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परंपरा से समकालीनता की ओर आगे बढ़ी कलाएं

डा. राजेश कुमार व्यास
2 min read
Apr 14, 2025
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कलाओं की दृष्टि से हमारे पास समृद्ध-संपन्न परम्परा है। यह बात समझने की है कि समकालीन कलाओं का मूल हमारी वह सांस्कृतिक दृष्टि है, जिसमें पारंपरिक ज्ञान, सामाजिक, धार्मिक-प्रथाएं आने वाले समय की दृष्टि बनती।
इसीलिए कहें, संस्कृति में निवेश भविष्य का कला संचय, उसकी आधुनिकि है। कोई कला-रूप तभी प्रासंगिक रह सकता है, जब समय से उसका निरंतर संवाद हो।
आज भी जिस मुगल कला की दुहाई विश्वभर में दी जाती है उसका बहुत सारा भाग राजस्थान की चित्रकृतियां ही हैं। बीकानेर में वहां के राजाओं ने 1591 में ही लाहौर से अली रज़ा और रूकुनुद्दीन, इन दो कलाकारों को बुलाया था और इन्होंने बहुत सुंदर कलाकृतियां सिरजी। राजस्थान में सातवीं शती से ही घाणेराव में अपभ्रंश के मेल से मारवाड़ शैली की सिरजी कलाकृतियां का इतिहास मिलता है।
कथक की आज जो विरासत है, इतिहास में प्रमाण है कि उसके बीज बीकानेर, चूरू क्षेत्र में पड़े थे। कथक के जयपुर घराने की बात होती है परन्तु यह घराना समृद्ध-संपन्न चूरू के उन कथकियों से हुआ है जिन्होंने पहले पहल इस नृत्य में विरल प्रयोग करते इसको एक रूप प्रदान किया।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक के हमारे देश में अलग-अलग प्रांतों की अपनी पृथक-पृथक लोक कलाएं वहां के जीवन, रीति रिवाजों और परम्पराओं से निरंतर विकसित होती हुई आधुनिक कलाओं की दृष्टि बनी है।
ए. रामचंद्र ने जनजातीय जीवन को आधुनिक ढंग से अपनी कला में जीवंत किया है। उदयपुर में उन्होंने कभी यहां के प्रसिद्ध कलाकार ललित शर्मा के साथ घूम घूम कर आदिवासी जन जीवन के चित्र उसके। उनकी कमल सरोवर', 'ययाति', 'काली पूजा', 'उर्वशी' आदि कलाकृतियां परंपरागत ज्ञान की आधुनिकी ही तो है। तैयब मेहता की महिषासुरमर्दिनी विश्व बाजार में करोड़ों में बिकी। इसका मूल हमारी पुराण कथा है। हुसैन ने कभी कला रसिक उद्योगपति बद्री विशाल पित्ती के आग्रह पर पुराण कथाओं और रामायण के चित्रों की पूरी शृंखला सृजित की जो बाद में आधुनिक कला बाजार की धरोहर बनी। रजा आधुनिक कला के चहते कलाकार रहे हैं, उन्होंने कालिदास, भास, कबीर के लिखे को अपनी कलाकृतियों में लिख बिंदु में रेखाओं का निर्गुण रचा। पारंपरिक भारतीय तन्त्र कला इनकी कला की आधुनिकी का आधार रहा।
समकालीन कलाएं असल में लोक-मानस और जीवन से जुड़े आलोक से ही सदा प्रेरित होती रही है। राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात, तमिलनाडू, केरल, आन्ध्रपदेश आदि प्रांतों की अपनी लोक कलाओं ने हमारी आधुनिक कलाओं को निंरतर समृद्ध और संपन्न किया है। इतिहास जहां पहुंच नही पाता, वहां जीवन में गूंथे बिंब प्रतीक आधुनिक होते हमारी कलाओं को सदा जीवंत बनाए रखते हैं। समकालीन कला का सच यही है। जिस कलाकार ने भी परंपरा में ध्यान का ज्ञान संजोया, वही आधुनिक कला बाजार में लोकप्रिय हुआ है। यह सच है - कलाएं, अनुभव, विचार और भविष्य की दृष्टि में ही सदा बढ़त करती हैं।

Updated on:
14 Apr 2025 06:08 pm
Published on:
14 Apr 2025 06:08 pm