राज्यसभा में उठा शिप्रा शुद्धिकरण और नर्मदा-शिप्रा परियोजना का मुद्दा सिंहस्थ 2028 से पहले स्थायी समाधान की मांग राज्यसभा में गूंजा शिप्रा शुद्धिकरण का मुद्दा
उज्जैन। पुण्य सलिला शिप्रा नदी के शुद्धिकरण का मुद्दा राज्यसभा में जोरदार तरीके से उठाया गया। उज्जैन से राज्यसभा सदस्य बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने सदन में शिप्रा नदी की वर्तमान स्थिति को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने शिप्रा को राष्ट्रीय आस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय बताते हुए कहा कि वर्ष 2028 में प्रस्तावित सिंहस्थ मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अवंतिकापुरी का महापर्व और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि सिंहस्थ भारत की आध्यात्मिक चेतना का विशाल संगम है और इस दौरान शिप्रा की पवित्रता बनाए रखना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। महाराज ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि तीर्थ नदियों को शुद्ध नहीं रखा गया तो आने वाली पीढ़ियां वर्तमान समाज को कभी क्षमा नहीं करेंगी।
बालयोगी उमेशनाथ महाराज ने शिप्रा नदी में बढ़ते प्रदूषण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इंदौर से कान्ह नदी के माध्यम से आ रहा दूषित और जहरीला पानी तथा औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाला अपशिष्ट शिप्रा नदी की शुद्धता को लगातार प्रभावित कर रहा है। इससे नदी की धार्मिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन दोनों को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि शिप्रा केवल जलधारा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, इसलिए इसे प्रदूषण से मुक्त करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि नदी संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए ठोस और दीर्घकालिक कदम उठाए जाएं।
राज्यसभा सदस्य ने नर्मदा–शिप्रा लिंक परियोजना को केवल पर्वकालीन व्यवस्था तक सीमित न रखने की मांग की। उन्होंने कहा कि परियोजना के माध्यम से स्थायी रूप से नर्मदा जल से शिप्रा नदी में प्रवाह सुनिश्चित किया जाना चाहिए। इसके लिए उन्होंने परियोजना के बजट और क्षमता में तत्काल वृद्धि की आवश्यकता बताई। साथ ही केंद्र सरकार से नमामि गंगे मिशन की तर्ज पर शिप्रा शुद्धिकरण के लिए विशेष आर्थिक पैकेज जारी करने, शून्य सीवरेज डंपिंग नीति लागू करने और वर्ष 2028 के सिंहस्थ से पहले शिप्रा में किसी भी गंदे नाले का प्रवाह पूरी तरह रोकने की मांग रखी। उन्होंने शिप्रा के उद्गम स्थल से उज्जैन तक नदी के पुनरुद्धार के लिए उच्च स्तरीय कार्यबल गठित करने का भी आग्रह किया और केंद्र व राज्य सरकार से निर्मल एवं अविरल शिप्रा के संकल्प को धरातल पर उतारने की अपील की।