प्रदेश को मिला साइबर अपराध अन्वेष्ण केंद्र, डीजीपी ने किया उद्घाटन

नोएडा की कंपनी की भागीदारी से आए,लाखों के टूल, प्राधिकरण ने तैयार कराई बिल्डिंग

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May 09, 2016
cyber
नोएडा
। प्रदेश में बनने वाले पहले साइबर अपराध अन्वेष्ण केंद्र का सोमवार को डीजीपी जावेद अहमद ने उद्धाटन किया। इसके बाद उन्होंने अन्वेषण केंद्र में तैनात टीम के लोगों से मुलाकात की। साथ ही नोएडा सेक्टर-6 स्थित इंदिरागांधी कला केंद्र में अन्वेषण केंद्र को बनाने के लिए रुपया खर्च करने वाले प्राधिकरण और प्राइवेट कंपनी मालिक व बिल्डरों को बधाई दी।


इसके साथ ही डीजीपी ने अन्वेषण केंद्र बनाने की पहल कर एक एक लोगों को जोड़कर इसे तैयार कराने वाले अधिकारी एसपी सिटी की सराहना की। इस मौके पर डीजीपी, समेत मेरठ रेंज की डीआईजी लक्ष्मी सिंह, आईजी सुजीत पांडे, डीएम एनपी सिंह, एसएसपी और एसपी सिटी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहें।




अन्वेषण केंद्र की टीम में है सभी एक्सपर्ट


साइबर अन्वेषण केंद्र की टीम में सभी एक्सपर्ट को रखा गया है। इस केंद्र के नोडल अधिकारी एसपी सिटी दिनेश यादव रहेंगे। दिनेश यादव ने बताया कि सेल में एक इंस्पेक्टर और नौ कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल को शामिल किया गया है। टीम में शामिल सभी कांस्टेबल कंप्यूटर एक्सपर्ट हैं। इनमें कई बीटेक, एमसीए और तमाम कंप्यूटर कोर्स कर तीन साल की ट्रेनिग कर चुके हैं। सभी को अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई हैं।


यहां बनाया गया है अन्वेषण केंद्र


साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र को नोएडा सेक्टर-6 स्थित एसपी सिटी कार्यालय के ऊपर कार्यालय तैयार कर बनाया गया है। इस सेंटर में प्रदेश के सभी पुलिस कर्मीयों को ट्रेनिंग व कोर्ट में साईबर ऐविडेंस दिखाने के लिए भी ट्रेनिंग दी गई है। इसका स्ट्रक्चर नोएडा अथाॅरिटी ने तैयार कराया है तो वहीं इसमे इस्तेमाल होने वाले उपकरण जन सहभागिता से लगाए गए है इस साईबर लैब में देश के चुनिंदा साईबर टुल्स को इस्तेमाल किया गया है।


अब आॅनलाइन कर सकते हैं साइबर फ्रॉड की शिकायत

सीसीसीआई केंद्र में अब आप आॅनलाइन साइबर फ्रॉड की शिकायत कर सकते हैं। हालांकि मुकदमा दर्ज कराने के लिए आपकों खुद थाने पहुंचने होगा। लेकिन इससे पहले ही साइबर टीम आपकी शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर देंगी। एसपी सिटी ने बताया कि अक्सर लोगों के साथ एटीएम फ्रॉड,बैंक फ्रॉड,अकाउंट हैकिंग, स्कैनिंग समेत अन्य मामलों में अब पीडित पता लगते ही आॅनलाइन शिकायत कर सकता है। उसके शिकायत करते ही साइबर टीम पीडित से संपर्क कर शिकायत पर कार्रवाई करेंगी। प्रयास किया जाएगा की पहले पीडित के साथ हुए बैक फ्रॉड में उसका रुपया वापस लौट सकें। उसके बाद उसको कोतवाली बुलाकर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।


साइबर क्राइम के पीडितों को अब नहीं लगाने पड़ेंगे थाने के चक्कर


साइबर क्राइम टीम पर मूलभुत सुविधा और आरोपियों को ट्रेकिंग करने के टूल न होने के चलते भी पीडितों को टरका दिया जाता था लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अन्वेषण केंद्र के पास अब एक से एक टूल हैं जिनकी मदद से टीम शिकायत मिलते ही आरोपी को ट्रेक कर दबोच लेगी। इसके साथ ही पीडित के साथ हुई धोखाधड़ी में भी उसकी भरपाई करा सकेंगी।


