कैंडियन शैली और हनुमान चालीसा का अद्भुत संगम इस ऐतिहासिक उपलब्धि की केंद्रबिंदु बनी पेंटिंग ‘हनुमान चालीसा’ जिसे ललित कला संस्थान की कनिष्ठ निदेशक और प्रदर्शनी की क्यूरेटर डॉ. शैलजा सुल्लेरे ने तैयार किया है। इस कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शैली है। डॉ. सुल्लेरे ने बिना किसी पूर्व संदर्भ या उदाहरण के, अपनी […]
इस ऐतिहासिक उपलब्धि की केंद्रबिंदु बनी पेंटिंग ‘हनुमान चालीसा’ जिसे ललित कला संस्थान की कनिष्ठ निदेशक और प्रदर्शनी की क्यूरेटर डॉ. शैलजा सुल्लेरे ने तैयार किया है। इस कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता इसकी शैली है। डॉ. सुल्लेरे ने बिना किसी पूर्व संदर्भ या उदाहरण के, अपनी कल्पना शक्ति से प्राचीन श्रीलंकाई 'कैंडियन पेंटिंग शैली' को हनुमान चालीसा के भावों के साथ पिरोया है।
वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के दौरान श्रीलंका से आए विशिष्ट अतिथियों महेल बंदारा, उडुगामा सरनाथिस्सा थेरो और दिनेश सुबासिंघे ने इस पेंटिंग की भूरि-भूरि प्रशंसा की थी। इन्हीं के मार्गदर्शन और सहयोग से इस कलाकृति का चयन आईसीसीआर कोलंबो द्वारा किया गया। विशेष बात यह है कि इस पुस्तक को आईसीसीआर के चेयरमैन अंकुरन दत्ता के विदाई समारोह में उन्हें एक अमूल्य उपहार के रूप में भेंट किया गया।
इस गौरवपूर्ण क्षण पर आयोजकों ने मार्गदर्शक बाला वी संकत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही इसका श्रेय साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई और डॉ. अखिलेश गुमाश्ता को दिया गया है, जिनके संरक्षण में विश्व रामायण सम्मेलन जैसे विशाल मंच पर स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिला।