जिले के प्रारंभिक स्कूलों के भवनों की दशा में जल्द सुधार नजर आ सकता है। स्कूलों के बारे में विभिन्न जानकारी मांगी गई है। जिले में प्रारंभिक शिक्षा के विद्यालय भवनों की क्या स्थिति है? क्षेत्रफल के हिसाब कितनी जमीन पर भवन बना है, कितना खाली है, यह जानकारी निदेशालय स्तर पर मांगी है।
भीलवाड़ा. जिले के प्रारंभिक स्कूलों के भवनों की दशा में जल्द सुधार नजर आ सकता है। स्कूलों के बारे में विभिन्न जानकारी मांगी गई है। जिले में प्रारंभिक शिक्षा के विद्यालय भवनों की क्या स्थिति है? क्षेत्रफल के हिसाब कितनी जमीन पर भवन बना है, कितना खाली है, यह जानकारी निदेशालय स्तर पर मांगी है। इसलिए प्रारंभिक शिक्षा के अतिरिक्त निदेशक ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को भवनों की हकीकत भेजने के निर्देश दिए।
राजकीय प्राथमिक एवं राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों के भवनों की जानकारी मांगी गई है। कुल आठ बिंदुओं पर रिपोर्ट देनी है। इसमें विद्यालय का नाम, कक्षा-कक्षों की संख्या, खाली मैदान का क्षेत्रफल और भवन की स्थिति की जानकारी मांगी है। भवन संतोषजनक, जर्जर या अच्छी हालत में है, इसका भी उल्लेख करना होगा। भवन का स्वामित्व सरकारी या किराए के भवन में हो रहा हो तो भी जानकारी भेजनी होगी।
सालों से झेल रहे परेशानी
कई सालों से भवनों की मरम्मत नहीं होने एवं बच्चों की संख्या के अनुपात में बैठने की व्यवस्था नहीं होने के कारण परेशानी होती थी। अब नया शिक्षा सत्र शुरू हो चुका है। इस बार नामांकन बढ़ाने के भी जतन हो रहे। बरसात का मौसम भी है। लिहाजा भवनों की स्थिति भी सुधारनी है। खाली स्थान का क्या उपयोग होगा। इस पर भी शिक्षा विभाग मंथन कर कुछ अलग योजना बना सकता है।