुम्हारी स्कूल की ड्रेस रखी है। उसे पहनो और स्कूल जाओ।”
दोस्त का खयाल
मनप्रीत पिंदार, 7 वर्ष
बीमार दोस्त की देखभाल एक बार की बात है, पिंकी और उसका छोटा भाई रोहन एक ही कमरे में रहते थे। दोनों में बहुत प्यार था। एक दिन अचानक रोहन की तबीयत खराब हो गई। उसे बहुत तेज बुखार था और उसके सिर में दर्द हो रहा था।मम्मी ने रोहन के सिर पर ठंडे पानी की पट्टी रखी और उसे डॉक्टर की दी हुई दवाई खिलाकर सुला दिया। पिंकी अपने भाई से बहुत प्यार करती थी। जब उसने देखा कि उसका छोटा भाई बीमार है और खेल नहीं पा रहा है, तो उसका मन भी खेलने में नहीं लगा।वह चुपचाप रोहन के बिस्तर के पास आकर बैठ गई। रोहन ने धीरे से आँखें खोलीं और अपनी दीदी को देखा। पिंकी ने मुस्कुराते हुए उसका हाथ थाम लिया और कहा, "चिंता मत करो रोहन, तुम दवाई खाकर जल्दी ठीक हो जाओगे। जब तक तुम ठीक नहीं होते, मैं यहीं तुम्हारे पास बैठूँगी।"पिंकी ने रोहन का मन बहलाने के लिए उसे परियों और राजा-रानी की प्यारी-प्यारी कहानियाँ सुनाईं। अपनी दीदी का साथ पाकर रोहन बहुत खुश हुआ और वह बीमारी का दर्द भूलकर आराम से सो गया। पिंकी की इस देखभाल और प्यार को देखकर दीवार पर टंगी भालू की तस्वीर भी मानो मुस्कुरा रही थी।सीख: हमें अपने भाई-बहनों और दोस्तों की बीमारी या मुसीबत के समय हमेशा देखभाल और मदद करनी चाहिए। हमारा थोड़ा सा प्यार उनका हौसला बढ़ा सकता है।
बहन की मदद
भुविक देव, 7 वर्ष
मंगलवार को रिया का सर दुख रहा था। वह विद्यालय भी नहीं जा सकी। बुधवार को जब रिया अपने बिस्तर पर लेटी हुई थी तब उसकी बड़ी बहन प्रिया उसके कमरे में आई। उसने अपनी बहन से पूछा कि तुम्हारी हालत इतनी खराब क्यों है? रिया ने बोला, आज मेरा सर दुख रहा है। प्रिया को बहुत दुःख हुआ। उस दिन से प्रिया ने रिया की बहुत सेवा करी। दो - तीन में रिया का सर दुखना बंद हो गया और वो अपनी बड़ी बहन के साथ विद्यालय भी जाने लगी।
नन्हे हाथों की देखभाल
रक्षिता चौधरी 9 साल
रानी और गुडिया हमेशा से पक्के दोस्त थे। रानी अपनी गुड़िया को हमेशा साथ रखती थी, चाहे वो खाना खा रही हो या सो रही हो। एक दिन, जब रानी खेल रही थी, उसकी गुडिया गलती से उसके बिस्तर से नीचे गिर गई। उसकी कोहनी पे चोट लग गई और वह दर्द से रोने लगी। रानी तुरंत उसके पास गई और उसकी चोट को देखने लगी। रानी ने अपनी मां से कुछ मलहम और पट्टी मांगी। वह अपनी गुडिया की चोट को ध्यान से साफ करने लगी और फिर उस पर मलहम लगाकर पट्टी बांध दी। उसने अपनी गुडिया को अपनी गोद में लिया और उसे पुचकारने लगी। गुडिया को राहत महसूस हुई और उसने रानी को मुस्कुराकर देखा। रानी को खुशी हुई कि उसने अपनी प्यारी गुडिया को ठीक कर दिया है। उस दिन से, रानी ने अपनी गुडिया को और भी ध्यान से संभालने का फैसला किया। उसकी गुडिया उसके लिए बहुत अनमोल थी और वह उसे हमेशा सुरक्षित रखना चाहती थी।
मम्मी का प्यार
विवान गोदारा, 11 वर्ष
एक दिन लित्विक की तबीयत अचानक खराब हो गई। उसे तेज बुखार था और वह बहुत उदास होकर बिस्तर पर लेट गया।
लित्विक की मम्मी ने उसे प्यार से अपनी गोद में लिया और बोलीं, “बेटा, घबराओ मत, मम्मी तुम्हारे पास हैं।” मम्मी ने लित्विक को समय पर दवा दी, पानी पिलाया और उसके पास बैठकर उसका माथा सहलाती रहीं। लित्विक को मम्मी का प्यार और देखभाल बहुत अच्छा लगा। कुछ देर आराम करने के बाद लित्विक मुस्कुराया और बोला, “मम्मी, आप दुनिया की सबसे अच्छी मम्मी हो!” मम्मी ने उसे गले लगा लिया। लित्विक जल्द ही ठीक हो गया और फिर से खुशी-खुशी खेलने लगा।
