CG News: अगर मधुमक्खियां डंक मार दें तो इसे हल्के में न लें। समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत भी हो सकती है। मामला गंभीर होने पर इलाज होने के बाद भी जान जाने का रिस्क रहता है। प्रदेश में पिछले चार माह में विभिन्न जिलों में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हुई […]
CG News: अगर मधुमक्खियां डंक मार दें तो इसे हल्के में न लें। समय पर इलाज नहीं मिलने से मौत भी हो सकती है। मामला गंभीर होने पर इलाज होने के बाद भी जान जाने का रिस्क रहता है। प्रदेश में पिछले चार माह में विभिन्न जिलों में 40 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। एक अनुमान के अनुसार मधुमक्खियों के डंक से 200 से ज्यादा लोगों की जान चली जाती है। पीएम रिपोर्ट में फेफड़े व ब्रेन में सूजन मिलती है, जिससे मरीज असमय ही दुनिया छोड़कर चला जाता है। डॉक्टरों के अनुसार मधुमक्खियों के डंक मारने से यदि किसी को एलर्जी हो तो इलाज में लापरवाही न करें।
मधुमक्खियों के डंक मारने पर दर्द होता है और वहां पर लाल निशान बन जाता है। मधुमक्खी के डंक में मौजूद जहर शरीर में एलर्जी और हार्ट फेल का खतरा बढ़ा सकता है। मधुमक्खी के डंक मारने के कई मामले एम्स, आंबेडकर व निजी अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। शरीर में एलर्जी जैसे दाने व चकत्ते उभरने पर तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए जरूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। खेत में काम कर रहे हैं या जंगल की ओर से गुजर रहे हैं तो अतिरिक्त सावधानी बरतें। दर्द व सूजन लंबे समय तक बने रहें तो डॉक्टरी इलाज कराना जरूरी है।
हार्ट फेल होने का रिस्क भी
एसीआई में कार्डियो थोरिसक एंड वेस्कुलर सर्जरी विभाग के एचओडी डॉ. कृष्णकांत साहू के अनुसार मधुमक्खी के डंक मारने से हार्ट फेल होने का रिस्क रहता है। हालांकि यह रेयर केस में होता है। आमतौर पर यह गंभीर एलर्जी रिएक्शन वाले लोगों में हो सकता है। इस स्थिति को कूनिस सिंड्रोम कहा जाता है, जिसमें एलर्जी की प्रतिक्रिया दिल का दौरा या हार्ट संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकती है। नेहरू मेडिकल कॉलेज में फोरेंसिक विभाग की एचओडी डॉ. स्निग्धा जैन के अनुसार रेयर केस में ही पीएम करने की जरूरत पड़ती है।
केस-एक
सूरजपुर जिले के 48 वर्षीय एक भाजपा नेता की मधुमक्खियों के काटने से जान चली गई। ग्रामीण डॉक्टर एक बस्ती में मरीजों का इलाज करने गए थे। तभी मधुमक्खियों के झुंड ने हमला कर दिया।
केस-दो
बालोद जिले के सलौनी (मोंगरी) के 70 वर्षीय व्यक्ति सुबह खेत की ओर गए थे, तभी अचानक पेड़ से बाहर आए मधुमक्खियों के झुंड ने बुजुर्ग पर हमला कर दिया। आंबेडकर अस्पताल में मौत हो गई।
केस-तीन
बेमेतरा के छेरकापुर में खेत में काम कर रहे 55 वर्षीय किसान की मधुमक्खी के डंक मरने से मौत हो गई। उनकी पत्नी व बेटा घायल हो गया। इलाज से वे किसी तरह ठीक हुए।
केस-चार
धमतरी जिले के कानामुका निवासी 55 वर्षीय व्यक्ति शादी से लौट रहे थे, तभी मधुमक्खियों ने उस पर हमला कर दिया। इलाज कराने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ, मौत हो गई।
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कुछ घरेलू उपाय, इससे दूर होंगे दर्द और सूजन
-बेकिंग सोडा व पानी का पेस्ट बनाकर डंक वाले स्थान पर लगाएं।
-नींबू का रस निकालकर डंक वाले स्थान पर मलें।
-आइस पैक को डंक वाले स्थान पर रखें।0 दही लगाएं, इसमें मौजूद लैक्टिक एसिड तुरंत असर करेगा।
-हल्दी व दूध का पेस्ट बनाकर डंक वाली जगह पर लगाएं।
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टॉपिक एक्सपर्ट
एलर्जी पर डॉक्टर को दिखाएं
मधुमक्खी के डंक से एलर्जी की प्रतिक्रिया या एनाफिलेक्सिस नामक एक गंभीर एलर्जी रिएक्शन हो सकता है। पित्ती, गले या जीभ में सूजन, त्वचा का लाल होना, मितली, उल्टी, चक्कर आ सकता है। एलर्जी हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। लापरवाही भारी पड़ सकती है।
डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल
सावधानी बरतें
मधुमक्खियों के डंक मारने से रक्त नली से पानी बाहर निकल जाता है, जिससे ब्रेन व फेफड़े में सूजन आ जाती है। पोस्टमार्टम के दौरान ये देखने को मिलता है। मार्च-अप्रैल में सामान्यत: छत्ते से शहद निकालने का काम किया जाता है। इस दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है।
डॉ. कृष्णदत्त चावली, एचओडी फोरेंसिक मेडिसिन एम्स
ग्रामीणों को ज्यादा खतरा
मधुमक्खियों के डंक वाले काफी मरीज आते हैं। मरीजों की सीटी स्कैन या एमआरआई रिपोर्ट देखने से ये पता चलता है कि फेफड़े व ब्रेन में सूजन है। कई मरीजों को इलाज के बाद बचाया गया है। वहीं गंभीर एलर्जी वाले कुछ मरीजों की मौत हो जाती है। ग्रामीण लोग अलर्ट रहें।
डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, प्रोफेसर मेडिसिन आंबेडकर अस्पताल