शहर में रहने वाले लोगों को अपनी प्रतिभा और कला का प्रदर्शन करने का मौका मिल सकेगा।
नोएडा। यूपी का शो विंडो कहे जाने वाले नोएडा शहर ने विकास के मामले में नए-नए आयाम को छूआ है। यही कारण है कि देश ही नहीं विदेश में नोएडा ने अपनी अलग पहचान बनाई है। यहां मौजूद गगनचुम्बी इमारतों में बनी खिड़कियों से पूरा शहर दिखाई पड़ता है। हालांकि इस विकसित और हाईटेक शहर में सांस्कृतिक गतिविधियों का स्थान अभी भी रिक्त ही है।
लेकिन इस खालीपन को दूर करने और सांस्कृतिक गतिविधियों को शुरु करने के लिए नोएडा लोकमंच ने ‘पहला कदम संस्कृति की ओर’ के नाम से एक सांस्कृतिक प्रकल्प शुरू किया है। जिसके तहत शहर में पूरे वर्ष सभी विधाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जायेगा। इसका उद्देश्य गुम होती कला की विधाओं और उभरती प्रतिभा के कलाकारों को जोड़कर एक साझा मंच उपलब्ध कराना है।
सेक्टर-15 स्थित नोएडा पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए ‘पहला कदम संस्कृति की ओर’ प्रोजेक्ट के चेयरमैन व राज्यसभा के पूर्व महासचिव योगेंद्र नारायण ने कहा कि नोएडा शहर एक मिनी इंडिया के सामान है, जहां देश के सभी प्रदेशों और संस्कृतियों के लोग रहते हैं। पहला कदम कार्यक्रम का प्रयास होगा कि सुनियोजित और श्रृंखलाबद्ध तरीके से सभी कलाकारों को अपनी अभिव्यक्ति देने का अवसर मिल सके। इसका उद्देश्य ख्याति प्राप्त कलाकारों और इसमें नए उभरते कलाकारों को एक सांझा मंच देना है। हमारा प्रयास होगा कि पहला कदम कार्यक्रम आने वाले एक-दो वर्षों में नोएडा में ही नहीं, देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानक बनेगा और नोएडा के उभरते कलाकारों को अभिव्यक्ति का अवसर मिलेगा।
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नोएडा लोकमंच के महासचिव महेश सक्सेना ने बताया कि नोएडा लोकमंच अपने सांस्कृतिक प्रकल्प पहला कदम संस्कृति की ओर की शुरुआत के लिए 29 अप्रैल की शाम इंदिरा गांधी कला केंद्र में लोक संध्या का आयोजन होगा। इसमें रागिनी,मल्हार, बांग्ला, राजस्थानी, उड़िया, मैथली, अवधी, बुंदेली, भोजपुरी और पंजाबी लोकगीतों के जरिये देशभर की माटी की खुशबू फैलेगी।