एशियन गेम्स में दिव्या ने जीता कांस्य पदक
नोएडा. इडोनेशिया के जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में नोएडा काॅलेज आॅफ फिजिकल एजूकेशन की दिव्या काकरान ने दमखम दिखाया है। दिव्या ने 68 किलोग्राम वेट कैटागिरी में फ्री स्टाइल में कांस्य पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। मेडल जीतने पर यूपी सरकार की तरफ से उन्हें 20 लाख रुपये और सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। दिव्या के परिजनों की माने तो इससे पहले भी घोषणाएं की जा चुकी है, लेकिन अभी तक पूरी नहीं की गई है।
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दिव्या ने जकार्ता में चल रहे एशियन गेम्स में परचम लहराया है। 68 किलोग्राम फ्री स्टाइल में दिव्या काकरान ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदका अपने नाम किया है। दिव्या ने चीनी ताइपे की रेसलर चेन वेनलिंग को 10-0 से मात देकर यह पदक अपने नाम किया है। फ्री स्टाइल रेसलिंग के क्वॉर्टर फाइनल में मंगोलिया की पहलवान शारखु के हाथों 1-11 से हार झेलनी पड़ी थी। लेकिन दिव्या ने हार नहीं मानी। शारखु ने सेमीफाइनल में चेन वेनलिंग को 10-0 से मात दी। एशियन गेम्स में अभी तक भारत के 10 मेडल हो गए है, जबकि रेसलिंग में तीसरा मेडल है। रेसलिंग में यह पहला कांस्य मेडल है।
मूलरुप से मुजफ्फरनगर के पूरबालियान गांव निवासी पहलवान दिव्या काकरान दादरी के धूममानिकपुर स्थित नोएडा कॉलेज आॅफ फिजिकल एजूकेशन में बीपीएड थर्ड ईयर की स्टूडेंट है। दिव्या होनहार महिला रेसलर है। इससे पहले भी वह प्रतियोगिता में दमखम दिखा चुकी है। राष्ट्मंडल खेलो में दिव्या कांस्य पदक हासिल कर चुकी है। ये अभी तक कॉमनवेल्थ गेम्स समेत 65 मेडल हासिल कर चुकी है। एशिया चैंपियनशिप में पहले भी 2 ब्रांन्ज मेडल, तीन सिल्वर व एक गोल्ड मेडल जीता था। भारत केसरी के 12 खिताब भी दिव्या के नाम है।
दिव्या ने जूनियर एशियन गेम्स में भी मेडल दिलाया था। लेकिन सरकारी सुविधाओं से दूर रही है। रेलवे में तीन बार फाइल जमा करने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। जुलाई 2016 में नौकरी के लिए पहली बार अप्लाई किया था। दिव्या के पिता सूरज की माने तो अन्य खिलाड़ियों के साथ ही दिव्या की फाइल रेलवे में जमा हुई थी। लेकिन वह गायब हो गई। उन्होंने बताया कि तीन बार फाइल जमा होने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। जबकि रेलवे के एक अधिकारी के आश्वासन पर फाइल जमा की गई थी। उन्होंने बताया कि नौकरी के एवज में उनसे दस लाख रुपये तक की डिमांड की गई थी। जिससे उनके पिता काफी आहत हुए थे।