पश्चिमी उत्तर प्रदेश से इन दो नेताओं पर लगाया दांव
नोएडा. भजपा ने विधान परिषद चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी है। इस लिस्ट में दो मंत्रियों महेन्द्र सिंह और मोहसिन रजा के अलावा 10 और प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा ने ये लिस्ट रविवार को जारी की। इस लिस्ट में बिजनौर से भाजपा के कद्दावर नेता अशोक कटारिया और मेरठ से भाजपा नेत्री सरोजिनी अग्रवाल को भी शामिल किया गया है। इनके अलावा भाजपा ने बुक्कल नवाब, यशवंत सिंह, जयवीर सिंह, विद्या सागर सोनकर, विजय बहादुर पाठक और अशोक धवन को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
उत्तर प्रदेश से खाली हो रही एमएलसी की 13 सीटों के लिए चुनाव आयोग ने चुनाव की तारीख का एलान कर दिया है। चुनाव आयोग यूपी विधान परिषद की 13 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर चुका है। अधिसूचना के मुताबिक 9 से 16 अप्रैल तक नामांकन होगा और 26 अप्रैल को मतदान होगा। गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत 12 एमएलसी 5 मई 2018 को रिटायर होने वाले हैं, जबकि एक सीट पहले से ही खाली है।
इन नेताओं की सीटे होंगी खाली?
- उत्तर प्रदेश विधानप रिषद के 12 सदस्यों की सदस्यता 5 मई को खत्म हो रही है। जबकि एक सीट पहले से ही खाली है।
-भाजपा- के खाते से महेंद्र कुमार सिंह और मोहसिन रजा का कार्यकाल खत्म हो रहा है ,जिन्हें भाजपा ने दोबारा उम्मीदवार बनाया है।
- समाजवादी पार्टी- अखिलेश यादव, मधु गुप्ता, नरेश उत्तम, रामसकल गुर्जर, विजय यादव, राजेंद्र चौधरी और उमर अली खान
बसपा - विजय प्रताप, सुनील कुमार चित्तौड़
- आरएलडी- चौधरी मुश्ताक
- एक सीट पहले से खाली है। यह सीट अंबिका चौधरी के सपा से बसपा में जाने के बाद इस्तीफा देने के बाद खाली हो गई थी।
यह है विधान परिषद का आंकड़ा
- इस वक्त विधानसभा सदस्यों की मौजूदा संख्या 402 हैं। विधानसभा की एक सीट सीट नूरपुर से भाजपा विधायक लोकेन्द्र चौहान की मौत के बाद खाली है। 402 सदस्यों की संख्या के अनुसार विधान परिषद की एक सीट के लिए 29 वोटों की आवश्यकता होगी। इस तरह भाजपा गठबंधन के खाते में 11 सीट जानी तय हैं। इसके बाद भी भाजपा के पास 5 वोट अतिरिक्त बचेंगे। वहीं, बसपा की मदद से सपा भी दो सीट आसानी से निकाल लेगी। अगर कांग्रेस के भी वोट मिला दिए जाएं तो विपक्ष के पास दो सीटें निकालने भर के वोट हैं। लेकिन मौजूदा जोड़-तोड़ की राजनीति में क्या होगा यह कहना मुश्किल है। क्योंकि राज्यसभा चुनाव में भाजपा पूर्ण आंकड़ा नहीं होने के बाद भी भाजपा अपने 9वें प्रत्याशी को भी जिता ले गई थी।