सीकर. सीकर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाने की हेल्प डेस्क दिखावटी साबित हो रही है। स्टेशन पर लगी दोनों डेस्क दिनभर पुलिस रहित रहती है। वहीं, ट्रेन आने के समय जो जीआरपी पुलिसकर्मी दिखते हैं, वे भी चोरी या अन्य घटना में एफआईआर दर्ज कराने के लिए यात्रियों को जीआरपी थाना जाने की ही सलाह […]
सीकर. सीकर रेलवे स्टेशन पर जीआरपी थाने की हेल्प डेस्क दिखावटी साबित हो रही है। स्टेशन पर लगी दोनों डेस्क दिनभर पुलिस रहित रहती है। वहीं, ट्रेन आने के समय जो जीआरपी पुलिसकर्मी दिखते हैं, वे भी चोरी या अन्य घटना में एफआईआर दर्ज कराने के लिए यात्रियों को जीआरपी थाना जाने की ही सलाह देते हैं। अब चूंकि जीआरपी थाना रेलवे स्टेशन से करीब एक किमी दूर राधाकिशनपुरा में है। लिहाजा वारदात होने पर कई यात्री तो ट्रेन छूटने के डर से ही रिपोर्ट लिखाने थाने नहीं जा पाते। ऐसे में जीआरपी पुलिस की सुविधा को लेकर अक्सर यात्रियों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।
जीआरपी पुलिस की हेल्प डेस्क पर बाहर मे आई हेल्प यू लिखा है। पर वह दिनभर बंद रहता है। पत्रिका ने पड़ताल के लिए अंदर झांका तो अंदर पुलिसकर्मी तो दूर उनके बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं थी। एक केबिन पूरा खाली तो दूसरे में एक हेलमेट व अन्य सामान रखा था।
यात्रियों के अनुसार जीआरपी पुलिसकर्मी रेलवे स्टेशन पर कोई ट्रेन आने पर ही दिखते हैं। इसके बाद वे फिर इधर— उधर हो जाते हैं। इस दौरान भी कोई घटना हो जाए तो वे रिपोर्ट लिखाने के लिए यात्रियों को जीआरपी थाने में ही जाने की सलाह देते हैं। जहां ट्रेन छूटने के डर से यात्री जा नहीं पाते।
रेलवे स्टेशन पर मोबाइल चोरी की वारदात ज्यादा हो रही है। यहां जेब से तो कभी चार्जिंग प्वाइंट से मोबाइल चोरी हो रहे हैं। दो दिन पहले भी एक रेल यात्री युवक का मोबाइल चोरी हो गया था। पुलिसकर्मियों से बात करने पर जब उन्होंने उसे थाने जाने की सलाह दी तो ट्रेन छूटने के डर से वह थाने नहीं गया। आसपास पूछताछ के बाद ट्रेन आने पर वह उसमें सवार होकर चला गया।
जीआरपी पुलिस की हेल्प डेस्क पर हर समय पुलिसकर्मी तैनात होने चाहिए। रेल यात्रियों के अनुसार हेल्प डेस्क पर ही रिपोर्ट दर्ज करवाने की सुविधा भी मिलनी चाहिए। ताकि वारदात का शिकार होने पर यात्रियों को थाने नहीं जाना पड़े।
यात्रियों की मदद के लिए पुलिसकर्मी गश्त पर रहते हैं। रजिस्टर थाने में होने की वजह से रिपोर्ट भी थाने में ही लिखी जा सकती है।
अरुण चौधरी, जीआरपी थाना प्रभारी
रेलवे स्टेशन पर जीआरपी के केबिन यात्रियों की सुरक्षा के लिए है। पर ये शो पीस बन गए हैं। केबिन में पुलिसकर्मी की तैनाती के साथ प्राथमिकी दर्ज करने की सुविधा हर समय मिलनी चाहिए।महावीर पुरोहित, सचिव,रेलवे सलाहकार समिति।
रेलवे स्टेशन पर जीआरपी हेल्प डेस्क शो पीस बनकर रह गई है। वारदात होने पर अक्सर यात्री इधर—उधर भटकते रहते हैं। पुलिसकर्मियों की नियुक्ति के साथ डेस्क पर प्राथमिकी दर्ज करवाने की सुविधा भी होनी चाहिए।प्रखर कुमार, नियमित रेल यात्री, सीकर।