सूरतगढ़.राज्य सरकार एक तरफ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे कर रही है। वहीं राजकीय चिकत्सालय मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। सूर्योदय नगरी क्षेत्र में लाखों रुपए की लागत से बने अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्टाफ की कमी की समस्या से जूझ रहा है। यहां सबसे खास बात यह है कि चिकित्सालय में स्थाई चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होने पर अनुबंध पर कार्यरत चिकित्सक से ही कार्य करवाया जा रहा है। इस वजह से ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है। करीब डेढ़ साल पूर्व स्थाई चिकित्सक को लगाया हुआ था। उस समय ओपीडी 250 से 300 तक पहुंच गई थी, लेकिन वर्तमान में ओपीडी में मात्र 50 मरीज आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सालय प्रभारी को नोटिस जारी किया है।
सूरतगढ़.राज्य सरकार एक तरफ मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के दावे कर रही है। वहीं राजकीय चिकत्सालय मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। सूर्योदय नगरी क्षेत्र में लाखों रुपए की लागत से बने अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्टाफ की कमी की समस्या से जूझ रहा है। यहां सबसे खास बात यह है कि चिकित्सालय में स्थाई चिकित्सक की नियुक्ति नहीं होने पर अनुबंध पर कार्यरत चिकित्सक से ही कार्य करवाया जा रहा है। इस वजह से ओपीडी में मरीजों की संख्या लगातार कम हो रही है। करीब डेढ़ साल पूर्व स्थाई चिकित्सक को लगाया हुआ था। उस समय ओपीडी 250 से 300 तक पहुंच गई थी, लेकिन वर्तमान में ओपीडी में मात्र 50 मरीज आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य अधिकारियों ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सालय प्रभारी को नोटिस जारी किया है।
सूर्योदय नगरी क्षेत्र के 11 वार्डों के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अर्बन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का संचालन किया जा रहा है। लाखों रुपए की लागत से बने अरबन पीएचसी में शुरूआत में अनुबंध चिकित्सक को लगाया था। प्रारंभिक रूप से सूर्योदयनगरी क्षेत्र के मरीज अर्बन पीएचसी में अधिक आते थे। करीब डेढ़ साल पूर्व सीएचसी से एक चिकित्सक को लगाया था। इस दौरान प्रतिदिन ओपीडी में 250 से 300 मरीज आते थे। लेकिन बाद में चिकित्सक को वापस सीएचसी में लगा दिया था। वर्तमान में पीएचसी में अनुबंध पर चिकित्सक कार्यरत है तथा ओपीडी मात्र 50 तक पहुंच गई। गत दिनों सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला ने भी अर्बन पीएचसी का निरीक्षण के दौरान इस मामले को गंभीर मानते हुए पीएचसी प्रभारी को नोटिस जारी किया था।
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रबन पीएचसी में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा वितरण केन्द्र, मुख्यमंत्री निशुल्क जांच केन्द्र, जच्चा बच्चा वार्डए ओपीडी रुम, स्टोर आदि बने हुए हैं। चिकित्सालय के लिए एक चिकित्सक, पांच एएनएम, दो जीएनएम, एक लैब तकनीशियन, एक डाटा ऑपरेटर, एक पब्लिक हैल्थ मैनेजर,एक फार्मासिस्ट,एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का पद स्वीकृत है। लेकिन चिकित्सालय में 2 एएनएम, एक जीएनएम, एक पब्लिक हैल्थ मैनेजर कार्यरत है। जबकि एक सफाई कर्मचारी अनुबंध पर कार्यरत है। वही, एक फार्मासिस्ट, तीन एएनएम, एक एलएचवी, एक जीएनएम का पद रिक्त पड़ा है। चिकित्सालय में मरीजों की संख्या घट रही है। चिकित्सालय में फार्मासिस्ट के अभाव में लैब सहायक ही मुख्यमंत्री निशुल्क जांच केन्द्र में सेवाएं दे रहा है। यहां पन्द्रह प्रकार की जांच हो रही है। यहां सीबीसी मशीन के अभाव की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अर्बन पीएचसी में पानी भण्डारण की व्यवस्था नहीं है। इस वजह से आए दिन मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। चिकित्सालय में पानी स्टोरेज के लिए डिग्गी का निर्माण नहीं हो रखा है। इस वजह से जलदाय सप्लाई आने पर ही दिन में पानी भरा जाता है। कई बार जब पेयजल सप्लाई नहीं आती तो छत पर लगी टंकी खाली रहती है। पानी के अभाव में मरीज के साथ साथ स्टाफ कर्मियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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स्वास्थ्य विभाग की ओर से सूर्यनगरी क्षेत्र के नगरपालिका के सामुदायिक भवन में एक मई 2015 को अस्थाई रुप से अरबन पीएचसी का संचालन शुरु हुआ। नगरपालिका की ओर से शिवबाडी के पास एक भूखण्ड दिया गया। यहां पीएचसी निर्माण पर करीब 45 लाख रुपए की लागत आई। वर्ष 13 दिसम्बर 2017 को विधिवत शिवबाडी रोड स्थित अरबन पीएचसी अपने भवन में स्थानांतरित हो गया था। स्वयं का भवन होने के बावजूद पीएचसी की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। सूर्योदयनगरी क्षेत्र के मरीज प्रतिदिन जांच व दवा के लिए अरबन पीएचसी आते है। लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिलने पर निराश होकर वापिस लौट जाते हैं।
बीसीएमओ डॉ.मनोज अग्रवाल ने बताया कि अरबन पीएचसी में चिकित्सक व स्टाफ सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के बारे में उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चुका है। शीघ्र ही सभी समस्याओं का समाधान करवाएंगे।