अमरीका की नोर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के शोध में दावा
वॉशिंगटन. सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र बेहद शक्तिशाली है। इसी के कारण उसकी सतह पर विस्फोट होते हैं और सौर तूफान आते हैं। इस महीने आए सौर तूफान के पीछे भी चुंबकीय क्षेत्र था। यह अब तक पहेली था कि सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र की उत्पत्ति का स्रोत क्या है। कुछ खगोलविदों का मानना था कि चुंबकीय क्षेत्र का स्रोत सूर्य की बेहद गहराई में है। नेचर जर्नल में छपे नए शोध में अलग ही दावा किया गया। अमरीका की नोर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का कहना है कि सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र उसकी सतह की सबसे बाहरी परतों के प्लाज्मा में अस्थिरता से पैदा होता है।लाइव साइंस की रिपोर्ट के मुताबिक वैज्ञानिकों ने जटिल कंप्यूटर मॉडलों का इस्तेमाल कर यह खोज की। इससे वैज्ञानिकों को सौर ज्वालाओं और सौर तूफानों की भविष्यवाणी करने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं ने बताया कि चुंबकीय क्षेत्र सूर्य की सतह के करीब 32,100 किलोमीटर नीचे बन सकते हैं। इससे पहले के मॉडल्स का अनुमान था कि ऐसा करीब दो लाख किलोमीटर की गहराई में होता है।
लूप की तरह नाचती रेखाओं का जाल
शोधकर्ताओं के मुताबिक सूर्य वास्तव में प्लाज्मा का गोला है। इसके आवेशित आयन शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र बनाने के लिए घूमते हैं। घूमते और बहते प्लाज्मा के क्षेत्र को 'कंवेक्शन जोन' कहा जाता है। जोन सूर्य की सतह से दो लाख किलोमीटर नीचे तक फैला है। सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र की रेखाएं देख पाना मुश्किल है। ये सूर्य के वायुमंडल में लूप की तरह नाचती हैं और एक जाल जैसा खड़ा कर देती हैं।
कंपनों के मॉडल का किया अध्ययन
सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी के ऐसे क्षेत्र से कई गुना ज्यादा है। शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने सूर्य की सतह के कंपनों का मॉडल तैयार किया। इनके अध्ययन से पता चला कि सूर्य की सतह के पांच से दस फीसदी तक प्लाज्मा के फ्लो में बदलाव बाहर से देखे गए चुंबकीय क्षेत्रों से सबसे ज्यादा मेल खाता है। जब सूर्य की आंतरिक परतों के संभावित प्रभावों को इस मॉडल में जोड़ा गया तो तस्वीर काफी धुंधली हो गई।