मुख्य बातें इन स्वादिष्ट मिठाईयों और व्यंजनों से भी होती वेस्ट यूपी के इन शहरों की पहचान सावन माह में लोग पहले ही कर देते है घेवर की बुकिंग लोग बिना चपाती के पी जाते है मुरादाबादी दाल
नोएडा। अच्छे और लजीज खाने की चाह सभी की होती है। यही वजह है कि कुछ जगहों की पहचान ही वहां के स्वादिष्ट व्यंजनों से होती है। इनमें वेस्ट यूपी भी पीछे नहीं है। यहां हर कोने में एक से बढ़कर एक लजीज व्यंजन मिलते हैं। इनका स्वाद भी ऐसा कि नाम लेते ही मुंह में पानी आ जाए। इसे यहां खानपान की संस्कृति की विरासत ही कहेंगे कि देशवासी ही नहीं विदेशी सैलानी भी इन मशहूर मिठाई और व्यंजनों का स्वाद चखने वेस्ट यूपी तक आते हैं, वहां के मशहूर व्यंजन का आनंद जी भर के लेते हैं। पत्रिका आप को वेस्ट यूपी के इन स्वादिष्ट व्यंजनों और मिठाईयों के बारे में बताने जा रहे हैं।
मुरादाबादी दाल
यूपी के मुरादाबाद में मूंग दाल की दल बहुत ही मशहूर है। यही वजह है कि अब इसे मुरादाबादी दाल के नाम से जाना जाता है। इस दाल को उबालकर बनाया जाता है। इसे स्वादिष्ट और चटकारे दार बनाने के लिए नींबू, प्याज, टमाटर समेत कुछ गर्म मसालों का इस्तेमाल किया जाता है। इतना ही नहीं यह दाल लोग बिना चपाती चटकारे लेकर खाते है।
मुरादाबादी बिरयानी
वेस्ट यूपी में आने वाली मुरादाबाद की दाल के साथ ही यहां की वेज और नॉनवेज काफी मशहूर है। मुरादाबादी बिरयानी अब मुरादाबाद ही नहीं बल्कि आपकों अन्य शहरों में भी मिल जाएगी। लोग मुरादाबादी स्टाइल में वेज और नॉनवेज बिरयानी बनाकर बेच रहे है। बिरायानी के स्वाद के बाद इसका नाम ही मुरादाबादी बिरयानी पड़ गया है।
खुर्जा की खुरचन
मिठाई के शौकीनों के लिए वेस्ट यूपी से अच्छी जगह शायद ही कोई और हो, यही वजह है कि यहां शहर के हिसाब से अलग अलग मिठाईयां है। इसी कड़ी में बुलंदशहर जिले में आने वाले खुर्जा की खूरचन भी बहुत मशहूर है। यह दूध को जलाकर बनाई है। जिसका स्वाद चखने के लिए दूर दराज से लोग खुर्जा पहुंचते है। मिठाईयों में खुर्जा की खूरचन की अपनी अलग डिमांड है।
दादरी का कलाकंद
यूपी का गौतमबुद्ध नगर जिला वैसे तो डवलपमेंट को लेकर जाना जाता है, लेकिन खाने के शौकीनों के लिए यहां का कलाकंद अपनी अलग ही पहचान रखता है। मिठाईयों में कलाकंद को अलग ही स्थान रखता है। इसमें जिले के दादरी का कलाकंद बहुत ही मशहूर है।
जेवर का घेवर
सावन का महीना आते ही मार्केट में घेवर की मांग शुरू हो जाती है। घेवर भी तीन तरह का होता है। सादा घेवर, मावे वाला घेवर और केसर घेवर की डिमांड रहती है। घेवर की बात करें तो गौतमबुद्ध नगर में आने वाला जेवर का घेवर बहुत ही स्वादिष्ट होता है। इतना ही नहीं जिस तरह से मुरादाबाद की दाल मशहूर है। उसी तरह जेवर के घेवर की सावन में माह में भरपूर डिमांड होती है। लोग दूर दूर से जेवर का घेवर लेने आते है।
लस्सी
जून-जुलाई के महीने में तपती गर्मी से राहत पाने के लिए लोग शिकंजी और लस्सी की तलाश में रहते है। ऐसे में नोएडा से सटे गाजियाबाद के पुराना बस अड्डे पर लालजी की लस्सी पीने वालों की लाइन लगी रहती है। इतना ही नहीं लस्सी का स्वाद और मशहूर होने का अंदाजा। इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां लस्सी पीने वालों को टोकन लेने के साथ ही लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है।
मुरादनगर की शिकंजी
वहीं गाजियाबाद जिले में आने वाले कस्बे मुरादनगर कस्बे की पहचान शिकंजी से की जाती है। इसकी वजह एनएच-24 के निकट यहां मिलने वाली जैन शिकंजी है। जिस पर घंटों के इंतजार के बार शिकंजी पीने के लिए नंबर आता है। मुरादनगर की नहर क्रॉस करते ही आप जैन शिकंजी का लुफ्त उठा सकते हैं।
बेडमी पूड़ी
अगर आप भी चटपटे के शौंकीन है तो आप गाजियाबाद के सिहानी गेट पर बेडमी पूड़ी का स्वाद ले सकते हैं। बेडमी पूड़ी के साथ ही उसके साथ मिलने वाली सब्जी और चटनी भी लाजवाब होती है। यही वजह है कि यहां से गुजने वाले लोग बेडमी पूड़ी खाये बिना आगे का सफर तय नहीं करते है।
मीरापुर के पेड़े
वेस्ट यूपी में अक्सर मुजफ्फरनगर को लोग अपराध की वजह से जानते होंगे, लेकिन खाने के शौकीनों के लिए इस जिले का मीरापुर अपने पेड़ो की वजह से मशहूर है। इस जिले ही नहीं वेस्ट यूपी में मीरापुर के पेड़े अपनी अलग ही पहचान रखते हैं। यही वजह है कि त्योहार के सीजन में यहां पेड़ो के ऑडर कई महीनों पहले आने शुरू हो जाते है।
बागपत के टटीरी की बालूशाही
बालू शाही अक्सर लोग शादी विवाह में रिश्तेदारों को देने के लिए बनवाते है। वहीं अगर हम बात करें बागपत के टटीरी में भगत जी की बालूशाही की, तो लोग खुद ही सारी बालू शाही चाट जाये। इसकी वजह यहां की बालूशाही का इतना स्वाद और मुलायम होना है। भगत जी की बालू शाही बागपत जिले ही नहीं बल्कि एनसीआर समेत दूर दूर तक मशहूर है।