राजगढ़. स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के लोगों में पिछले बजट में की गई तीन प्रमुख घोषणाओं का अब तक जमीनी स्तर पर कार्य शुरू नहीं हो पाने से निराशा बनी हुई है। अब राज्य के 2026-27 के बजट से फिर विकास कार्यों की उम्मीद है। पिछले बजट में राजगढ़ क्षेत्र के कलेशान ग्राम पंचायत अंतर्गत भूरासिद्ध […]
राजगढ़. स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के लोगों में पिछले बजट में की गई तीन प्रमुख घोषणाओं का अब तक जमीनी स्तर पर कार्य शुरू नहीं हो पाने से निराशा बनी हुई है। अब राज्य के 2026-27 के बजट से फिर विकास कार्यों की उम्मीद है। पिछले बजट में राजगढ़ क्षेत्र के कलेशान ग्राम पंचायत अंतर्गत भूरासिद्ध की पर्वतमाला पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर समूह की 52 किलोमीटर लंबी परिक्रमा मार्ग के विकास के लिए शिवा कॉरिडोर निर्माण की घोषणा की गई थी। इस परियोजना पर करीब 100 करोड़ रुपए खर्च होने थे, लेकिन अब तक इसकी स्वीकृति जारी नहीं हो सकी है।
भूरासिद्ध पर्वत से शुरू होकर छाहर्रीन धाम मंदिर राजगढ़, बारह महादेव अलेई, अलेवा धाम मंदिर भूलेरी, कुंडाल धाम, मंडाका आश्रम जामड़ोली-सपड़ावली, कुंड मंदिर झाझीरामपुरा बसवा, सुरेर होते हुए परिक्रमा मार्ग पुनः भूरासिद्ध पर्वत पर समाप्त होता है। यह मार्ग लगभग 52 किलोमीटर में फैला हुआ है। शिवा कॉरिडोर के निर्माण होता तो धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने के साथ क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता भी निखरती।माचाड़ी में हेमू पैनोरमा भी अधर में
राजगढ़ के समीपवर्ती माचाड़ी में मध्यकालीन भारत के अंतिम हिन्दू सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य (राजा हेमू) के पैनोरमा निर्माण की भी घोषणा की थी। इसके लिए 3 करोड़ के कार्यादेश जारी हो चुके हैं, लेकिन बजट घोषणा के बावजूद अब तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया। इसी प्रकार लक्ष्मणगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में 5 करोड़ की लागत से सीवरेज और ड्रेनेज कार्य की घोषणा की थी, लेकिन यह योजना भी अभी तक कागजों तक ही सीमित है।इस बजट से प्रमुख मांगें
आगामी बजट में राजगढ़ नगरपालिका को क्रमोन्नत कर नगर परिषद बनाने, सीएचसी को उपजिला अस्पताल का दर्जा देने और बस स्टैंड के लिए आरक्षित भूमि पर लगभग 10 करोड़ की लागत से बस डिपो निर्माण, राजगढ़ में स्थायी राजस्व अपील अधिकारी का न्यायालय खोलने की घोषणा की उम्मीद है।
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कई मांगे रखी है
आगामी बजट को लेकर राजगढ़ को नगर परिषद बनाने, रोडवेज बस डिपो शुरू कराने, उपजिला अस्पताल की स्थापना, औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार और पंचायत समिति पिनान के गठन जैसी मांगें रखी गई हैं।
मांगेलाल मीना, विधायक।
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चिकत्सा सुविधाओं से वंचितमालाखेड़ा. अलवर ग्रामीण विधानसभा का सबसे बड़ा सीएचसी मालाखेड़ा लगभग 20 किमी क्षेत्र के ग्रामीणों का प्रमुख चिकित्सा केन्द्र है। सीएचसी में सोनोग्राफी मशीन का अभाव है, जबकि रोजाना 10 से 20 डिलीवरी होती है। कुछ सालों से बदहाली का केन्द्र बना हुआ है। जर्जर भवन की वजह से प्रमुख सुविधा जैसे एक्स-रे, लैब से लोगों को वंचित रहना पड़ रहा है।
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आश्वासन और मांगे रही अधूरी
पिनान. कस्बे को उप तहसील का दर्जा देने की मांग पूरी नहीं हो सकी है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 132केवी जीएसएस के उद्घाटन के दौरान क्षेत्रवासियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के समक्ष यह मांग रखी थी, जिस पर उन्होंने उप तहसील बनाने का आश्वासन दिया था। इसके बाद सरकार बदली, लेकिन विकास की रफ्तार नहीं बढ़ी। सरकार बदलने के बाद भी पिनान को उप तहसील का दर्जा नहीं मिल सका। अब प्रदेश में भाजपा सरकार और क्षेत्र से विधायक होने के कारण कस्बेवासियों में विकास को लेकर नई उम्मीद जगी है। कस्बे की आबादी भी करीब 25 हजार है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि पंचायत समिति व उप तहसील का दर्जा केवल कागजों तक सीमित रह गया है।