बहन की तीमारदारी
रितिका मीना, 11 वर्ष
एक छोटे से गांव में एक लड़की रहती थी उसका नाम मीना था और उसके एक बड़ी बहन का नाम टीना था एक दिन मीना को कहीं जाना था वह वही बीमार पड़ गई थी इस वजह से वह बाहर नहीं जा पाए उसकी बहन टीना तो तैयार हो गई थी वह मीना के पास आई तो उसे बीमार देखा मीना अपने बेड पर लेटी हुई थी टीना उसके पास आई और कुर्सी बेटे के पास लगे और मीना से पूछा कि तुम तुमने दवाई ले ली क्या मीना ने कहा नहीं मैं दवाई नहीं ली मेरे पास वह टेबल है जिस पर मेरी दवाइयां रखी है तुम मुझे दवाई दे दो और मैं यह तो मेरी यह ड्रेस को अलमारी में अंदर रख दो रख दो टीना नाराज हो गई क्योंकि उसकी बहन बीमार हो गई थी।
लिली और उसकी प्यारी गुड़िया बेला
आर्यन मिश्रा, 12 वर्ष
एक समय की बात है, एक प्यारी सी नन्ही लड़की लिली अपने कमरे में खेल रही थी। अचानक उसकी सबसे प्रिय गुड़िया 'बेला' पलंग से गिर गई और उसके सिर पर चोट लग गई। बेला का सिर बहुत जोर से टकराया था, जिससे वह उदास लग रही थी। लिली ने तुरंत अपनी गुड़िया को गोद में उठाया और उसे प्यार से सहलाया। वह समझदार लड़की थी और जानती थी कि बीमार या चोटिल होने पर देखभाल कैसे की जाती है। लिली ने दौड़कर अपने खेल-खेल वाले प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स से एक पट्टी निकाली। उसने बेला के सिर पर लगी पट्टी को हटाकर एक नई और साफ पट्टी बहुत सावधानी से बांध दी। फिर उसने बेला को नरम और आरामदायक बिस्तर पर लिटा दिया। उसने उस पर एक हल्की चादर ओढ़ा दी और सिर के नीचे मुलायम तकिया रख दिया। लिली ने एक छोटी दवा की बोतल से उसे दवा पिलाने का नाटक किया और बोली, "थोड़ी दवा पी लो बेला, दर्द ठीक हो जाएगा।" रात भर लिली अपनी गुड़िया का ध्यान रखती रही। अगली सुबह बेला बिल्कुल ठीक महसूस कर रही थी। लिली की प्यार और देखभाल से उसकी बेला फिर से मुस्कुराने लगी। सच्ची देखभाल में ही सबसे बड़ा जादू होता है। शिक्षा बहन बहन का यह प्यार देखकर कभी भी भाई बहन से झगड़ना मत
बहनों का प्यार
हेमांग गुप्ता, 13 वर्ष
एक बार दो बहने चिंकी और मिंकी थी। चिंकी मिंकी से बड़ी थी।उन दोनों का पसंदीदा जानवर भालू था जिसकी तस्वीर उन्होंने अपने कमरे में लगा रखी थी। एक दिन उन दोनों बहनों में एक गेंद के ऊपर लड़ाई हो जाती है। दोनों बहने एक दूसरे से बात करना बंद कर देती हैं।कुछ दिन पश्चात उनकी मां रिंकी और पिता बंटी दोनों 2 दिन के लिए बाहर चले जाते हैं, और दोनों उन दोनों को घर पर अकेला छोड़कर जाते हैं। उसी दिन छोटी बहन मिंकी बाहर बगीचे में खेलते खेलते कीचड़ में गिर गई और उसके सिर पर चोट आ गई। बड़ी बहन चिंकी लड़ाई भूलकर उसको अंदर लाई और उसके सिर से खून साफ कर पट्टी भी कर दी और चिंकी ने मिंकी को दवाई भी दे दी और उसके बाद चिंकी ने मंकी के कपड़े धोकर सुखा दिए जो कि गंदे हो गए थे। जब तक माता-पिता घर आए तब तक मिंकी सही हो गई थी और वे दोनों बहने फिर से खेलनेकूदने लगी।
सफाई ही स्वास्थ्य है
कनिष्का यादव, 7 वर्ष
