गेहूं खरीदी में खेल, अच्छा बताकर खरीदा बाद में कर दिया रिजेक्ट
भोपाल। नागरिक आपूर्ति निगम के गेहूं को डब्ल्यूएलसी (वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन) ने फेल कर दिया है। सहकारी समितियों के जरिए किसानों से खरीदे गए 4.80 लाख क्विंटल गेहूं की क्वालिटी पर दो संस्थानों में फंसे पेच ने हजारों किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं।
डब्ल्यूएलसी का दावा है कि उक्त गेहूं गुणवत्ता के निर्धारित मापदंड पर खरा नहीं है। यदि इसे लिया गया तो भविष्य में एफसीआइ इसे फेल कर सकता है या फिर राशन की दुकानों से होते हुए गरीबों की थाली तक पहुंचा तो आफत आ सकती है। वहीं किसान संगठनों ने गड़बड़ी के आरोप लगाए। उनका कहना है कि किसानों ने यदि खराब गेहूं दिया होता तो सहकारी समितियां उसे पहले ही लौटा देतीं।
कसानों ने जो गेहूं बेचा है, उसे गोदामों में जमा नहीं किया जा रहा है। समर्थन मूल्य के हिसाब से इसकी कीमत 115 करोड़ 20 लाख रुपए करीब है। डल्यूएलसी भोपाल से रिटायर्ड मैनेजर अनिल बाजपेयी के मुताबिक समितियां अब इसकी स्वयं के खर्च पर ग्रेडिंग कराते हुए उसे दोबारा भेजेगा। यदि फिर भी वह एफएयू मापदंड में उचित नहीं पाया जाता, तो किसानों को लौटाया जाएगा। इस तरह जब तक उक्त गेहूं का निराकरण नहीं हो जाता, किसानों को भुगतान भी नहीं होगा।
प्रदेश में 20 मार्च से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी शुरू हुई है। अब तक 2 लाख 85 हजार किसान 23 लाख मीट्रिक टन गेहूं बेच चुके हैं। केंद्रों में समितियों द्वारा गेहूं की गुणवत्ता जांच की जाती है। समितियों ने जिस गेहूं का अच्छा बताकर खरीदा उसे डब्ल्यूएलसी ने घटिया बताकर गोदामों में लेने से ही मना कर दिया।
-समितियों के पास संसाधन कम थे। बारिश से गेहूं गीला हो गया।
-गीले गेहूं को सुखाने बड़े और कवर्ड मैदान की जरूरत थी।
-बार-बार मौसम खराब हो रहा था इसलिए समितियों ने पीछा छुड़ाते हुए परिवहन करा दिया।
खरीदी केंद्रों में संसाधनों की कमी थी। विभागों की लापरवाही का खमियाजा किसान बिल्कुल नहीं भुगतेंगे। गेहूं लौटाया गया तो किसान आंदोलन होगा। -सुरेंद्र राजपूत, किसान नेता
रिजेक्टेड गेहूं वापस किए जा रहे हैं। इसकी ग्रेडिंग समितियों से कराएंगे। किसानों का नुकसान न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा। -रवींद्र सिंह, आक्युत खाद्य नागरिक आपूर्ति