डीजीपी ने कहा पुलिस के साथ लोगों की सहभागिता बहुत जरूरी और महत्वपूर्ण है। नोएडा यूपी का चेहरा है। ऐसे में इस शहर को एक अच्छा डेस्टीनेशन बनाने क लिए पुलिस हर प्रयास में है। इसे दिल्ली के सटे होने के साथ ही उसी लेवल से देखा जाता है। ऐसे में पुलिस की कमी को भी यहां दूर किया जाएगा। इसके साथ ही शहर के लोगों की भागीदारी से बने इस अन्वेषण केंद्र से भी बढ़ते साइबर अपराध पर अंकुश लगेगा। लोगों की ऐसी भागीदारी से पुलिस और आगे बढ़ेगी और सुरक्षा दिलाएगी।


इंटरनेट इस्तेमाल करते समय रखे डू और डोट्स का ध्यान


डीजीपी ने कहां कि आज के समय में करोड़ों लोग मोबाइल और इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं बात नोएडा की करें तो ऐसे लोगों की वजह से ही नोएडा को आईटी हब और हाईटेक सिटी के नाम से जाना जाता है लेकिेन अक्सर हम ही इंटरनेट पर खरीदारी करते समय चेटिंग करते समय डू और डोटस पर ध्यान नहीं देते। जिसका फायदा उठाकर साइबर अपराधी घर बैठे ठगी, हैकिंग, फर्जी प्रोफाइल बनाने की वारदात को अंजाम देते हैं। ऐसे अपराधियों से बचने के लिए हमें इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय डू और डोटस का ध्यान रखना होगा।


जल्दी में ना उठाए फोन, सोच समझकर दे जानकारी


वहीं डीजीपी ने फोन कॉल से ठगे जाने वाले लोगों को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर जल्द बाजी में फोन उठाकर कॉल करने वाले को अपनी खाते समेत अन्य जानकारी दे देते हैं। उन्हें इस गलती का एहसास अपने साथ अपराध होने के बाद पता लगता है। ऐसे में जल्दबाजी में फोन न उठाए। साथ ही कॉल करने वाली की पूरी जानकारी लेकर सोच समझकर उसे जवाब दें। इससे भी अपराध पर अंकुश लगने में मदद मिलेगी।


इन्होंने की 50 लाख की मदद


प्रदेश में तैयार किए गए पहले साइबर अपराध अन्वेषण केंद्र को बनाने में शहर की छह कंपनी और एनईए ने मदद की है। केंद्र से कोई लेना देना न होने के बावजूद भी इन्होंने 50 लाख रुपये का सहयोग किया। इसके लिए एसपी सिटी समेत सभी अधिकारियों ने कंपनी मालिकों व एनईए एसोसिएशन का धन्यवाद किया गया।


इस कंपनी ने दिए ये टूल


अन्वेषण केंद्र के लिए पेटीएम और सुपरटेक बिल्डर ने 17 50 लाख रुपये का मोबाइल फॉरेसिंक टूल दिया। वहीं डीएलएफ ने पांच लाख की कीमत का डिस्क इमेज टूल और मदरसन ने 4 50 लाख रुपये का डाटा एनेलाइसिस टूल दिया। वहीं क्रिडाई ने साढ़े सात लाख रुपये का पासवर्ड ब्रेकिंग टूल और डीएनडी ने दस लाख की कीमत के छह वर्क स्टेशन उपलब्ध करायें। वहीं एनईए नोएडा इंटरप्रोनिपयर एसोसिएशन ने ढाई लाख रुपये खर्च कर पांच डेस्कटॉप दिलायें। इसके साथ ही सीपीप्लस समेत कई कंपनियों ने आवेषण कंद्र में टूल खरीदने में आनने वाला खर्च उठाया है।


प्राधिकरण ने तैयार कराई बिल्डिंग


एसपी सिटी ने दिनेश यादव ने बताया कि नोएडा प्राधिकरण के सीईओ रमा रमण ने साइबर अन्वेषण केंद्र की बिल्डिंग बनवाई है। इसके लिए उन्होंने लाखों रुपये का फंड दिया है। जिसकी मदद से अन्वेषण केंद्र को एक कॉरपोरेंट कार्यालय का लुक दिया है।

Published on:
09 May 2016 05:59 pm
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