कनिष्का और मिहिका दो बहने थी। बारिश के मौसम में उनके घर की सफाई नहीं हुई थी। कई जगह गमले में और कूलर में पुराना पानी भी जमा था जिससे काफी सारे मच्छर हो गए थे । एक दिन मिहिका बीमार हो गई तब उसको डॉक्टर के पास लेकर गए। डॉक्टर बोला मिहिका को बहुत ज्यादा बुखार है लगता है किसी मच्छर ने इसको काट लिया है। तब डॉक्टर ने उसको दवाई दी और घर पर आराम करने की सलाह दी तथा डॉक्टर ने कहा कि अपने घर को साफ सुथरा रखना है। जब मिहिका को वापस लाएं तो कनिष्का बोली कि ऐसे तो हम सभी बीमार हो जाएंगे चलो हम अपने घर को साफ करते हैं। तब कनिष्का ने उसकी मम्मी के साथ मिलकर पूरे घर की सफाई कर दी और जो पुराना पानी जमा था उसको भी बाहर फेंक दिया। पौधों में भी साफ पानी दे दिया। सारे बिखरे पड़े हुए कपड़ों को सही तरीके से रख दिया और मिहिका की फ्रॉक को हैंगर से लटका दिया तथा टेबल पर रखी हुई तस्वीर को लटका दिया। दो दिन बाद मिहिका ठीक हो गई और दोनों बहुत खुश हो गई।
गुड़िया की देखभाल
भावेश, 12 वर्ष
एक दिन पिंकी ने देखा कि उसकी छोटी बहन, टिंकी, बिस्तर पर बीमार पड़ी है। टिंकी के सिर पर एक पट्टी बंधी थी। पिंकी को यह देखकर बहुत दुःख हुआ और उसने सोचा, "मैं अपनी प्यारी गुड़िया की देखभाल कैसे कर सकती हूँ?" पिंकी ने एक कुर्सी ली और उसे टिंकी के बिस्तर के पास रख दिया। वह उस पर बैठ गई और अपनी छोटी बहन का ख्याल रखने लगी। उसने टिंकी के सिर पर हाथ रखा और उसे प्यार से थपथपाया। टिंकी ने भी पिंकी की ओर देखकर मुस्कुरा दिया। पिंकी ने टिंकी को कुछ दवाइयाँ भी दीं। टिंकी ने दवाइयाँ ले लीं और वह अब अच्छा महसूस कर रही थी। पिंकी ने टिंकी के लिए कुछ फल और सूप भी बनाए। टिंकी ने उन्हें बहुत शौक से खाया।
धीरे-धीरे टिंकी की तबीयत ठीक होने लगी। कुछ ही दिनों में, वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई। पिंकी बहुत खुश थी कि उसने अपनी बहन की मदद की। दोनों बहनें फिर से खेलने लगीं और हँसने लगीं। यह कहानी हमें यह सिखाती है कि हमें एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए, खासकर जब कोई बीमार हो। परिवार के साथ रहने और एक-दूसरे का ख्याल रखने से प्यार और स्नेह बढ़ता है। छोटी-छोटी चीजें, जैसे प्यार से सहलाना और देखभाल करना, किसी के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती हैं।
माँ की ममता
जिया माहेश्वरी, 10 वर्ष
एक रात रिया अपनी माँ के साथ कमरे में सो रही थी। अचानक रिया की तबीयत खराब हो गई। उसे बुखार था और वह बहुत कमजोर महसूस कर रही थी। उसकी माँ तुरंत उठी और उसके पास बैठ गई। उसने प्यार से रिया के माथे पर हाथ रखा और ठंडी पट्टी रखी।
माँ ने रिया से कहा, “बेटा, घबराओ मत। मैं तुम्हारे पास हूँ। तुम जल्दी ठीक हो जाओगी।” माँ ने उसे दवा दी और थोड़ा पानी पिलाया। फिर उसने रिया को आराम से बिस्तर पर लिटा दिया। रिया की आँखों में आँसू थे। उसने माँ का हाथ पकड़कर कहा, “माँ, मुझे बहुत डर लग रहा है।” माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, “डरने की कोई बात नहीं है। माँ हमेशा अपने बच्चे के साथ होती है।” रिया धीरे-धीरे सो गई। लेकिन उसकी माँ पूरी रात उसके पास बैठी रही। जब भी रिया करवट बदलती, माँ उसके माथे पर हाथ रखकर उसकी तबीयत देखती। सुबह होते-होते रिया का बुखार कुछ कम हो गया। रिया ने आँखें खोलीं तो माँ को अपने पास देखकर मुस्कुरा दी। उसने माँ को गले लगाया और कहा, “माँ, आप दुनिया की सबसे अच्छी माँ हैं।” माँ ने उसे प्यार से चूमा और कहा, “तुम्हारी खुशी ही मेरी सबसे बड़ी खुशी है।”
उस दिन रिया समझ गई कि माँ का प्यार दुनिया में सबसे अनमोल होता है