
नोएडा। जिले की जेवर तहसील इलाके में प्रस्तावित इंटरनेशनल एयरपोर्ट को लेकर जल्द ही बड़ा फैसला होने की उम्मीद है। सोमवार को सिविल एविएशन मिनिस्ट्री के अधिकारियों के साथ हुई मीटिंग के बाद मंगलवार को अचानक एयरपोर्ट के काम में तेजी आ गई।
फिलहाल यमुना अथॉरिटी के सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह को लखनऊ बुला लिया गया है। वहां से मंगलवार को दिनभर जमीन व अन्य तकनीकी बिंदुओं पर सूचनाएं मांगी जाती रहीं। उधर, डीएम ने भी किसानों के साथ मीटिंग की। एक दो दिन में अथॉरिटी के कमिश्नर प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों के साथ मीटिंग कर सकते हैं। चर्चा है कि मुआवजे को लेकर ये अंतिम कवायद है, जिसके बाद इस प्रोजेक्ट के भविष्य पर फैसला होगा। सूत्रों के अनुसार, मुआवजा दर 2500 रुपये प्रति वर्ग मीटर घोषित की जा सकती है। सूत्रों के मुताबिक, जमीन के संबंध में 15 अगस्त तक फैसला लेने को कहा गया था।
2500 की दर से मुआवजे की अटकलें
मुआवजे के संबंध में प्रभावित एरिया के किसानों व किसान नेताओं के साथ मंगलवार को कलेक्ट्रेट में डीएम ने मीटिंग भी की। मीटिंग के दौरान किसानों ने करीब 3640 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजे की मांग की, जबकि प्रशासन ने सर्कल रेट से दो गुने के हिसाब से 1800 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से देने की बात कही। बताया जा रहा है कि इसमें बीच का रास्ता निकाल कर 2500 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मुआवजा दिया जा सकता है। डीएम बीएन सिंह ने किसानों से कहा है कि अधिक दर पर मुआवजा देने से एयरपोर्ट का बजट गड़बड़ा सकता है। जमीन के मामले में बुधवार या गुरुवार को प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों के साथ अंतिम मीटिंग हो सकती है। चर्चा है कि अगर किसान नहीं मानते हैं तो प्रोजेक्ट दूसरी जगह शिफ्ट हो सकता है।
किसानों की सहमति की जरूरत नहीं
हालांकि कहा जा रहा है कि जमीन अधिग्रहण अधिनियम 2013 के सेक्शन-2(1) के अनुसार खुद के उपयोग, अधिकार और नियंत्रण एवं पब्लिक सेक्टर के उपक्रम के लिए जमीन अधिग्रहण में किसानों की सहमति की जरूरत नहीं है। इसी नियम के तहत किसानों की सहमति के बिना भी एयरपोर्ट के लिए जमीन ली जा सकती है। जमीन को राज्य सरकार के नाम से लिया जाएगा। इसके लिए गांव-गांव जाकर किसानों से मीटिंग करने की भी जरूरत नहीं थी। बताया जाता है कि इन मीटिंग को लेकर सरकार यहां के जिला प्रशासन से नाराज है। इसको लेकर एक-दो अधिकारियों पर गाज भी गिर सकती है, लेकिन इसके बावजूद सरकार चाहती है कि किसानों की सहमति से ही जमीन ली जाए।