
Waterfall Tourism: एक ऐसा नजारा जिसे देखकर प्राकृतिक के गोद में समाने का मन करेगा। एक ऐसा नजारा जहां आकर वहीं का हो जाने का मन करेगा। प्रकृति से मन मोह लेने वाला मनोरम दृश्य है। प्रकृति का ऐसा दृश्य जो जन्नत से कम नहीं है, चारों तरफ खामोशी और प्रकृति का सौंदर्य रूप पर्यटकों का मन मोह लेता हैं। वनों से आच्छादित है ये दुनिया यहां आने वाले पर्यटक खूबसूरत वादियों में खो जाते है। कसडोल मुख्यालय से 10 किलोमीटर की दूरी में स्थित है सिद्ध खोल जलप्रपात, जो अपने मनोरम दृश्य और खूबसूरती से पर्यटकों को लुभाती है।
40 फीट की ऊंचाई से गिरता जलप्रपात पर्यटकों के देखना का बेहद खूबसूरत नजारा है। सिद्ध खोल जलप्रपात को सिद्धबाबा के नाम से भी जाना जाता है। जलप्रपात का आनंद लेने पर्यटक जिले के आलावा हजारों की संख्या में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से इसे देखने आते हैं। सिद्ध खोल जलप्रपात के आस पास घने वन उसके प्रकृति खूबसूरती को और बढ़ा देती है, खासकर बरसात के दिनों में जलप्रपात की खूबसूरती सौ गुना बढ़ जाती है और बस पर्यटक यहां खिंचे चले आते हैं।
यहां पर्यटकों की सुविधा के लिए वन विभाग द्वारा वॉच टॉवर और छाया के लिए कुटी बनाई गई है। सुरक्षा के लिए चारों तरफ से काटा तार लगाए गए हैं। वॉच टॉवर में चढ़ कर चारों तरफ का नजारा का आप आनंद उठा सकते हैं। यहां एक मंदिर भी है, जहां लोग पूजा भी करते हैं और भगवान सिद्धबला का आशीर्वाद लेते हैं। 40 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना कुदरत का अदभूत नजारा है।
जलप्रपात परिसर में स्थित सिद्धबाबा मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के साथ मंदिर में दर्शन कर भगवान सिद्धबाबा का आशीर्वाद भी प्राप्त करते हैं। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का यह अनूठा संगम इस स्थान को और अधिक आकर्षक बनाता है।
सिद्धखोल जलप्रपात को इकोटूरिज्म के तर्ज पर विकसित करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। लगातार प्रपोजल विभाग द्वारा बनाया जा रहा है। अभी उक्त जगह पर वन प्रबंधन समिति द्वारा देखरेख किया जा रहा है। सभी पर्यटकों से 10 रुपए लिया जा रहा है, साथ ही वन प्रबंधन समिति की आय बढ़ाने बाबत दोना पत्तल भी बनाया जाएगा। साथ ही शौचालय और पानी की भी व्यवस्था की गई है, जिससे पर्यटकों को किसी तरह की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।
राजेश्वर नामदेव, रेंजर, सोनाखान रेंज