Rajasthan Nikay Chunav 2026: आईना- लोकतंत्र की किलाबंदी
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Gulab Kothari Article : इस परिवेश में हम कैसे सुसंस्कृत संतान की कल्पना कर सकते हैं। मां अपना दायित्व भूल बैठी। सत्ता, पद, अभिजात्य जीवन ही उनको आकृष्ट कर रहा है। संतान के प्रति उनके कत्र्तव्य मात्र सुख सुविधा जुटाकर देने तक ही सीमित हो गया। पिता भी उसी धन-प्राप्ति की अंधी दौड़ में लगा है। परिवार का सुख धन रूप हो गया। स्वस्थ पारिवारिक वातावरण के अभाव में संतानें भी जीवन के प्रति उदारवादी दृष्टिकोण को नहीं समझ पा रही।