ये हैं वो डीएम जिन्‍होंने समझा कचरा बीनने वाले बच्‍चों का दर्द

बच्चों का भविष्‍य सुधारने के लिए उठाया बीड़ा
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Updated: 28 Dec 2016, 10:28 AM IST
Bulandshahr
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बुलंदशहर.
यूपी की सरकार शिक्षा प्रणाली में सुधार और अच्छी शिक्षा देने के लाख वादे करे, लेकिन आज भी इसके स्‍तर कुछ खास सुधार नहीं हुआ है। इसी को देखते हुए यूपी के बुलंदशहर में कूड़ा बीनने और भिक्षा मांगने वाले बच्चों का कल संवारने के लिए जिलाधिकारी ने बीड़ा उठाया है। जिलाधिकारी ने ऐसे बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी ली है, जिनकी तरफ से सरकार ही नहीं, बल्कि तमाम सामाजिक संगठन आंखे मूंद रखी हैं।


दो जून की रोटी के लिए दर-दर भटकता भारत का वो भविष्य जो कल भारत का गौरव बनेगा, लेकिन आज एक वक्त की रोटी के लिए मौहताज है। अब बुलंदशहर के जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने भारत के इस भविष्य को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है जो वो वाकई काबिल-ए-तारीफ है। बता दें कि बुलंदशहर के डीएम ने सड़कों से कूड़ा कचरा उठाकर बेचने के बाद पेट पालने वाले बच्चों के लिए सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि खाने और कपड़े की व्यवस्था भी की है। साथ ही डीएम और ब्रह्मकुमारी इन बच्चों के परिजनों को भी शिक्षा के प्रति जागरूक कर रहे हैं। साथ ही बच्चों के परिजनों को हिदायत भी दी गई है कि अगर पढ़ने की इच्छा रखने वाले बच्चों को पढ़ाई से रोका गया तो परिजनों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी।




ऐसी ही एक बच्‍ची रिहाना ने बताया कि पहले हम कूड़ा बीनने का काम करते थे। हमने आज तक स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी थी, लेकिन बुलंदशहर के डीएम ने हमारे लिए शिक्षा की व्यवस्था की है। डीएम साहब ने हमे कबाड़े से होने वाली बीमारियों के बारे में बताया साथ ही हमें कूड़ा बीनने से मना किया है। इसी तरह नसरीन की मानें तो डीएम ने सभी बच्चों को जागरूक करते हुए कहा कि सभी बच्चे पढ़ लिखकर अच्छी पोस्ट पर जाएं। अधिकारी बनकर गरीब जनता की मदद करें।


हम बात कर रहे हैं उस भारत के भविष्य की जो कल शिक्षा तो दूर, रोटी तक को मोहताज था। आज डीएम के प्रयास से यह बच्चे जिला प्रदर्शनी के बैरन हॉल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और प्राईमरी स्कूल की टीचर व ब्रह्मकुमारी इन्हें शिक्षित करने में अपना समय दे रही हैं। बता दें कि ये बच्चे पढ़ना तो चाहते हैं, लेकिन इनके माता-पिता इन्हें पढ़ने के लिए भेजना नहीं चाहते। डीएम साहब के समझाने पर यह लोग बड़ी मुश्किल से अपने बच्चों को पढ़ने भेजने के लिए राजी हुए हैं।


ब्रह्मकुमारी निशा ने बताया कि जब हम बच्चों को लेने झुग्गी में गए थे उस समय ये बहुत ही बुरी अवस्था में थे। बच्चों का सही तरह से खाना, बोलना कुछ नहीं आता था। जब हमने इनके मां-बाप को समझाया तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया। बताया कि जब हमने उन्हें भगवान की आड़ लेकर समझाया तो उन्हें समझ आ गया। बीएसए की तरफ चार शिक्षकों की टीम बच्चों को पढ़ाने का काम करती है और हम लोग बच्चों के अंदर नैतिकता लाने का कार्य करते हैं।


जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि एक दिन मैं घूमने के लिए घर से निकला तो बच्चे को कूड़ा बीनते हुए देखा तो मुझे महसूस हुआ कि इन बच्‍चों के लिए कुछ करना चाहिए, ताकि इनका भविष्‍य भी अन्‍य बच्‍चों की तरह संवर सके। इसके बाद मैंने एक सर्वे कराया और बच्चों को चिन्हित किया। इस सर्वे के तहत 100 बच्चों को चिन्हित किया जो कभी स्कूल ही नहीं गए थे। ऐसे बच्चों के मा-बाप को उन्हें स्कूल भेजने के लिए तैयार किया साथ ही नुमाइश के बेरन हॉल में बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की। जिलाधिकारी अपने इस कदम को पुख्ता और मजबूत करने के लिए पूरी तरह कागजी कार्यवाही भी कर रहे हैं, ताकि डीएम के तबादले के बाद भी बच्चों की पढ़ाई में कोई रुकावट ना आ सके।
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