राज्यसभा चुनाव के जरिए भाजपा जाट, ठाकुर, ब्राह्मण और गुर्जरों को साधने में जुटी
मेरठ. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव 2017 में योगी-मोदी की आंधी में भी हारने वाले यूपी भाजपा के पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वायपेयी को राज्यसभा भेजने की तैयारी चल रही है। दरअसल, 23 मार्च को राज्यसभा चुनाव होने है। इसे देखते हुए भाजपा में हलचल तेज हो गई है। इस बीच ये सुगबुगाहट चल रही है कि सियासी वनवास काट रहे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी को पार्टी राज्यसभा भेज सकती है। गौरतलब है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश से विजयपाल तोमर समेत कई दूसरे नेताओं के भी नाम चर्चा में हैं।
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वाजपेयी ने हार को नहीं बनने दिया अपनी कमजारी
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी 2017 में हुए विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसके बाद उनके विरोधियों ने उनकी घेरेबंदी भी की, लेकिन वह जनता के बीच सक्रिय रहे, जिसकी वजह से उनका सियासी कद भी बना रहा। खास बात ये है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उन्हें मंचों पर तवज्जो देते रहे। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी उनके के लिए नई भूमिका तय करने का बना चुके हैं। बताया जा रहा है कि डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी को उतारने की भूमिका तैयार की जा चुकी है। इससे पहले पार्टी में उन्हें प्रदेश में एमएलसी कोटे से कैबिनेट मंत्री और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाने की चर्चा भी काफी गरम रहा था। गौरतलब है कि वाजपेयी प्रदेश अध्यक्ष के अलावा मंत्री एवं चार बार विधायक भी रह चुके हैं। उनकी वरिष्ठता भी उनके काम आ सकती है।
इन नेताओं के नाम की भी हो रही है चर्चा
दरअसल, भाजपा की मंशा उच्च सदन में ऐसे लोगों को भेजने की है, जो बहस के दौरान सरकार का पक्ष मजबूती से रख सकें। इसमें लक्ष्मीकांत बाजपेयी को माहिर माना जाता है। राजनीतिक समझ के हिसाब से भी लक्ष्मीकांत को पार्टी प्रदेश के बड़े चेहरों में शुमार करती है। वहीं, ठाकुर चेहरे के रूप में राष्ट्रीय किसान प्रकोष्ठ के पूर्व अध्यक्ष विजयपाल तोमर के नाम पर भी पार्टी में चर्चा चल रही है। खास बात ये है कि उनके परिवार की संघ में अच्छी पकड़ है। इसका लाभ भी उन्हें मिल सकता है। वहीं, जाट वोटों को साधने के लिए बुलंदशहर की अनिला सिंह और गुर्जर चेहरों में अशोक कटारिया के अलावा नवाब सिंह नागर का नाम भी चर्चा में बना हुआ है।