नोएडा

फोर्टिस अस्पताल ने बिल जमा न होने पर रोक दी दवाई, मरीज की मौत

अस्पतालों में मरीजों के जिदंगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है
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Sep 20, 2018
fortis
फोर्टिस अस्पताल ने बिल जमा न होने पर रोक दी दवाई, मरीज की मौत

नोएडा. अस्पतालों में मरीजों के जिदंगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। रुपये के सामने बेरहम डॉक्टर मरीज की जान लेने से भी नहीं चूक रहे है। ताजा मामला नोएडा के फोर्टिस के अस्पताल का है। आरोप है कि बिल का पेमेंट न होने की वजह से एक मरीज ने दम तोड़ दिया। बिल न जमा होने की वजह से डॉक्टरों ने उसकी दवाईयां रोक दी। जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई। मौत के बाद में परिजनों में डॉक्टरों के इस रवैये के प्रति रोष व्याप्त है। परिजनों की माने तो अस्पताल के डॉक्टरों से एक दिन का समय मांगा था। आरोप है कि डॉक्टरों ने उनकी एक नहीं सुनी।

गाजियाबाद के नंदग्राम निवासी अरविंद कुमार शर्मा एक निजी कंपनी में जॉब करते है। ये 9 सितंबर को बुलंदशहर से गाजियाबाद लौट रहे थे। जब ये लालकुआं के पास पहुंचे। उसी दौरान तेज रफ्तार में एक डंपर ने उनकी बाइक में टक्कर मार दी। उन्हें उपचार के लिए परिजनों ने सेक्टर—62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में एडमिट कराया गया था। फोर्टिस अस्पताल की तरफ से 2 दिन पहले अरविंद के परिजनों से उपचार के लिए रुपये डिमांड की गई थी। परिजनों की माने तो पहलेे भी रुपये जमा कराए थे। उसके बाद में डॉक्टरों की तरफ से दौबारा पैसों की मांग की गई थी। लिहाजा उन्होंने इलाज के पैसे जमा कराने के लिए एक दिन का समय मांगा था। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने इलाज रोक दिया। अस्पताल की तरफ से 1 लाख 26 हजार रुपये का बिल अरविंद के परिजनों को बकाया बताया गया। आरोप है कि पैसे न देने की वजह से शव देने से भी इनकार कर दिया था।

अरविंद के भांजे आकाश शर्मा ने बताया कि 22 यूनिट खून अस्पताल ने लिया था। साथ ही 6 लाख 40 हजार रुपये अस्पताल में जमा कराए थे। उन्होंने आरोप लगाए है कि दो दिन पहले ही अरविंद की मौत हो गई थी। डॉक्टरों ने अपनी सवेंदना खो दी और पैसे वसूलने के चक्कर में अस्पताल प्रबंधन सुधार की बात करता रहा। परिजनों ने बताया कि जिनके पास जो भी पैसे थे, वो जमा करा दिए थे। बचे हुए रुपयों का इंतजाम करने में लगे हुए थे। परिजनों ने बताया कि रविवार को बिल जमा कराने के लिए कहा गया था। परिजनों ने आरोप लगाए है कि बिल जमा न होने की वजह से डॉक्टरों ने दवाई रोक दी थी। दवाई न मिलने की वजह से मरीज की मौत हो गइ्र। वहीं फोर्टिस अस्पताल के प्रवक्ता जॉयश्री सैकिया ने सभी आरोपी को गलत बताया है। उन्होंने बताया कि जिसमें हममने नियमों के तहत शव को पुलिस को सौंप दिया। सरकार की तरफ से जारी मानकों और नियमों को पूरी तरह पालन किया जाता है। मरीज का उपचार अस्पताल की प्राथमिकता है।

Updated on:
20 Sept 2018 09:46 am
Published on:
20 Sept 2018 09:46 am