
नोएडा। भारत रत्न से सम्मानित 93 वर्षीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयीatal Bihari Vajpayee Critical) की हालत स्थिर बनी हुई है। वहीं उनके लिए नोएडा समेत देशभर में दुआएं मांगी जा रही है। दरअसल, 2009 से की वाजपेयी बीमार चल रहे हैं। जिसके चलते ही उन्होंने किसी से मिलना भी बंद कर दिया था। उनकी बीमारी के बारे में पत्रिका ने नोएडा के सीनियर फिजिशियन डॉ एन.के शर्मा ने बात की। डॉक्टर ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी डिमेंशिया नामक रोग से पीड़ित हैं। इसके साथ ही उन्हें गुर्दे (किडनी) में संक्रमण और डायबिटीज जैसी बीमारियां भी हैं। एम्स में फिलहाल वह लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर हैं।
क्या है डिमेंशिया की बीमारी
डॉ एन.के शर्मा बताते हैं कि डिमेंशिया किसी तरह की बीमारी का नाम नहीं है, बल्कि यह कुछ ऐसे लक्षण हैं जिसमें इंसान की यादाश्त कमजोर हो जाती है। जिसके कारण वह अपने रोजमर्रा के कार्य खुद ठीक से नहीं कर पाता। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों में शॉर्ट टर्म मेमरी लॉस जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं।
समय के साथ बढ़ती जाती है डिमेंशिया
डॉक्टर के मुताबकि समय के साथ साथ डिमेंशिया भी रोगी में बढ़ता रहता है। जिसके साथ ही पीड़ित की तबीयत भी धीरे-धीरे खराब होती जाती है। इस बीमारी से ग्रस्त रोगी शारीरिक रूप से भी कमजोर होने लगते हैं और वह बात-बात पर परेशान भी हो जाते हैं।
ये हैं डिमेंशिया के मुख्य लक्षण
-किसी का भी नाम याद रखने में परेशानी
-अवसाद से पीड़ित होना
-संवाद स्थापित करने/बात करने में दिक्कत होना
-व्यवहार में किसी तरह का बदलाव
-कुछ भी निगलने में दिक्कत होना
-चलने-फिरने में परेशानी होना
अटल बिहारी वाजपेयी का एक गुर्दा ही करता है काम
बता दें कि वाजपेयी को किडनी संबंधी बीमारी भी हैं और उनका एक ही गुर्दा काम करता है। वह मधुमेह के शिकार हैं और 2009 में उन्हें स्ट्रोक आया था। इसके बाद से ही उनकी तबीयत खराब होती आ रही है।