मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि वंदे मातरम गीत कभी अप्रासंगिक नहीं होगा। यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था। गुजरात विधानसभा में सोमवार को वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई को गति देने वाला वंदे […]
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कहा कि वंदे मातरम गीत कभी अप्रासंगिक नहीं होगा। यह आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना स्वतंत्रता संग्राम के समय था। गुजरात विधानसभा में सोमवार को वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर विशेष संकल्प प्रस्तुत करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई को गति देने वाला वंदे मातरम अब अमृतकाल में उसी जोश और उत्साह के साथ विकसित भारत - आत्मनिर्भर भारत के लिए नई प्रेरणा शक्ति बनेगा।
उन्होंने गीत की हर पंक्ति में भारत माता के प्रति गहन भक्ति भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके शब्द और अर्थ आज भी महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से देशभर में वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ के उत्सव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गीत भारत माता के प्रति अर्थपूर्ण भक्ति का प्रतीक है। वंदे मातरम गीत की शक्ति ही ऐसी है कि भले ही वह गुलामी के दौर में रचा गया हो, लेकिन उसके शब्द और अर्थ गुलामी की छाया तक सीमित नहीं रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस गीत ने राष्ट्रभक्ति और स्वतंत्रता की चेतना को जगाया। ब्रिटिश सरकार ने इस गीत से घबराकर उस पर प्रतिबंध लगा दिया था और गाने वालों को जेल में डाल दिया जाता था, लेकिन इसके बावजूद वंदे मातरम स्वतंत्रता का जयघोष बन गया।
उन्होंने गीत में सरस्वती, लक्ष्मी और दुर्गा की वंदना का उल्लेख करते हुए इसके ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित किया। संविधान सभा ने वर्ष 1950 में इसे जन गण मन के समकक्ष राष्ट्रगीत का दर्जा दिया। अनेक ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम का नारा लगाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया, जिससे देशवासियों में भारत भक्ति का भाव जागृत हुआ। वंदे मातरम कोई साधारण गीत नहीं, बल्कि हमारी आन, बान और शान है।