newsupdate

छत्तीसगढ़ के मेडिकल कॉलेजों में खत्म नहीं होंगे जूनियर डॉक्टर के पद, सामने आई यह बड़ी वजह

CG news: प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से स्वीकृत जूनियर रेसीडेंट (जेआर) के पद खत्म नहीं होंगे। ये पद अस्तित्व में रहेंगे। इन पदों पर एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों की भर्ती रहेगी। सालभर पहले रायगढ़ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के जेआर को सरेंडर करने संबंधी पत्र कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन को लिखा था। इसके बाद […]

2 min read
Jan 22, 2026

CG news: प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहले से स्वीकृत जूनियर रेसीडेंट (जेआर) के पद खत्म नहीं होंगे। ये पद अस्तित्व में रहेंगे। इन पदों पर एमबीबीएस डिग्रीधारी डॉक्टरों की भर्ती रहेगी। सालभर पहले रायगढ़ मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के जेआर को सरेंडर करने संबंधी पत्र कमिश्नर मेडिकल एजुकेशन को लिखा था। इसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। पत्र में जेआर को अस्पताल व कॉलेज में गैरजरूरी बताते हुए पद खत्म करने की मांग की गई थी। जानकारों ने इस पर सवाल भी उठाए थे।

डीन ने सीएमई को लिखे पत्र में कहा था कि कॉलेज में पीजी की सीटें हैं इसलिए जेआर की जरूरत नहीं है। हालांकि नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) कॉलेज के निरीक्षण के दौरान मान्यता के लिए जेआर की गिनती करता है। मतलब साफ है कि सभी मेडिकल कॉलेजों के सेटअप में फैकल्टी में सीनियर रेसीडेंट (एसआर) व जेआर के पद भी शामिल है।

डीन के पत्र पर शासन ने कोई ध्यान नहीं दिया। इसका मतलब साफ है कि ये पद पहले की तरह बना रहेगा। पत्रिका को चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया है कि ये पद खत्म नहीं किया जाएगा। एक पद स्वीकृत कराने के लिए काफी समय लग जाता है। ऐसे में पहले से सेटअप में मंजूर पद यथावत रहेंगे। इस तरह का सुझाव सही नहीं है।

रायगढ़ में 55 जेआर दे रहे थे सेवाएं

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में जेआर के 55 पद स्वीकृत हैं। जब डीन ने सीएमई को पत्र लिखा, तब वहां 52 सेवाएं दे रहे थे। इनमें रेगुलर के अलावा संविदा व बांडेड जेआर शामिल हैं। वहीं कॉलेज के 10 विभागाें में 26 पीजी की सीटें थीं, जो अब बढ़कर 40 पहुंच गई हैं। प्रबंधन ने कहा था कि एनएमसी पीजी छात्रों को जेआर मानती है इसलिए कॉलेज में स्वीकृत नियमित पदों की जरूरत नहीं है।

इसलिए इन पदों को सरेंडर करना उचित होगा। यही नहीं नियमित जेआर को नए कॉलेजों में भेजा जाना उचित होगा, जहां पीजी कोर्स नहीं चल रहा है। या स्वास्थ्य विभाग के सेटअप में जिला या अन्य अस्पतालों में भेजा जाना उचित होगा। इससे जेआर को दिए जाने वाले वेत्तन व भत्ते की बचत होगी। साथ ही बचे पैसे को पीजी छात्रों को स्टाइपेंड के रूप में दिया जा सकेगा। कार्यरत जेआर को दूसरे कॉलेजों व स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में ट्रांसफर करने का भी अनुरोध किया गया था।

1000 से ज्यादा पद

प्रदेश के 10 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में जेआर के करीब एक हजार पद मंजूर है। जेआर के लिए वैसे तो शैक्षणिक योग्यता एमबीबीएस है, लेकिन कुछ सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमडी मेडिसिन करने के बाद भी जेआर के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं कुछ जिला अस्पतालों में एमडी मेडिसिन या रेडियो डायग्नोसिस, सर्जरी विषय में पीजी करने के बाद जेआर या मेडिकल अफसर बने हुए हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे में जेआर के पदों को विलोपित किया जाना सही नहीं होगा। एमबीबीएस के बाद छात्रों को दो साल के लिए बांड पर रखा जाता है। उन्हें मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पतालों व सीएचसी में जेआर बनाया जाता है। जब पद ही विलाेपित हो जाएंगे तो उन्हें कहां पदस्थ किया जाएगा? छोटे मेडिकल कॉलेजों में जहां, पीजी की सीटें कम हो, वहां जेआर इलाज भी करते हैं। हालांकि नेहरू मेडिकल जैसे बड़े कॉलेज में जेआर दवा की पर्ची बनाते हैं।

मेडिकल कॉलेजों के सेटअप में जेआर का पद सेंक्शन है। एनएमसी भी मान्यता के लिए निरीक्षण के दौरान फैकल्टी के अलावा एसआर व जेआर भी देखा जाता है। ऐसे में पद खत्म करने की जरूरत नहीं है। एनएमसी के नाम्सZ में जेआर का पद है। जेआर रहने से विभाग को भी फायदा है।
डॉ. विष्णु दत्त, रिटायर्ड डीएमई

Published on:
22 Jan 2026 11:38 pm
Also Read
View All

अगली खबर