The High Court dismissed the state government's appeal over the 581-day delay.
हाईकोर्ट की युगल पीठ ने 581 दिन की देरी से दायर अपील को खारिज कर दिया। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी विभागों को अब पुरानी फाइल दबने और प्रक्रियागत देरी जैसी दलीलों के सहारे राहत मिलने की उम्मीद छोड़नी होगी। कोर्ट ने कहा कि सरकार को भी उतनी ही सतर्कता और जिम्मेदारी से काम करना चाहिए, जितनी अपेक्षा आम नागरिकों से की जाती है।
दरअसल हाकिम सिंह गुर्जर जल संसाधन विभाग में टाइम कीपर के पद पर कार्यरत थे। पे स्केल के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने हाकिम के पक्ष में 22 सितंबर 2023 को फैसला दिया। इस आदेश के खिलाफ 581 दिन देर से रिट अपील दायर की। विभाग ने तर्क दिया कि विधि विभाग से अनुमति लेने और विभागीय प्रक्रिया पूरी करने में समय लगा। अपील दायर करने में हुई लापरवाही के लिए राज्य सरकार कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं कर सकी। रिकॉर्ड के अनुसार, सिंगल बेंच का आदेश 22 सितम्बर 2023 को पारित हुआ था, जबकि अपील 24 जुलाई 2025 को दायर की गई। इस तरह 581 दिन की देरी हुई। कोर्ट ने कहा कि सरकार मात्र प्रक्रियागत देरी का हवाला देकर समय सीमा से बच नहीं सकती।
बिना अनुमति दायर हुई अपील
कोर्ट के सामने आया कि यह अपील विधि विभाग और इंजीनियर-इन-चीफ की स्वीकृति के बिना ही दायर की गई थी। न्यायालय ने इसे गंभीर त्रुटि मानते हुए कहा कि किसी विभागीय अधिकारी को इस प्रकार अनुमानित अनुमति के आधार पर अपील दाखिल करने का अधिकार नहीं है।
-कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीमित अवधि का पालन सभी पर समान रूप से लागू होता है और सरकार भी इससे अछूती नहीं है।