
वन्य प्राणियों पर भी छाया पेयजल का संकट (photo source- Patrika)
Chhattisgarh Tourism: बस्तर के प्रसिद्ध जलप्रपात इन दिनों पानी की कमी से जूझ रहे हैं। जल प्रवाह सिमटने के कारण चित्रकोट, तीरथगढ़ और तामड़ा घुमर जैसे प्रमुख जलप्रपातों की रौनक फीकी पड़ गई है। जहां कुछ महीने पहले तक पर्यटकों की भीड़ उमड़ती थी, वहीं अब इन स्थलों पर सन्नाटा पसरा हुआ नजर आ रहा है।
जैसे जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है इंद्रावती नदी और अन्य जल स्रोतों का जलस्तर लगातार घट रहा है, जिसका सीधा असर जलप्रपातों पर दिखाई दे रहा है। चित्रकोट जलप्रपात, जिसे ‘भारत का नियाग्रा’ कहा जाता है, इन दिनों पतली धार में सिमट गया है। वहीं तीरथगढ़ और तामड़ा घुमर जलप्रपात भी लगभग सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं।
बस्तर का पर्यटन यहां की प्राकृतिक झरने, नदी, नाले और प्राकृतिक सौदर्य पर टिका है ऐसे में सूखे के चलते पर्यटन पर इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। स्थानीय गाइड, दुकानदार और छोटे व्यवसायियों का कहना है कि जलप्रपातों में पानी कम होने से सैलानियों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते जल संरक्षण और प्राकृतिक स्रोतों के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो पर्यटन व वन्यजीवों के लिए स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
जंगलों में बहने वाले नदी-नाले सूखने लगे हैं, जिससे वन्य प्राणियों के सामने पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। पानी की तलाश में जानवर अब रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका भी बढ़ गई है। हालांकि वन विभाग द्वारा कुछ स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था किया जा रहा है। इसके बावजूद बढ़ती गर्मी और लगातार गिरते जलस्तर के चलते वन्य जीव जंतुओं के पानी पीने की समस्या बनी हुई है।
इंद्रावती नदी और अन्य स्रोतों का जलस्तर घटने का मतलब है कि भविष्य में पेयजल और सिंचाई दोनों पर असर पड़ेगा। इससे आसपास के गांवों में जल संकट गहरा सकता है, जो कृषि और दैनिक जीवन को प्रभावित करेगा।
लगातार गिरता जलस्तर और सूखते जलप्रपात इस बात का संकेत हो सकते हैं कि क्षेत्र में वर्षा का पैटर्न बदल रहा है। यदि यह ट्रेंड जारी रहा, तो बस्तर में सूखे की स्थिति बार-बार उत्पन्न हो सकती है।
Updated on:
11 Apr 2026 10:24 am
Published on:
11 Apr 2026 10:22 am
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