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सूरतगढ़.परिवहन एवं सडक सुरक्षा आयुक्त के निर्देशन में सीकर के एआरटीओ डॉ. वीरेंद्र सिंह राठौड़ की अगुवाई में उडऩदस्तों ने ओवरलोड वाहनों के साथ साथ इलाके में नेशनल हाइवे और घग्घर नदी पर बने पुल के निर्माण में तकनीकी खामियों पर रोड आनिंग एजेन्सी और ठेकेदार के खिलाफ चालान किया गया हैं। परिवहन विभाग ने पहली बार किसी रोड निर्माण को लेकर जुर्माना लगाने का प्रावधान अपनाया हैं। एआरटीओ राठौड़ ने स्थानीय लोगों से भी चर्चा की। इसके बाद रोड ऑनिंग एजेन्सी एनएच पीडब्ल्यूडी बीकानेर अधीक्षण अभियंता से चर्चा कर सुरक्षा प्रतिनिधि राधेश्याम एवं चैनेज 173 से 250/900 सडक के 77.9 किमी के स्ट्रेच का ठेकेदार दीप ज्योति श्रीगंगानगर के इंजीनियर गुरजीत सिंह व नगरपालिका के कनिष्ठ अभियंता सुरेन्द्र पाल सिंह को मौके पर बुलाकर स्पॉट की इण्डियन रोड कांग्रेस मानकों के अनुरूप इंजीनियरिंग दोष चिन्हित किए।
परिवहन विभाग ने अपनी जांच में स्वीकारा कि मुख्य रूप से सडक पर बीचोबीच इतना बड़े गड्ढ़े, ड्रेनेज का बन्द होनाए 45 मीटर राइट ऑफ वे की चौड़ाई के हाइवे के दोनों ओर अतिक्रमण, कॉलोनियों के पानी की निकासी न होने तथा सारा पानी हाइवे पर आ जाना, ठेकेदार द्वारा अनुबन्ध के अनुसार सही मरम्मत न करना, हाइवे निर्माण मानदंड की पालना न होना आदि पर मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 198 ए के तहत चैंकिंग प्रतिवेदन बनाया गया। प्रत्येक मानक दोष पर एक लाख तक पेनल्टी का प्रावधान है, जो न्यायालय द्वारा किया जाकर मोटर दुर्घटना कोष में जमा होना है।
सीकर के एआरटीओ डॉ. वीरेंद्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में सीकर रीजन के उडऩदस्तों ने ओवरलोड वाहनों के विरूद्ध आकस्मिक जांच कर 45 वाहनों को पकडकऱ मौक़े पर 10.50 लाख का जुर्माना किया। वही, राजस्थान पत्रिका में शनिवार के अंक में नेशनल हाइवे पर हुए गड्ढ़े, मानकसर पुल में सुराख हादसों की आंंशका शीर्षक से प्रकाशित हुए समाचार को अधिकारियों की टीम ने गंभीरता से लेते हुए नेशनल हाइवे 62 के चैनेज 173/600 पर 20 फीट लम्बा 6 फीट चौड़ा एवं 1.5 फीट गहरा गड्ढ़े का निरीक्षण किया
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उन्होंने नेशनल हाइवे पर मानकसर के पास बने घग्घर पुल का भी निरीक्षण किया। यह पुल दो पुलों को जोडकर बनाया गया जिसमें 8 इंच का ऐसा गेप है कि जिसमें मोटर साइकिल के टायर फंस जाते हैं। इसको दुरुस्त करने के लिए पूर्व 3 फीट चौड़ा पुल पर डिवाइडर बना दिया जिससे उसकी कैरिज-वे की चौड़ाई कम होने से गाडिय़ा डिवाइडर से टकराने से लगी जिसे बाद में तोड़ दिया। वर्तमान में 3 फीट डिवाइडर पर इस तरह खुदा है जो कैरिज-वे से वाहनों का बेलेन्स बिगडऩे की सम्भावना बढ़ गई। पुल पर रोशनी की व्यवस्था तक नहीं है।
मानकसर से आने वाली अप्रोच रोड पर गति सीमा 20 किमीध् घण्टा, रूकने का स्टॉप चिन्ह, स्पीड ब्रेकर आदि नहीं होने से लोग रूककर मिलने के स्थान पर सीधे हाइवे पर मिलते है। इस 77 किमी के स्ट्रेच पर अनिवार्य होने पर भी एम्बुलेंस,क्रेन एवं पेट्रोलिंग वाहन नहीं है। उन्होंने बताया कि इस हाइवे पर यातायात का दबाव दस हज़ार पैंसेजर कार यूनिट से अधिक होने कारण यह 4 लेन में बदलने का पात्र है। जिसके लिए प्रयास करने आवश्यक है परिवहन विभाग का नाम परिवहन एवं सडक सुरक्षा विभाग में बदलने के बाद रोड ऑनिंग एजेन्सी एवं हाइवे ठेकेदार के विरूद्ध मोटर व्हीकल एक्ट के तहत यह राज्य में पहली कार्यवाही है।
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एआरटीओ डॉ. राठौड़ की टीम में परिवहन निरीक्षक कन्हैयालाल यादव, सतवीर विश्नोई, हनुमान तरड, कैलाश स्वामी आदि थे । कार्यवाही के दौरान कई डीलर एवं सेव लाइफ के मोहन सोनी सहित कई उपस्थित रहे । विदित रहे कि डॉ. वीरेंद्र सिंह राठौड़ सडक़ सुरक्षा क़ानून विषय में देश के पहले पीएचडी है। तीन वर्ष भारत सरकार में सडक़ सुरक्षा के तकनीकी सलाहकार रह चुके है तथा एक्सीडेंट्स इंवेस्टीगेटर एवं रोड सेफ़्टी ऑडिटर है वर्ष 2021 में भारत सरकार ने गोल्ड मेडल के साथ राष्ट्रीय सडक़ सुरक्षा पुरस्कार प्राप्त हो चुका है ।
Published on:
23 Jun 2024 07:33 pm

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