
नोएडा। ग्रेटर नोएडा पुलिस और आरपीएफ ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते ट्रेन लूटने वाले गिरोह का पर्दफाश करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, ' पिछले कुछ वक्त से लगातार ट्रेन में लूटपाट की घटनाएं सामने आ रही थी। लगातार शिकायत मिलने के बाद एक टीम का गठन किया गया और स्टेशन पर लगे CCTV फूटेज को खंगाला गया। उसमें जो परिणाम सामने आए, वो बेहद ही चौंकाने वाले थे।' पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी के आधार पर मामले का खुलास हो पाया और दो लोगों की गिरफ्तार हो पाई।
सिक्के से दे रहे थे लूट की वारदात को अंजाम
पुलिस के मुताबिक, गिरोह का टारगेट दादरी से बोड़ाकी रेलवे स्टेशन के बीच ही रहता था। यहां ट्रेन पटरियों के बीच सिक्का डालकर यह गिरोह लाखों की लूट को अंजाम देता था। ग्रेटर नोएडा के सीओ अमित किशोर श्रीवास्तव के मुताबिक, 'आरपीएफ और सूरजपुर पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किए हैं, जिनके नाम हैं राजन और दिनेश। जो मूलरूप से जहागीराबाद बुलंदशहर के रहनेवाले हैं। दोनों आरोपियों को कंटेनर डिपो के पास से गिरफ्तार किया गया, लेकिन इस गिरोह के दो साथी भागने में कामयाब हो गए।' अमित किशोर ने बताया कि पूछताछ में पता चला, 'यह लोग पहले रेलवे ट्रैन को चुनते थे और देखते थे की आस-पास कोई न हो। इसके बाद 2 किलोमीटर आगे पीछे तक अपने बदमाशों को तैनात कर दिया करते थे। गिरोह का एक सदस्य सिक्के को पटरी के जॉइंट पर डाल देता था। इससे ट्रेन का ग्रीन सिग्नल रेड में कन्वर्ट हो जाता था और वो रुक जाती थी। इसके बाद गिरोह के बाकी मेंबर तमंचा लिए ट्रेन में घुसकर लूटपाट की वारदात को अंजाम देते थे।' पुलिस ने गिरफ्तार अपराधियों के पास से अवैध तमंचा, चाकू और कई सिक्के भी बरामद किए हैं। इनके दो साथी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
सिक्के से हो जाते हैं सिग्नल चेंज
जानकारों की माने तो ट्रैक के जॉइंट के पास ही ग्रीन और रेड सिग्नल लगा होता है। सिक्का जॉइंट में फंसने की वजह से स्पार्किंग होने लगती है, जिससे सिग्नल का कलर अपने आप चेंज हो जाता है। लाइन मैन के आने तक ट्रेन रुकी रहती है। उसके ठीक करने के बाद ही ट्रेन रवाना हो सकती है।
नाइट विजन कैमरे से हुआ खुलासा
सीओ ने बताया कि करीब छह माह से रेलवे ट्रैक पर सिग्नल फेल कर यात्रियों से लूट की कई शिकायतें मिल रही थी। वहीं, अचानक सिग्नल फेल होने से कई सुपरफास्ट ट्रेनों को भी रुकना पड़ रहा था। इससे रेलवे के आलाअधिकारी भी परेशान थे। गिरोह पर नकेल कसने के लिए दादरी स्टेशन अधीक्षक ने ट्रैक पर नाइट विजन कैमरे लगवा दिए। इसके बाद एक आरोपी कैमरे में कैद हो गया, जिसके बाद पूरे मामले का खुलासा हुआ।