
कुछ विदाई ऐसी होती है, जो पद से भले ही हो जाए पर प्रभाव से नहीं होती। हरमनप्रीत कौर की भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तानी से विदाई भी ऐसी ही है, जो नेतृत्व की अमिट छाप छोड़़ रही है। तीनों प्रारूपों की कप्तानी छोडऩे का उनका फैसला भारतीय महिला क्रिकेट में बदलाव की शुरुआत के साथ उस अध्याय का अंत भी है, जिसे इतिहास लंबे समय तक याद रखेगा। हरमनप्रीत कौर अब केवल खिलाड़ी के रूप में मैदान पर उतरेंगी।हरमनप्रीत की कप्तानी का सबसे चमकदार पन्ना 2025 का विश्वकप है। हरमनप्रीत उस ऐतिहासिक टीम की कप्तान बनीं, जिसने विश्व मंच पर साबित किया कि भारतीय महिलाएं दबाव में भी इतिहास लिख सकती हैं। घरेलू मैदान पर भारतीय महिला टीम ने पहली बार वनडे विश्व कप का खिताब जीता। यह सिर्फ एक खिताबी जीत नहीं थी, बल्कि उस सोच की जीत थी, जिसमें महिला क्रिकेट को पुरुष क्रिकेट की छाया में नहीं अपनी अलग पहचान के साथ देखा जाने लगा था। उनकी उपलब्धियां विश्वकप तक ही सीमित नहीं रहीं। उनके नेतृत्व में भारत ने एशिया कप और एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जैसी बड़ी सफलताएं हासिल कीं। 2026 के एशियन गेम्स में लगातार दूसरी बार स्वर्ण जीतना उनके कप्तानी कार्यकाल का एक शानदार समापन बना।
हरमनप्रीत की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद आंकड़ों और ट्रॉफियों से परे है। उन्होंने भारतीय बेटियों को भरोसा दिया कि क्रिकेट का मैदान उनका भी उतना ही है, जितना किसी और का। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी, निर्भीक फैसलों और कठिन परिस्थितियों में नेतृत्व ने नई पीढ़ी को रास्ता दिखाया। अब स्मृति मंधाना के हाथों में भारतीय महिला क्रिकेट टीम के नेतृत्व की कमान होगी। तीस वर्षीय स्मृति मंधाना पहले भी टीम की उपकप्तान रही हैं। जिम्बाब्वे के खिलाफ वनडे और टी-20 सीरीज से उनके नए दौर की शुरुआत होगी। हर सफल टीम को समय-समय पर नई ऊर्जा, नए विचार और नए नेतृत्व की जरूरत होती है। हालांकि स्मृति पर उस विरासत को आगे बढ़ाने की चुनौती होगी, जिसे हरमनप्रीत ने अपने खून-पसीने से सींचा है। विश्वकप जीतने के बाद अपेक्षाएं बढ़ चुकी हैं। अब भारतीय महिला टीम से लगातार विश्व क्रिकेट में दबदबे की उम्मीद होगी।
हरमनप्रीत ने कप्तानी छोड़ी है, भारतीय क्रिकेट नहीं। यही इस विदाई की सबसे खूबसूरत बात है। कप्तान के रूप में उनकी पारी खत्म हुई है, खिलाड़ी के रूप में कहानी अभी बाकी है। संभव है, आने वाले वर्षों में मैदान पर बल्ला थामे हरमनप्रीत फिर कोई ऐसी पारी खेलें, जो नई पीढ़ी को बताए कि महान खिलाड़ी अलग ही छाप छोडऩे वाले होते हैं। भारतीय महिला क्रिकेट को हरमनप्रीत ने केवल ट्रॉफियां नहीं दीं, आत्मविश्वास भी दिया है। अब स्मृति की बारी है कि उस आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएं।