नोएडा

इन दो गांवों में रक्षाबंधन मनाने पर रोक, अगर कोई मनाता है तो भुगतने होते हैं ये परिणाम

सालों से चल रही है यह आन

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Aug 23, 2018
इन दो गांवों में रक्षाबंधन मनाने पर रोक, अगर कोई मनाता है तो भुगतने होते हैं ये परिणाम

नोएडा. रक्षाबंधन को भाई बहन के बीच पवित्र त्यौहार माना जाता है। इस बार रक्षाबंधन का त्यौहार 26 अगस्त को है। त्यौहार को लेकर एक तरफ जहां बाजार भी सज चुके है। वहीं बहनें भी राखी खरीदने के लिए बाजार जा रही है। यूपी के 2 गांव ऐसे भी है, जहां भाई बहन के पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन नहीं मनाया जाता है। सदियों से इन गांव में राखी बेचने वाले तो आते हैं, लेकिन उन्हें कोई खरीददार नहीं मिलता है।

गाजियाबाद के कस्बा मुरादनगर के सुराना-सुठारी गांव में छबडिया गौत्र के लोग रहते है। ये रक्षाबंधन का त्यौहार नहीं मनाते है। हिंडन नदी के किनारे बसा सुराना गांव राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के करीब है। यह मुरादनगर विकास खंड का सबसे अधिक आबादी वाला है। सालों पहले सुराना गांव को सोहनगढ़ के नाम से जाना जाता था। लेकिन बाद में इसका नाम बदल दिया। ग्रामीणों ने बताया कि सुराना-सुठारी गांव में अधिकांश आबादी छबडिया गौत्र के लोगों की है। इस गांव में कभी पृथ्वीराज चौहान के परिजनों ने डेरा डाला था।

ग्रामीणों की माने तो उनके पूर्वज करीब 11वीं सदी में आए थे। पृथ्वीराज चौहान के परिजन छत्र सिंह राणा ने हिंडन के किनारे गांव को बसाया था। छत्र सिंह के पुत्र सूरजमल राणा के दो पुत्र विजेश सिंह राणा व सोहरण सिंह राणा हुए थे। विजेश सिंह राणा को घुड़सवारी का बहुत शौक था। विजेश ने बुलंदशहर की जसकौर से शादी की थी। मोहम्मद गौरी को मालूम हुआ था कि पृथ्वीराज चौहान के परिजन सोहनगढ़ में रहते है तो उसने रक्षाबंधन वाले दिन हमला कर दिया। इस दौरान उसे रास्ते में जो भी मिला उसे हाथियों से कुचलवा दिया। इस दौरान विजेश सिंह राणा की हत्या की गई। विजेश राणा की मौत के बाद में उनकी पत्नी ने पत्नी जसकौर सती हो गई। जसकौर की समाधि गांव में मौजूद है, लेकिन अब वह खंडहर हो चुकी है।

तभी से इन गांवों में लोग रक्षाबंधन नहीं मनाते। गांव की केवल एक महिला राजवती जिंदा बची थी। सोहरण सिंह की पत्नी बुलंदशहर के उल्हैड़ा गांव में पिता सुमेर सिंह यादव के घर गई हुई थी। राजवती के दो पुत्र थे, उनका लालन पोषण नंनसाल में हुआ था। दोनों बेटों को ही घटना की जानकारी दी थी। दोनों ने ही सोहनगढ और सुठारी गांव को बसाया था। ग्रामीणों की माने तो कोई बहन भाई को राखी बाधंती है तो अप्रिय घटना घटित होती है।

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Published on:
23 Aug 2018 06:33 pm
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